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सहारनपुर दंगा के मास्टरमाइंड का खुलासा

Fri, 01 Aug 2014 02:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Fri, 01 Aug 2014 02:22 PM IST
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mastermind of saharanpur riot is big rioter of west up

कर्फ्यू में ढील के दौरान अफवाहों की वजह से बृहस्पतिवार को शहर में भगदड़ से अफरातफरी मच गई। दंगे वाली जगह पर ही झगड़े की सूचना से पूरा बाजार बंद हो गया और अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात हो गए। सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला।

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इसके बाद प्रशासन की अपील के बावजूद बाजार में रौनक नहीं लौटी। नगरायुक्त के प्रयास से शांति मार्च निकालकर अमन की पहल की गई।

उधर, पुलिस ने दंगाइयों पर 87 रिपोर्ट दर्ज की हैं। 56 आरोपियों को गिरफ्तार और 48 पर निरोधात्मक कार्रवाई की गई है। पुलिस पूछताछ में दंगों के मास्टरमाइंड मोहर्रम अली उर्फ पप्पू ने भी सनसनीखेज खुलासे किए हैं।

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सोची-समझी साजिश के तहत करवाया दंगा

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पुलिस पूछताछ में मोहर्रम अली पप्पू ने विवादित जमीन के लिए ब्लैकमेलिंग की बात स्वीकार की है। मांग पूरी नहीं होने पर उसने सोची-समझी साजिश के तहत मस्जिद के शहीद होने की बात पर लोगों को जमा कराकर दंगा करवा दिया।

डीएम संध्या तिवारी ने बताया कि बाइक सवारों की चेकिंग के दौरान अफवाह फैली थी। कुछ शरारती बाइक सवारों ने ऐसा किया था, मगर माहौल शांतिपूर्ण रहा। एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि अब तक दंगाइयों से किसी तरह के कश्मीर आदि का कनेक्शन नहीं मिला है।

दंगे में आगजनी में उपयोग हुए केमिकल की सच्चाई के लिए उसे जांच के लिए आगरा लैब में भेजा गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी की जा रही है।

वेस्ट का सबसे बड़ा दंगाई है मोहर्रम

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शहर को दंगे की आग में झोंकने वाला कांग्रेसी नेता एवं पूर्व सभासद मोहर्रम अली उर्फ पप्पू वेस्ट यूपी का सबसे बड़ा दंगाई बन चुका है। पुलिस उसके खिलाफ अब तक 87 रिपोर्ट दर्ज कर चुकी हैं। दंगे में शामिल किसी भी आरोपी पर अब तक इतने मामले दर्ज नहीं हुए हैं।

गिरफ्तार किए गए उसके बेटे और भतीजे को भी पुलिस दंगे से जुड़े शहर के हर थाने में दर्ज होने वाले मामलों में आरोपी बना रही है। पुलिस का मानना है कि मुख्य आरोपी पूर्व सभासद मोहर्रम अली और उसके गुर्गों ने ही सहारनपुर में दंगा भड़काया और लूटपाट करवा कर शहर को नफरत की आग में झोंका।

ऐसे में शहर के सभी थानों में दर्ज होने वाली रिपोर्ट में इन तीनों को पुलिस मास्टरमाइंड के रूप में आरोपी बनाएगी। वह पहले सपा और बसपा से भी जुड़ा रहा है।

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पप्पू कनेक्शन कर रहा सियासी दलों को बेचैन

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दंगे का मास्टरमाइंड मोहर्रम अली उर्फ पप्पू राजनीतिक संरक्षण के लिए सियासी आकाओं की तलाश में रहता है। उसकी गिरफ्तारी के बाद सियासी गलियारे में भी हलचल मची है। पप्पू के राजनीतिक रिश्तों से सियासी दल बेचैन होने लगे हैं। कांग्रेस से पहले वह बसपा और सपा में रह चुका है। 1992 के दंगों के बाद मोहर्रम अली सपा का नगराध्यक्ष भी बना था। वह जिले के कई नेताओं के बेहद करीबी भी रहा।

दंगे के सूत्रधार मोहर्रम अली की पहचान 26 जुलाई से पहले तक केवल राजनीतिक नेताओं के गुर्गे के रूप में रही है। राजनीतिक सरंक्षण के लिए उसने कई बार आका भी बदले। लोकसभा चुनाव से पहले तक बसपा में रहे इस दंगारोपी ने कांग्रेस का दामन थामा था। हर पार्टी के नेताओं से इसके अच्छे संबंध रहे हैं और कई बार पप्पू ने अपने आकाओं के लिए काम भी किया है। यही कारण है कि अब गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक दलों में हलचल मची हुई है।

गिरफ्तारी के बाद मेडिकल कराने पहुंचे इस आरोपी के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उसने अपने आकाओं का नाम भी लिया था। इसके बाद अब राजनीतिक गलियारे में इस बात की चिंता है कि सलाखों के पीछे पहुंचा पप्पू कहीं उनके नाम से पर्दा न हटा दे। बता दें कि भीड़ जब थाने पहुंची थी तो पप्पू के बुलावे पर कई नेता वहां पहुंचे थे, मगर दंगा भड़कने के बाद वे दिखाई नहीं दिए थे। एसएसपी राजेश पांडेय का कहना है कि पप्पू से पूछताछ की जा रही है। उससे अन्य आरोपियों की शिनाख्त कराई जा रही है।

1964 में मंशा देवी के पक्ष में था न्यायालय का फैसला

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विवादित जमीन को लेकर हुए दंगे के बाद प्रशासन इस झगड़े को निपटाने में जुटा है। हालांकि प्रशासन इस बात को नहीं समझ पा रहा है कि आखिर इसे समाप्त कैसे किया जाए। इस विवाद को जिंदा रखकर ही मोहर्रम अली पप्पू ब्लैक मेलिंग करता था। अधिकारियों को यह सारी बातें पता लग चुकी हैं। जमीन पर पहली बार हुए विवाद में ही 1964 में मंशा देवी के पक्ष में फैसला आया था।

दरअसल, 1947 में यह जमीन हसन असकारी से मंशा देवी ने खरीदी। इसके बाद ही खलील अहमद ने मस्जिद का मुकदमा किया था, मगर 1964 में न्यायालय ने मंशा देवी के पक्ष में फैसला दे दिया था। इसके बाद कोई विवाद सामने नहीं आया और 2001 में गुरु सिंह सभा ने जमीन खरीदी। 10 साल तक काबिज रहने के बाद विकास प्राधिकरण में नक्शा आवेदन के बाद विवाद हुआ। इसमें पप्पू के भतीजे ने शिकायत की। इस बीच कई बार ब्लैकमेलिंग कर पैसा वसूला गया।

इस बीच फिर मामला न्यायालय पहुंचा। विवाद एक बार न्यायालय से और खारिज होने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने स्टे का आदेश दिया, मगर पुलिस ने उस पर कार्रवाई नहीं की। अधिकारियों ने फाइलें खंगालने के बाद विवाद को सुलझाने के रास्ते तलाश रहे हैं। अब तक उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।

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