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केमिस्ट्री के लिए इन्हें मिला नोबेल पुरस्कार
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 09 Oct 2013 06:54 PM IST
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रॉयल स्वीडिश अकादमी ने मेडिसिन, फिजिक्स के बाद केमिस्ट्री के लिए भी नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी है।
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इस साल केमिस्ट्री में नोबेल पुरस्कार मार्टिन करप्लस, माइकल लेविट और ए. वार्शल को संयुक्त रूप से दिया जाएगा। इन तीनों वैज्ञानिकों को 'मल्टीस्केल मॉडल्स फॉर काम्पलेक्स केमिकल सिस्टम्स' के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा।
मार्टिन करप्लस अमेरिकी-ऑस्ट्रियन और ए. वार्शल अमेरिकी-इजरायली नागरिक हैं। वहीं माइकल हेविट ब्रिटिश-इजरायली नागरिक हैं और स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।
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इन वैज्ञानिकों को भौतिकी का नोबेल
इससे पहले मंगलवार को ब्रह्मांड का सबसे छोटा कण खोजने वाले दो वैज्ञानिकों को भौतिक शास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया।
इस कण (गॉड पार्टिकल) की खोज पिछले साल हुई। ब्रिटेन के 84 वर्षीय वैज्ञानिक पीटर हिग्स और बेल्जियम के फ्रंकोइस इंग्लर्ट को संयुक्त रूप से वर्ष 2013 का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा।
हिग्स ने वर्ष 1964 में ही अति सूक्ष्म कण हिग्स-बोसॉन के अस्तित्व की भविष्यवाणी कर दी थी। नोबेल पुरस्कार समिति ने कहा कि इस भविष्यवाणी के बाद यह बताना संभव हुआ कि पदार्थ में द्रव्यमान क्यों होता है।
दोनों वैज्ञानिकों को 80 लाख स्वीडिश क्राउन (करीब 12 लाख डॉलर) की इनामी राशि दी जाएगी।
पिछले साल दुनिया के सबसे बड़े प्रयोग के बाद स्विट्जरलैंड की सर्न प्रयोगशाला में इस सूक्ष्म कण के मौजूद होने का ऐलान किया गया था। इसके बाद ही इन दोनों को नोबेल पुरस्कार का दावेदार समझा जाने लगा था।
पुरस्कार की घोषणा करते हुए रॉयल स्वीडिश अकादमी ने एक बयान में कहा कि यह सिद्धांत पार्टिकल फिजिक्स के मानक का केंद्रीय हिस्सा है, जो बताता है कि हमारे ब्रह्मांड का निर्माण कैसे हुआ।
हिग्स कण का सिद्धांत 1964 में पीटर हिग्स ने अपनी टीम के पांच सदस्यों के साथ दिया था।
भौतिकी का पहला नोबेल पुरस्कार 1901 में एक्सरे की खोज करने वाले जर्मनी के विल्हेम रोंगटन को दिया गया था।
'जीवन में इस दिन की उम्मीद न थी'
वर्ष 1964 में प्रोफेसर हिग्स ने कहा था कि एक दिन विज्ञान हिग्स कणों तक पहुंच जाएगा। हालांकि उन्होंने निराशा भरे शब्दों में कहा था कि मुझे अपने जीवन में ऐसा होने की उम्मीद नहीं है। मैं परिवार वालों से कहूंगा कि वह फ्रिज में कुछ शैंपेन रख दें।
एक न एक दिन विज्ञान यहां तक पहुंच ही जाएगा। तब फ्रिज वाली शैंपेन निकालकर जश्न मनाया जाएगा। अच्छी बात यह है कि हिग्स के जीते जी इस कण के अस्तित्व का न सिर्फ पता चला बल्कि उन्हें नोबेल पुरस्कार भी दिया जा रहा है।
भारतीय कनेक्शन
बोसॉन कणों का सिद्धांत भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस ने खोजा था। बोस के नाम पर ही इन कणों को बोसॉन कहा जाता है।
ईश्वर का कण यानी गॉड पार्टिकल
वैज्ञानिक भाषा में गॉड पार्टिकल को हिग्स बोसॉन का नाम दिया गया है। गॉड पार्टिकल ही वह पदार्थ है जिसके कारण ब्रह्मांड का निर्माण हुआ। यह परमाणु से भी छोटा कण है। आकाशगंगा, चांद, तारे, पेड़-पौधे और जीव-जन्तुओं की उत्पत्ति इसी से हुई।
पिछले साल हुई खोज की घोषणा
ब्रह्मांड की उत्पत्ति को समझने के लिए जेनेवा में जमीन से सौ मीटर नीचे 27 किमी लंबी सुरंग में लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर प्रयोग किया गया था। पांच जुलाई 2012 को वैज्ञानिकों ने एक नए कण की खोज का ऐलान किया, जो हिग्स बोसॉन या गॉड पार्टिकल जैसा ही है। वैज्ञानिक 50 वर्षों से इस कण की खोज में जुटे थे।