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विवाहित पुत्री की हो सकेगी मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति

Fri, 04 Dec 2015 10:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Fri, 04 Dec 2015 10:16 PM IST
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married daughter will get too Deceased  dependent quota's recruitment

मृतक आश्रित कोटे के तहत विवाहित पुत्रियों को भी नौकरी मिल सकेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश मृतक आश्रित सेवा नियमावली के नियम 2.(सी).(3) को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है।कोर्ट ने कहा है कि मृतक आश्रित कोटे के तहत पुत्री को शादीशुदा होने के आधार पर नियुक्ति देने से इंकार नहीं किया जा सकता।

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विवाहित पुत्र नौकरी पा सकता है तो विवाहित पुत्री को नौकरी देने से इंकार करने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसके साथ ही कोर्ट ने आजमगढ़ के जिलाधिकारी द्वारा राजस्व विभाग में कार्यरत पिता की सेवाकाल में मौत के बाद विवाहित पुत्री को नियुक्ति देने से इंकार करने का आदेश रद्द कर दिया है और नियमानुसार याची की नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया है।
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यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने विमला श्रीवास्तव की याचिका पर दिया है। याची के पति की राजस्व विभाग में सेवाकाल के दौरान मौत हो गई थी। याची की पुत्री विवाहित है, जिसने अपने पिता के आश्रित के रूप में नियुक्ति की मांग की थी।
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वैधानिकता पर उठाए गए थे सवाल

married daughter will get too Deceased  dependent quota's recruitment

सेवा नियमावली में पुत्र एवं अविवाहित पुत्री और विधवा को नौकरी देने का नियम है। कोर्ट ने अविवाहित शब्द को अनुच्छेद 14 एवं 15 के विपरीत माना और कहा कि विवाहित पुत्री को नियुक्ति न देना लिंग भेद करना है, जिसे संविधान में प्रतिबंधित किया गया है।

बता दें कि आजमगढ़ की विमला श्रीवास्तव की ओर दाखिल याचिका में प्रदेश सरकार की अनुकंपा नियुक्ति नियमावली की धारा 2.(सी).(3) की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए थे। याची के वकील संतोष श्रीवास्तव की दलील थी इस धारा में दी गई कुटुंब की परिभाषा में पुत्र, दत्तक पुत्र और अविवाहित पुत्री को शामिल किया गया है। आपत्ति ‘अविवाहित’ शब्द है।

किसी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति के आधार पर नियुक्ति देने में भेदभाव करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 का उल्लंघन है। यह अनुच्छेद अवसर की समानता का अधिकार प्रदान करते हैं। इसी प्रकार से मात्र पुत्री होने के आधार पर विवाहित और अविवाहित होने का भेदभाव करना भी गैर संवैधानिक है। क्योंकि यह लिंग के आधार पर भेदभाव करता है जबकि पुत्र के साथ ऐसी शर्त नहीं जोड़ी गई है।

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