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माया के सरकारी बंगले के खर्च का ब्यौरा दे सरकार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 01 Mar 2013 10:36 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार को पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती के बंगले पर हुए खर्च का ब्यौरा पेश करने का आदेश जारी किया है। सरकार को 2002 से 2012 तक मायावती के मॉल एवेन्यू स्थित बंगला नंबर-13 के खर्च का ब्यौरा देना है।
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सर्वोच्च अदालत ने यह आदेश एनजीओ ‘लोकप्रहरी’ की ओर से दायर उस याचिका पर जारी किया है, जिसमें राज्य सरकार की ओर से पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास के तौर पर बंगले आवंटित करने की नीति को चुनौती दी गई है।
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चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एनजीओ की ओर से पेश हुए याचिकाकर्ता एसएन शुक्ला ने 2004 से लंबित इस याचिका पर जल्द अंतिम सुनवाई किए जाने की मांग भी की। पीठ ने याचिकाकर्ता की इस गुजारिश को भी स्वीकार करते हुए 16 अप्रैल से सुनवाई किए जाने को कहा है।
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पिछले कई वर्षों से लंबित इस याचिका को 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम सुनवाई के लिए लगा दिया था। मगर तबसे इस याचिका पर सुनवाई ही नहीं हो सकी। पीठ ने शुक्ला के उस आवेदन को भी अनुमति प्रदान कर दी, जिसमें मायावती के बंगले पर हुए खर्च का ब्यौरा तलब किए जाने की मांग की गई थी।
पीठ ने यूपी सरकार को इस मसले पर होने वाली सुनवाई से पहले बसपा सुप्रीमो के बंगले की मरम्मत में हुए खर्च का ब्यौरा पेश करने का आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार 2002 से 2012 तक मायावती के बंगले को ठीक करने में किए गए खर्च के बारे में अदालत को बताएगी।
एनजीओ की ओर से आठ साल पहले दायर की गई याचिका में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास आवंटित किए जाने की नीति-नियम को चुनौती दी थी।
1997 में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई इस नीति को कार्यकारी आदेश के जरिए लागू किया गया था। हालांकि इस नियम को उससे पहले ही हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कार्यकारी नियम उचित नहीं है। यह कोई वैधानिक नियम नहीं है, अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप कर उचित आदेश जारी करना चाहिए।