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मथुरा के पेड़े और आगरा के पेठे से जुड़ी है ये खबर

Wed, 03 Jun 2015 02:23 AM IST
Updated Wed, 03 Jun 2015 02:23 AM IST
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mathura's peda and agra's petha stall not at railway station

मथुरा के रेलवे स्टेशन से मथुरा का प्रसिद्ध पेड़ा और आगरा का पेठा गायब है। सात साल से 17 हजार रुपए रोजाना का रेलवे को घाटा देकर भी रेलवे अफसर बेफिक्र हैं। इस समयावधि में रेलवे के जीएम से लेकर अन्य अधिकारियों में से किसी ने मथुरा स्टेशन पर पेड़ा और पेठा बिक्री शुरू कराने में रुचि नहीं दिखाई।

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श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा का पेड़ा पूरे भारत में मशहूर है। यहां तक कि वृंदावन के प्रमुख बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन सवा मन पेड़े का भोग लगता है और श्रीनाथद्वारा के मंदिर के लिए मथुरा से रोज पेड़ा भोग प्रसाद को जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु मथुरा के पेड़े को प्रसाद के रूप में घर ले जाते हैं। पेडे़ की मिठास में आगरा का पेठा भी साथ देता है।
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रेलवे सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2008 तक रेलवे की आईआरसीटीसी पेड़े और पेठे की बिक्री के ठेके हर दो वर्ष के लिए उठाती थी। इससे रेलवे को रोजाना 17 हजार रुपए राजस्व मिलता था। 28 फरवरी 2008 के बाद से यहां के रेलवे स्टेशन पर पेड़े और पेठे की बिक्री बंद है। इसकी शिकायत समय-समय पर रेलवे के जीएम से लेकर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से की गई लेकिन किसी अधिकारी ने इसमें रूचि नहीं दिखाई। अब यह व्यवस्था डीआरएम के हाथों में है।

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धड़ल्ले से हो रही है सूजी और बूरा के पेड़े की बिक्री

mathura's peda and agra's petha stall not at railway station

रेलवे के कुछ कर्मचारियों की सेटिंग के चलते मथुरा जंक्शन और यहां रुकने वाली ट्रेनों में बेहद घटिया क्वालिटी के पेड़े की अवैध बिक्री जारी है। सूजी और बूरा के पेड़े को सांठगांठ पर ठेकेदार धड़ल्ले से बेच रहे हैं।

सात साल से मथुरा के पेड़े और आगरा के पेठे से वंचित मथुरा जंक्शन के मामले में रेलवे सूत्रों के अनुसार ठेकेदारों से जो सेवा मांगी जाती है वह पूरी नहीं हो पा रही है।

सूत्रों के अनुसार समय-समय पर निरीक्षण में सेवा भगत, आरपीएफ, जीआरपी, स्टेशन कर्मियों को समझने के अलावा महीने पर अलग से व्यवस्था करने की शर्तें इतनी कठिन हो चुकी हैं कि पेड़े और पेठे के ठेकेदार ऊपरी खर्चे को उठाने से मना कर देते हैं।

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