फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   China Not Jealous of ISRO Mars Mission MOM success - ISRO Mars Orbiter

मंगल मिशन की सफलता से चीन को जलन नहीं!

Fri, 26 Sep 2014 01:09 PM IST
Updated Fri, 26 Sep 2014 01:09 PM IST
विज्ञापन
China Not Jealous of ISRO Mars Mission MOM success - ISRO Mars Orbiter

भारत के महत्वाकांक्षी मंगल मिशन की सफलता से चीन को कोई ईर्ष्या नहीं है। उल्टे वह अपने पड़ोसी देश की इस कामयाबी से काफी खुश है। जिसकी कई वजहें हैं।

विज्ञापन


चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने बृहस्पतिवार को ‘भारत की मंगल की सफलता से अंतरिक्ष अनुसंधान को बढ़ावा’ शीर्षक वाले अपने संपादकीय में कहा है, ‘मंगलयान के मंगल की कक्षा में प्रवेश करने पर चीन को कोई ईर्ष्या नहीं होगी।
विज्ञापन


चीनी लोग मानते हैं कि भारत ने जो हासिल किया है, उनके पास उससे अधिक उन्नत तकनीक व आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध है, जिस पर गर्व किया जा सकता है।

भारत की कई साइटों पर चल रहा था कि भारत की मंगल मिशन की कामयाबी से चीन के घावों पर नमक छिड़कने जैसा ही है।

संपादकीय में कहा गया है कि भारत की जनता मंगल अभियान में चीन से आगे निकलकर काफी खुश हो रही है। चीन का पहला मंगल मिशन यिन्झाउ-1 2011 में छोडे़ जाने के बाद सालभर तक लापता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


अखबार ने कहा, ‘चीन की जनता के पास ऐसे कई कारण हैं जिनको लेकर वह मंगल मिशन की सफलता पर भारत की जनता के साथ खुशी महसूस करे।’

'मंगलयान से बढ़ा एशिया का गौरव'

China Not Jealous of ISRO Mars Mission MOM success - ISRO Mars Orbiter

मंगलयान मिशन की सफलता के कुछ देर बाद ही चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने इस उपलब्धि को एशिया का गौरव बताया। चीन के मीडिया में भारतीय मंगलयान की सफलता को प्रमुखता से जगह मिली है।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने अपनी एक रिपोर्ट कहा है, ‘भारतीय मिशन पर कुल 4.5 अरब रुपये की लागत आई है जो किसी हॉलीवुड फिल्म के निर्माण की लागत से कम है।'

‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भारत के मंगल मिशन की सफलता पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘अगर वैज्ञानिक शोध में तुलनात्मक रूप से पिछड़ा देश मंगल के अन्वेषण के लिए यान भेजने में सफल हो जाता है तो इसकी पूरी संभावना है कि यिन्झाउ-दो भविष्य में सफल हो।’

अखबार ने कहा कि कोई देश हर क्षेत्र में अगुवा होने का दावा नहीं कर सकता। भारत ने इस बिंदु पर चीन से स्पर्धा की है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed