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संसद में गरमाया मसर्रत मुद्दा, हंगामा

Tue, 10 Mar 2015 03:58 PM IST
Updated Tue, 10 Mar 2015 03:58 PM IST
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Mashrat alam issue again raise in parliament.

कश्मीर में अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई के मुद्दे पर एक नए खुलासे के बाद इस पर विवाद गहराता जा रहा है।

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आ रही खबरों के मुताबिक मसर्रत की रिहाई पर फैसला मुफ्ती सरकार में नहीं बल्कि उससे पहले राष्ट्रपति शासन के दौरान लिया गया था। ये प्रक्रिया फरवरी में ही शुरू हो गई थी। इस मामले पर जम्मू-कश्मीर गृह मंत्रालय की ओर से चिट्ठी भी लिखी गई थी।

अब इस नए खुलासे के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर गृह मंत्रालय से चिट्ठी पर सफाई मांगी है। ये चिट्ठी जम्मू कश्मीर गृह मंत्रालय ने 4 फरवरी को लिखी थी। वहीं ये पूरा विवाद एक बार फिर संसद में उठा।
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एक दिन पहले लोकसभा में मसर्रत मुद्दे पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की सफाई के बाद नए खुलासे के बाद एक मंगलवार को राज्यसभा में लगातार दूसरे दिन भी हंगामा हुआ।
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विपक्ष ने पूरे मामले पर सरकार से जवाब मांगा है। विपक्ष ने पूछा, "क्या मुफ्ती सरकार बनने से पहले ही तय हो गई थी मसर्रत की रिहाई।"

जनता परिवार में पड़ी फूट!

Mashrat alam issue again raise in parliament.

विवाद बढ़ने पर वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि केंद्र ने इस मामले पर जम्मू कश्मीर सरकार से सफाई मांगी है। बता दें कि मसर्रत की रिहाई को लेकर एक दिन पहले भी संसद में जमकर हंगामा हुआ था।

वहीं आपको बता दें कि राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल के एक बयान को लेकर जनता परिवार में फूट पड़ गई।

हुआ यूं कि नरेश अग्रवाल ने मसर्रत मुद्दे पर बोलते हुए 1989 में रूबिया के अपहरण को लेकर तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस अपहरण कांड में मुफ्ती मोहम्मद सईद का भी हाथ था।

उनके इस बयान पर जेडीयू के सांसद केसी त्यागी ने विरोध जताया। उनके मुताबिक, "नरेश अग्रवाल को ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए थी।" केसी त्यागी ने इसे असंसदीय करार देते हुए इस बयान को वापस लेने की भी मांग की। इसका समर्थन जनता दल यूनाईटेड का राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने भी किया। हालांकि नरेश अग्रवाल ने बाद में अपने बयान को लेकर सदन में सफाई दी।

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