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1993 धमाका: आज भी गिरफ्त से दूर है मास्टर माइंड

Tue, 12 Mar 2013 01:39 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 12 Mar 2013 01:39 PM IST
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master mind of 1993 bomb blast is still far away from police

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 20 साल पहले आज ही के दिन हुए सीरियल ब्लास्ट ने इस शहर को गहरा जख्म दिया था। 12 मार्च, 1993 के बम धमाकों को एक लंबा समय बीत चुका है, लेकिन उसके जख्म आज भी हरे हैं।

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लगातार हुए 12 बम धमाकों ने इस शहर की रफ्तार रोक दी। इन धमाकों में 257 लोग मारे गए थे और 713 लोग जख्मी हुए थे।

मुंबई पुलिस ने धमाकों के उस भयावह दिन का आगे बढ़कर सामना किया। अफसोस यह है कि धमाकों का मास्टर माइंड माना जाने वाला अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम आज भी आतंक की सरपरस्ती में महफूज है।
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और दाऊद इब्राहिम ने आतंकियों को मुंबई में हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराए थे। जबकि इस वारदात को सोने के स्मगलर टाइगर मेमन ने अंजाम दिया था।
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कैसे मिला था सुराग
मुंबई पुलिस के लिए इन धमाकों की जांच एक बहुत बड़ी चुनौती थी, लेकिन जांच एजेंसियों के साथ मिलकर पुलिस ने इस मामले की जांच को आगे बढ़ाया।

शुरुआत में पुलिस को मुंबई में इतनी बड़ी मात्रा में गोला बारूद पहुंचने का कोई सुराग नहीं मिला, लेकिन विस्फोटकों से भरे एक स्कूटर ने पुलिस को मामले की तह तक पहुंचाया।

पुलिस को जब इस स्कूटर की जानकारी मिली, तो सबसे पहले उसने विस्फोटकों को निष्क्रिय कराया। इसके बाद पुलिस को टाइगर मेमन के घर से एक चाभी मिली, जो इसी स्कूटर की थी और पुलिस के हाथ एक बड़ा सुराग लगा। यहां से जांच आगे बढ़ती चली गई।

बॉलीवुड स्टार संजय दत्त का नाम जुड़ा
पुलिस के हाथ सुराग लगते ही बड़ी संख्या में आरोपियों की धरपकड़ शुरू हो गई। इस दौरान एक चौंकाने वाला नाम सामने आया। पुलिस को जांच में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के घर से एक एके-47 बंदूक मिली। पुलिस ने संजय दत्त को टाडा के तहत गिरफ्तार कर लिया।

14 साल चला मुकदमा
इस मामले में 4 नवंबर 1993 को शुरू हुआ मुकदमा करीब 14 साल तक चला। मुकदमे में 100 आरोपियों को सजा हुई, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इन बम धमाकों में करीब 257 लोग मारे गए थे, जबकि 713 लोग जख्मी हुए थे।


पिछले 20 सालों में मुंबई में बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन मुंबईवासी आज भी उन बम धमाकों को याद कर दहल जाते हैं। शायद इसलिए, क्योंकि इन धमाकों का मुख्य सरगना अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर है।

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