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राज गया तो मायावती ने बदली चुनावी रणनीति
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 25 Jan 2013 09:11 PM IST
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उत्तर प्रदेश की सत्ता हाथ से जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की रणनीति में बदलाव देखने को मिला है। कांग्रेस और भाजपा जैसे प्रमुख राजनीतिक दल जहां अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति में व्यस्त हैं। वहीं मायावती उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ सपा की जगह लेने में जी-जान से जुटी हैं।
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इस क्रम में मायावती ने जहां मीडिया के प्रति लचीला रुख अपनाया है। साथ ही अब वह पहले के मुकाबले आसानी से उपलब्ध हैं। लोकसभा चुनाव पर नजर रखते हुए बसपा सुप्रीमो ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ बनाने के लिए कांग्रेस और भाजपा को निशाने पर लिया है। यही वजह है कि दिल्ली गैंगरेप हो या हिंदू आतंकवाद का मुद्दा, हर राष्ट्रीय मसले पर वह खुलकर राय देते हुए बसपा का राष्ट्रीय प्रभाव बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
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राहुल के कांग्रेस उपाध्यक्ष और राजनाथ के भाजपा अध्यक्ष पद पर काबिज होने के सवाल पर मायावती कहती हैं कि आप (मीडिया) दोनों पार्टियों को ही इतना महत्व क्यों देते हैं। आप देखते जाएं, इस बार नतीजे चौंकाने वाले होंगे।
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दरअसल, संसद के शीतकालीन सत्र से लेकर अब तक मायावती ने दिल्ली की सियासत में खलबली मचा रखी है। प्रमोशन में आरक्षण विधेयक के मसले से लेकर खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश समेत तमाम मुद्दों पर उन्होंने अपनी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टी सपा को कड़ी टक्कर दी है। साथ ही कांग्रेस और भाजपा को भी आड़े हाथों लिया है।
दरअसल, मायावती लोकसभा चुनाव से पहले कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसे अहम राज्यों के विस चुनावों के सेमिफाइनल में उतरकर कांग्रेस और भाजपा का खेल बिगाड़ने की कोशिश में हैं। मायावती पिछले एक महीने में दिल्ली में तीन बड़ी प्रेस कांफ्रेंस कर चुकी हैं। मीडिया प्रबंधन का काम उनके करीबी और बसपा में अहम माने जाने वाले सतीश चंद्र मिश्र, बृजेश पाठक और अम्बेथ राजन देखते हैं।
बसपा लोकसभा चुनाव के लिए अपने आधे से ज्यादा उम्मीदवार तय कर चुकी है। साथ ही प्रदेश स्तर पर जनाधार बढ़ाने के लिए भाईचारा कमेटी बनाने का काम तेजी से चल रहा है। हालांकि उनके प्रतिद्वंद्वी उनके खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामलों को हवा देकर चुनावी मुद्दा बनाने में जुट गए हैं।