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मायावती के ब्राह्मण कार्ड को लेकर कांग्रेस में हलचल तेज

Sat, 20 Apr 2013 12:11 AM IST
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली Updated Sat, 20 Apr 2013 12:11 AM IST
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mayawati plays brahmin card again

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर ब्राह्मण कार्ड खेलने को लेकर कांग्रेस में हलचल तेज हो गई है।

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पार्टी को लगने लगा है कि अगर समय रहते हुए नहीं जागी तो आगामी चुनाव में स्थिति बद से बदतर हो सकती है।

लिहाजा, जमीन पर उतरकर ब्राह्मण वर्ग के बीच कम से कम मौजूदगी दर्ज करने की बात पर चर्चा शुरू हो गई है।

जुबानी हमलों की तैयारी
मायावती की तरह ज्यादा से ज्यादा ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट देने की बात को भी अंदरखाने आलाकमान तक पहुंचाने की कोशिश होने लगी है। साथ ही बसपा प्रमुख पर जुबानी हमलों की तैयारी भी पार्टी ने शुरू कर दी है।
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मायावती ने बुधवार को सपा पर ब्राह्मणों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न का आरोप लगाया ही साथ ही कांग्रेस पर विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों को गुमराह करने का आरोप मढ़ा।
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बसपा प्रमुख ने कहा कि कांग्रेस ने ब्राह्मण वोट बैंक को पार्टी से अलग करने में सपा की मदद की। ब्राह्मणों को आरक्षण समेत तमाम लुभावने वादों के जरिए मायावती के सोशल इंजीनियरिंग की दोबारा कसरत से कांग्रेस को चिंता सताने लगी है।

लिहाजा, मायावती के इस फार्मूले को अपनाने पर कांग्रेस के शीर्ष स्तर पर बातचीत शुरू हो गई है। अभी प्रदेश के कई ब्राह्मण नेताओं को प्रदेश में जिला स्तर पर सम्मेलन करने के लिए कहा गया है। साथ ही मायावती के कांग्रेस पर आरोप को लेकर भी पार्टी ने करारा जवाब देना शुरू कर दिया है।

ब्राह्मणों का उत्पीड़न
केंद्रीय राज्य मंत्री और शाहजहांपुर से कांग्रेस सांसद जितिन प्रसाद ने अमर उजाला से कहा कि चुनाव में हारने के बाद ही बसपा को भाई चारा समिति और ब्राह्मणों की याद आती है। उसके बाद समिति और ब्राह्मण भूला दिए जाते हैं।


हकीकत यह है कि बसपा सरकार के कार्यकाल में ही सबसे ज्यादा उत्पीड़न ब्राह्मणों का ही हुआ। उनके खिलाफ निराधार मुकदमे दर्ज कराए गए। उनके कल्याण के नाम पर कुछ नहीं किया गया। अब फिर उन्हें बहकाने का काम शुरू कर दिया गया है।

दूसरी तरफ कांग्रेस विधायक प्रमोद तिवारी भी कहते है कि मायावती का आरोप बिल्कुल निराधार है कि कांग्रेस ने ब्राह्मण वर्ग को गुमराह करने के लिए सपा की मदद की। पार्टी कभी वोटों की राजनीति नहीं करती।

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