फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Mayawati, mamta and jayalalitha beaome game changer in lok sabha election

16वीं लोकसभा में गेमचेंजर होंगी अम्मा, दीदी और बहनजी

Sat, 08 Mar 2014 12:17 AM IST
Updated Sat, 08 Mar 2014 12:17 AM IST
विज्ञापन
Mayawati, mamta and jayalalitha beaome game changer in lok sabha election

15वीं लोकसभा ने सियासत में आधी आबादी को पूरा हक देने संबंधी महिला आरक्षण बिल की राह भले ही रोक ली हो। मगर यह महज संयोग नहीं होगा कि 16वीं लोकसभा के चुनाव में सत्ता की इबारत लिखने में देश की तीन ताकतवर महिलाएं जयललिता, ममता बनर्जी और मायावती सियासी गेमचेंजर की भूमिका में होंगी।

विज्ञापन


देश की राजनीति में अम्मा, दीदी और बहनजी के नाम से चर्चित इन तीनों हस्तियों ने अपनी राजनीतिक ताकत के दम पर भावी सियासत के प्यादे चारों तरफ चलने भी शुरू कर दिए हैं। केंद्र की सत्ता का संतुलन बनाने या बिगाड़ने की इनकी इसी ताकत को भांपते हुए एनडीए हो या यूपीए दोनों की इन तीनों पर निगाहें लगी हैं।
विज्ञापन


तो क्षेत्रीय दलों के वर्चस्व की संभावनाओं के बीच ये भी प्रधानमंत्री पद की होड़ से खुद को बाहर नहीं मान रहीं। तभी तो वामदलों से बृहस्पतिवार शाम चुनावी गठबंधन टूटा तो शुक्रवार सुबह महज 12 घंटे में ही जयललिता ने ममता बनर्जी को फोन डायल कर अम्मा, दीदी और बहन जी को साथ लाने की संभावित मुहिम को एक नई हवा तो दे ही दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मायावती के हक में स‌ितारे

Mayawati, mamta and jayalalitha beaome game changer in lok sabha election

खास बात यह है कि ममता, जया और मायावती के सितारे अपने अपने राज्यों में फिलहाल उनके हक में ही दिख रहे हैं। फिर राजनीति का अलग-अलग दायरा होने के कारण तीनों के बीच सियासी टकराव की कोई बड़ी वजह भी नहीं है।

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में 48 सीटें हासिल करने वाली अन्नाद्रमुक, तृणमूल कांग्रेस और बसपा को संयुक्त रूप से इस बार 70-80 सीटों का आंकड़ा छूने का चुनावी विश्लेषक अनुमान लगा रहे हैं। गठबंधन राजनीति के इस दौर में यह संख्या बेहद महत्वपूर्ण होगी।

अलग-अलग समीकरण

Mayawati, mamta and jayalalitha beaome game changer in lok sabha election

इन तीन चर्चित हस्तियों की ताकत पर किसी भी दल को रत्ती भर भी संदेह नहीं है। भाजपा और उसके पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी चुनाव बाद इन तीनों में से कम से कम दो ममता और जया की जरूरत को लगातार महसूस कर रहे हैं। यही कारण है कि जब मोदी चेन्नई जाते हैं तो अम्मा को गुलदस्ता देने उनके दरवाजे जाना नहीं भूलते।

तो कोलकाता में ममता को साधने के लिए मोदी बंगाल में दीदी दिल्ली में हम का नारा देकर उनकी तारीफ करने से नहीं चूकते। इसी लिए भाजपा अम्मा के खिलाफ हमला करने से बच रही है। माया और ममता को लेकर कुछ ऐसा ही हाल कांग्रेस का है।

पश्चिम बंगाल की राज्य इकाई भले ही ममता के खिलाफ  हमलावर है, मगर केंद्रीय नेतृत्व उन पर हमले से बच रहा है। उधर इन तीनों ही राजनीतिक हस्तियों का चूंकि दायरा अलग-अलग है, इसलिए चुनाव बाद अगर तीनों एक हो जाएं तो पूरी की पूरी राजनीति यू टर्न ले सकती है।

तीनों प्रधानमंत्री पद की दावेदार

Mayawati, mamta and jayalalitha beaome game changer in lok sabha election

हां तीनों के एक होने में सबसे बड़ी बाधा प्रधानमंत्री का पद बन सकता है। उल्लेखनीय है कि तीनों नेता अपनी इस महत्वाकांक्षा को कई बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित भी कर चुकी हैं।

अभी दो दिन पहले जया के साथ सहयोग का सकारात्मक रुख देने वाली ममता को अम्मा ने जिस तत्परता से शुक्रवार सुबह फोन किया वह दर्शाता है कि उनकी राष्ट्रीय क्षितिज की महत्वाकांक्षाएं इस बार ज्यादा आक्रामक हैं। वहीं मायावती इस समय किसी गठबंधन से दूर चुनाव बाद के समीकरणों पर निगाह रख अपनी सियासत मजबूत करने में जुटी हैं।

यूपी में मोदी के प्रभावों के बीच मुजफ्फरनगर दंगों और कानून व्यवस्था को लेकर निशाने पर आई सपा के खिलाफ नाराजगी का सियासी फायदा उठाकर मायावती अपनी सीटें बढ़ाने की कोशिश में हैं।

तमिलनाडु में अम्मा किचन, श्रीलंका में तमिलों के नरसंहार का तीखा विरोध और दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई के प्रयास के मामले ने जयललिता के लिए माहौल अनुकूल बना दिया है। जहां तक पश्चिम बंगाल की बात है तो वाम दल फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के मुकाबले कमजोर दिख रहे हैं।

दो दशकों से छायी हैं सियासत में

Mayawati, mamta and jayalalitha beaome game changer in lok sabha election

चुनावी महासमर का बिगुल बजते ही सबकी निगाहें भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए चर्चाओं के केंद्र में जरूर हैं। मगर देश की इन तीन चर्चित महिला नेत्रियों के समीकरण की अनदेखी चुनावी पंडितों के लिए बड़ी भूल होगी।

आखिर अम्मा, दीदी और बहनजी बीते करीब दो दशकों से भारतीय राजनीति को कभी प्रत्यक्ष तो कभी परोक्ष रूप से लगातार प्रभावित करती रही हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती यूपीए सरकार के दोनों कार्यकाल के दौरान अहम भूमिका में रही हैं।

जबकि तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी यूपीए दो की लंबे समय तक तारणहार रही हैं। ये वही ममता हैं जिसने कांग्रेस से हाथ मिला कर वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल में करीब साढ़े तीन दशक से अभेद्य वामपंथी सियासी किले को ध्वस्त कर दिया था।

फिर उस जयललिता को कौन भुला सकता है जिसने वर्ष 1998 में चाय की प्याली में तूफान खड़ा कर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को महज एक वोट से गिराने की पटकथा लिखी थी। तब मायावती ने अंत समय में वाजपेयी सरकार के खिलाफ  वोट कर जयललिता की इच्छा पूरी कर दी थी।

अद्भुत समानता

Mayawati, mamta and jayalalitha beaome game changer in lok sabha election

अम्मा, दीदी और बहनजी तीनों भारतीय राजनीति की चर्चित ही नहीं ताकतवर महिला हस्तियां हैं। तीनों में कई अदभुत समानताएं भी हैं। मसलन तीनों अपनी अपनी पार्टी की मुखिया हैं और तीनों की तीनों अविवाहित हैं। तीनों ही ठसक की राजनीति के लिए जानी जाती हैं।

इनमें से दो तो अलग अलग सूबे की मुख्यमंत्री हैं। तो मायावती तीन बार इस पद को संभाल चुकी हैं। फिर तीनों के ही मन में प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा चरम पर है। इसी रणनीति के तहत अम्मा ने भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से बेहतर संबंध के बावजूद तीसरे मोर्चे की सियासत को जिंदा करने की कोशिशें जारी रखी हैं।

वहीं ममता अलग फ्रंट बना कर तीसरे विकल्प की राजनीति को ही हड़प जाना चाहती हैं। वहीं मायावती ने इन्हीं संभावनाओं के मद्देनजर खुद को किसी गठबंधन से अलग रखते हुए अपनी चौतरफा सियासत का द्वारा खोले रखा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed