अखिलेश के साथ दिखा दंगे का मास्टरमाइंड
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सांप्रदायिक दंगे के मास्टरमाइंड कहे जा रहे मोहर्रम अली उर्फ पप्पू के सोशल मीडिया पर आए एक फोटो से सियासी तूफान मचा हुआ है। इस फोटो में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ सपा के सहारनपुर विधानसभा उपचुनाव प्रत्याशी संजय गर्ग, राज्यमंत्री राजेंद्र राणा, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सरफराज खान के साथ मोहर्रम अली पप्पू दिखाई दे रहा है। गुरुद्वारा रोड पर विवादित जमीन में सिख समुदाय की ओर से समर्थन कर रहे सपा नेता गुरप्रीत सिंह बग्गा भी इसमें हैं।
सियासी तूफान इसलिए भी उठा है कि पुलिस मोहर्रम अली पप्पू को सांप्रदायिक दंगे का मास्टरमाइंड मान चुकी है। उस पर शहर के विभिन्न थानों में अब तक 87 मामले दर्ज हो चुके हैं। पुलिस अब उसके सियासी संरक्षक को तलाश रही है।
एडीजी देवेंद्र कुमार चौहान कह चुके हैं कि दंगे सुनियोजित हैं और सियासी सरपरस्ती देने वालों की तलाश है। पप्पू पूर्व में सपा नगर अध्यक्ष पद पर और फिर बसपा में रह चुका है। दंगे के आरोपों में हुई गिरफ्तारी के दौरान उसने खुद को लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे इमरान मसूद के साथ बता कर सियासी गलियारे में हलचल पैदा कर दी थी।
सोशल मीडिया पर आए फोटो से मचा सियासी तूफान
हालांकि कांग्रेस जिलाध्यक्ष मेहरबान आलम ने साफ किया था कि पप्पू को कभी पार्टी में शामिल नहीं किया गया। इससे मामला और पेचीदा हो गया कि आखिर पप्पू का सियासी लिंक किससे है। दंगे के दौरान ही इमरान मसूद ने पप्पू को सपा के वर्तमान उप चुनाव प्रत्याशी संजय गर्ग का साथी बता कर मामले को दिलचस्प मोड़ दिया था। अब सोशल मीडिया पर आए फोटो ने फिर से सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया है।
संजय गर्ग की फेसबुक पर एक अप्रैल, 2014 को यह फोटो अपलोड किया गया है। इसके बारे में उनका है कि पप्पू उनके साथ लखनऊ पार्टी में शामिल होने गया था, लेकिन शामिल नहीं हुआ था, उसने कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी।
इस मामले में सपा नेता संजय गर्ग का कहना है कि उस दिन वह किसी काम से वहां गया था। दो अप्रैल से मतगणना तक पप्पू कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद के साथ रहा। अब भी वह इमरान का साथी है।
मुख्य आरोपी ने पुलिस को बताए दंगाइयों के नाम
दंगे के मुख्य आरोपी मोहर्रम अली उर्फ पप्पू ने पूछताछ में पुलिस को कई ऐसे नाम बताए हैं जो दंगे में आगे रहे हैं। दंगे में कौन लोग साथ शामिल रहे और उनकी क्या भूमिका रही है। इस बारे में भी पुलिस को पप्पू ने अहम सुराग दिए हैं। मेरठ के मंडलायुक्त भूपेंद्र सिंह सहारनपुर दंगे की मजिस्ट्रेटी जांच के लिए तीन अगस्त को सहारनपुर पहुंचेंगे। वे यहां तीन से पांच अगस्त तक रहेंगे और दंगाग्रस्त इलाकों का निरीक्षण करेंगे।
पप्पू से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस दंगाइयों को चिह्नित कर उनकी गतिविधियों की जानकारी कर रही है। उनका कामकाज क्या है। किन लोगों से उनके संबंध हैं। चिह्नित दंगाइयों की फोन कॉल डिटेल तक खंगाली जा रही हैं। एसएसपी राजेश पांडेय का कहना है कि दंगाई कोई भी हो, उसे किसी कीमत पर बक्शा नहीं जाएगा। पुलिस को कई ऐसे नामों का पता चला है जो दंगे में सक्रिय रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगाई गई हैं। एडीएम प्रशासन दिनेश चंद्र ने बताया कि मेरठ के आयुक्त भूपेंद्र सिंह तीन अगस्त को घटनास्थल, क्षतिग्रस्त दुकानों, वाहनों और क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे। संबंधित अधिकारियों से वार्ता करेंगे। इसके बाद चार और पांच अगस्त को सुबह दस से एक बजे और शाम को तीन से सात बजे तक घटना के दंगा पीड़ित जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।
बेटे का भविष्य किया चौपट
पूर्व सभासद मोहर्रम अली उर्फ पप्पू ने अपने साथ बेटे का भविष्य भी चौपट कर दिया। बताया जाता है कि पप्पू के साथ गिरफ्तार हुए उसका बेटा दानिश बी-टेक में दाखिले की तैयारी कर रहा था, लेकिन अब वह दंगा करने के आरोप में पिता के साथ जेल में बंद है। संगीन धाराओं के चलते उसे अब जमानत मिलने में भी लंबा वक्त लग सकता है।
कर्फ्यू में आठ घंटे ढील के बाद लौटी रौनक
समय बीतने के साथ लोगों के दिलों से दंगे का खौफ भी खत्म हो रहा है। शुक्रवार को कर्फ्यू में आठ घंटे की ढील के दौरान शहर के सभी बाजारों में रौनक रही। लोग बेहिचक खरीददारी करने घरों से निकले। सरकारी दफ्तर और कचहरी भी खुली। सड़कों पर वाहन दौड़े। हालांकि कस्बों और गांवों से आने वालों की संख्या कम रही।
26 जुलाई सहारनपुर के अमन पसंद लोगों के लिए काला शनिवार साबित हुआ था, लेकिन अब लोग इस दिन को भुला देना चाहते हैं। दंगे के बाद प्रशासन माहौल के अनुकूल कर्फ्यू में ढील दे रहा है। शुरुआत में शहर को दो भागों में बांटकर चार-चार घंटे की कर्फ्यू छूट दी गई। सब ठीक-ठाक रहने पर बृहस्पतिवार को पूरे शहर में एक साथ छह घंटे की ढील देकर माहौल का आकलन किया गया। माहौल को देखते हुए प्रशासन ने शुक्रवार को कर्फ्यू में आठ घंटे की ढील दी।
सुबह दस बजते ही बाजार में चहल-पहल शुरू हो गई। सड़कों पर बसें, ट्रक, टेंपो और रिक्शा आदि दौड़ने लगे। लोगों की भीड़ देखकर लगा कि लोग कर्फ्यू खुलने का इंतजार कर रहे थे। सरकारी कर्मचारी दफ्तरों में पहुंचे और वकीलों ने कचहरी में आकर अपने चेंबरों में कामकाज किया। बाजार का नजारा देख नहीं लगा कि शहर में सात दिन पहले दंगा हुआ हो।
गलत मैसेज प्रसारित करने पर तीन को नोटिस
सोशल मीडिया और एसएमएस के जरिये शहर का माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन की ओर से पहली कार्रवाई की गई है। एक युवती समेत तीन लोगों को डीएम संध्या तिवारी की ओर से गलत मैसेज करने पर नोटिस जारी किये गये है। नोटिस में खंडन के साथ स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
बता दे कि सोशल मीडिया पर सहारनपुर दंगों को लेकर कई तरह के आपतिजनक और धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले पोस्ट, कमेंट, फोटो और वीडियो अपलोड किये जा रहे हैं। इसके अलावा एसएमएस के माध्यम से भी कई तरह से धार्मिक भावनाओं को भड़काने और गलत मैसेज प्रसारित किये जा रहे है। इसी को देखते हुए डीएम और एसएसपी के निर्देश पर टीम गठित की गई है जो ऐसे ही पोस्ट, कमेंट, फोटो, वीडियो और मैसेज पर निगरानी कर रही है।
टीम ने डीएम के नाम से गलत मैसेज प्रसारित करने वाले युवती समेत तीन के नंबर ट्रेस किये हैं। इनमें देहात कोतवाली के गांव रसूलपुर निवासी रवीश अहमद, कोतवाली नगर के मोहल्ला किला नवाबगंज निवासी रूबी सब्बरवाल, मटिया महल होजरी मार्केट के नफीसुर्रहमान शामिल हैं। तीनों ने डीएम संध्या तिवारी के नाम से कर्फ्यू में ढील वाला भ्रामक एसएमएस प्रसारित किया है। तीनों को जिम्मेदार मानते हुए शांति व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न करने का दोषी मानते हुए नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के मुताबिक वे एसएमएस के बारे में स्पष्टीकरण डीएम कार्यालय में जमा कराये। ऐसा न करने पर कार्रवाई की जाएगी।
'पुलिस प्रशासन की लापरवाही, सरकार की ढिलाई दोषी'
सहारनपुर दंगे के लिए गठित भाजपा की जांच कमेटी के सदस्य थानाभवन विधायक सुरेश राणा ने कहा कि सहारनपुर दौरे के बाद जो तथ्य सामने आए हैं उससे साफ है कि वहां हुआ दंगा पूर्व सुनियोजित है। इसके लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन की लापरवाही और सरकार ढिलाई को दोषी है। उन्होंने कहा कि मोहर्रम अली उर्फ पप्पू तो सिर्फ मोहरा है, इसके मास्टर माइंड कोई और हैं, पुलिस उसे गिरफ्तार करे।
विधायक सुरेश राणा ने बताया कि सहारनपुर का दौरा करने के बाद पता चला कि दंगे के दिन भीड़ सुबह चार बजे से ही जुटनी शुरू हो गई थी, करीब दस हजार लोग जमा हो चुके थे, पहली दुकान सुबह करीब आठ बजे फूंकी गई? सवाल उठता है कि आखिर चार घंटे तक पुलिस प्रशासन क्या करता रहा? 10 हजार लोगों की भीड़ होने के बावजूद भी पुलिस प्रशासन ने उन्हें वहां से हटाने को कोई कदम क्यों नहीं उठाया?
यह भी पता चला कि जिस केमिकल से दुकानें जलाई गईं वह केमिकल कश्मीर में लकड़ी के काम में आता है? जाहिर है कि इस घटना के तार कहीं से कहीं कश्मीर से जुड़े हुए हैं? इसमें कोई बाहरी प्रशिक्षित संगठन का भी हाथ संभव है। जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली कि दंगाईयों ने शुरूआत में ही फायर स्टेशन में आग लगाई, उन्होंने ऐसा इसलिए किया कि बाद में फायर ब्रिगेड भी आग बुझाने न पहुंच सके जिससे जाहिर है कि सब कुछ पहले से ही तय था। विधायक ने कहा कि दंगे में मुख्य आरोपी बनाया जा रहा है मोहरम उर्फ पप्पू तो सिर्फ एक मोहरा है इस घटना का मास्टर माइंड कोई ओर है, उस तक पहुंचने के लिए पुलिस पहले पप्पू के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाए। पता करें कि सुबह चार बजे से उसने किस-किस से बात की। उसके किससे संपर्क हुए। यदि इन बिंदुओं की इसकी गंभीरता से जांच हो तो कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
पार्टी ने साफ किया दंगाई से कोई संबंध नहीं
पीटीआई से बातचीत करते हुए प्रवक्ता ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री रोज कई लोगों से मिलते हैं। जैसा इस फोटो में भी आरोपी के साथ कई लोग दिखाई दे रहे हैं। इसलिए एक आधारहीन फोटो पर प्रतिक्रिया देना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं का संकेत नहीं है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के संग किसी प्रकार के संबंध को नकारते हुए प्रवक्ता ने जवाब दिया कि राज्य में कानून व्यवस्था कायम रखना हमारी प्राथमिकता है।