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पति की पैतृक संपत्ति से भी मिलेगा महिला को हक
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2013 12:13 AM IST
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अगर आप अपनी पत्नी को तलाक देने की सोच रहे हैं तो होशियार हो जाइए। इसके एवज में अब आपको अपनी खुद की अर्जित संपत्ति ही नहीं बल्कि पैतृक संपत्ति से भी पत्नी को पर्याप्त हिस्सा देना होगा।
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तलाक के मामले में दोनों पक्षों में सहमति न होने के बावजूद जज अपने विवेक के आधार पर जल्द फैसला कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट ने विवाह कानून में संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। कैबिनेट ने इस मसले पर गठित मंत्रिमंडलीय समूह (जीओएम) की सभी सिफारिशों पर मुहर लगा दी है।
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सरकार ने विवाह कानूनों को महिलाओं के प्रति और ज्यादा संवेदनशील बनाने और तलाक की राह में बेवजह की अड़चनों को दूर करने के लिए इस आशय का फैसला किया है।
विवाह कानूनों में नए प्रावधानों पर कैबिनेट में आमराय न बनने के बाद प्रधानमंत्री ने इस मामले पर रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता में जीओएम का गठन किया था।
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बुधवार को जीओएम की सिफारिशों पर लगभग आधा घंटे की माथापच्ची के बाद कैबिनेट ने इन सिफारिशों पर सहमति की मुहर लगा दी।
नए प्रावधानों के मुताबिक तलाक के बाद अब महिलाओं को इस आधार पर पति की पैतृक संपत्ति में भी हिस्सा मिलेगा कि तलाक के बाद महिला की आर्थिक स्थिति सुधरने की गुंजाइश नहीं है।
अगर पति की पैतृक संपत्ति के कई हिस्सेदार हैं तो तलाक के मामले की सुनवाई कर रही अदालत पूरी संपत्ति में पति के हिस्से का आकलन करेगी।
इसके आधार पर महिला को पर्याप्त मुआवजा राशि की व्यवस्था कराई जाएगी। पहले की तरह ही महिला के पास इसके अलावा पति के द्वारा अर्जित संपत्ति से भी हिस्सा पाने का अधिकार रहेगा।
स्वीकृत प्रावधानों में तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने का भी प्रयास किया गया है। मसलन अगर तलाक के लिए पति-पत्नी में से किसी एक ने परस्पर सहमति से तलाक का संयुक्त आवेदन नहीं दिया है, तब भी जज अपने विवेक से तलाक मंजूर करने का फैसला सुना सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि पहले संयुक्त आवेदन नहीं दिए जाने के कारण तलाक की प्रक्रिया बेहद लंबी खिंचती थी। सूत्रों के मुताबिक जीओएम ने इस स्थिति में भी जजों को महिलाओं के पक्ष पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की है।
मालूम हो कि विवाह कानूनों के प्रावधानों में बदलाव पर इसी साल एक मई को हुई कैबिनेट की बैठक में मतभेद सामने आ गए थे।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने एंटनी की अध्यक्षता में जीओएम गठित कर इस बारे में कैबिनेट को सुझाव देने का जिम्मा दिया था।
क्या हैं नए प्रावधान
महिलाओं को पति की पैतृक संपत्ति में भी इस आधार पर हिस्सा मिलेगा कि तलाक के बाद महिला की आर्थिक स्थिति सुधरने की गुंजाइश नहीं है।
अगर पति की पैतृक संपत्ति के कई हिस्सेदार हैं तो अदालत पूरी संपत्ति में पति के हिस्से का आकलन कर मुआवजा तय कर सकती है
महिला के पास पति के द्वारा खुद अर्जित की गई संपत्ति से भी हिस्सा पाने का अधिकार रहेगा
तलाक की प्रक्रिया होगी सरल
अगर तलाक के लिए पति-पत्नी में से किसी एक ने परस्पर सहमति से संयुक्त आवेदन नहीं दिया है, तब भी जज अपने विवेक से तलाक मंजूर करने का फैसला सुना सकते हैं।
विवाह कानून (संशोधन) विधेयक, 2010
हिंदू विवाह अधिनियम 1955 एवं विशेष विवाह अधिनियम 1954 में तलाक के प्रावधान तय किए गए हैं। इस अधिनियम के तहत मुख्य रूप से शादी बचाने पर बल दिया गया है जिससे तलाक का समय लंबा खिंच जाता है।
तलाक में लगने वाले इसी लंबे समय को कम करने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और विशेष विवाह अधिनियम 1954 में संशोधन के लिए विवाह कानून (संशोधन) विधेयक, 2010 लाया गया जिसमें शादी के टूटने के आधार पर जल्द से जल्द तलाक का प्रावधान है।
प्रस्तावित संशोधन
हिंदू विवाह अधिनियम 1955 एवं विशेष विवाह अधिनियम 1954 में तलाक के मानक तय किये गए हैं जिसका मुख्यत: दो आधार हैं, पहला अगर कि पति-पत्नी दोनों पक्षों की सहमति हो और दूसरा कि दोनों कम से कम 3 साल से अलग रह रहे हों।
विवाह कानून (संशोधन) विधेयक, 2010 इस एक्ट में संशोधन कर महिलाओं को विवाह नहीं निभा पाने की स्थिति में शादी के अप्रतिकार टूटने के आधार पर बिना देरी तलाक के लिये कोर्ट में अपील करने का अधिकार देता है।