काटजू के खुलासे से उठा सियासी तूफान
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मार्कण्डेय काटजू ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।
काटजू ने पूर्व की यूपीए सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने निजी फायदे के लिए एक भ्रष्टाचार के मामले लिप्त जज को प्रमोशन दिया। काटजू ने ये आरोप भी लगाया कि यूपीए सरकार ने अपनी सरकार बचाने के लिए ऐसा किया था।
तमिलनाडु के एक जज पर आरोप
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपे मार्कण्डेय काटजू के लेख के मुताबिक भ्रष्टाचार के कई मामलों के आरोप के बाद भी जज को सिर्फ इसलिए प्रमोशन दिया गया क्योंकि इस मामले में केंद्र सरकार का सीधे तौर पर दवाब था।
यूपीए के घटक दल के एक बड़े नेता को जमानत देने की एवज में उसे सीधे मद्रास हाईकोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त कर दिया गया। काटजू के मुताबिक अपने सेवाकाल के दौरान उस पर भ्रष्टाचार के कई आरोप थे।
काटजू ने अपने लेख में ये भी बताया कि इस दौरान अलग अलग पोर्टफोलियो वाले जजों ने उसके खिलाफ कई कड़ी टिप्पणियां की थीं। लेकिन मद्रास हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस ने अपनी ताकत के बल पर सारी टिप्पणियों को हटा दिया।
मद्रास हाईकोर्ट में एडिशनल जज पर आरोप
काटजू ने बताया कि यह मामला सिर्फ यही तक नहीं चला बल्कि उस जज को मद्रास हाईकोर्ट में एडिशनल जज के तौर पर नियुक्त किया गया। यह जज तब तक वहीं नियुक्त रहे जब नवंबर 2004 में काटजू मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर वहां आए।
काटजू ने अपने लेख में कहा कि उस जज को कई महत्वपूर्ण नेताओं का समर्थन प्राप्त था क्योंकि उसने एक बड़े नेता को किसी मामले में जमानत दी थी।
आईबी ने पाया आरोपों को सही
काटजू ने अपने लेख में बताया कि जब वह मद्रास हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के तौर पर आए तो उन्होंने इस जज के खिलाफ तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया आरसी लाहोटी से शिकायत की और आईबी से इस मामले में जांच कराने की बात कही।
इसके बाद चीफ जस्टिस के सेक्रेट्री ने एक दिन काटजू को फोन करके बताया कि जस्टिस लाहोटी आपसे बात करना चाहते हैं। फोन पर चीफ जस्टिस ने काटजू को बताया कि जो आरोप उन्होंने लगाए थे वह आईबी की जांच सच निकले हैं।
आरोपों को बाद भी मिली नियुक्ती
एडिशनल जज के तौर पर उस जज का दो साल का कार्यकाल खत्म होने वाला था। काटजू ने बताया कि उन्हें लगा कि आईबी रिपोर्ट के आधार पर अब हाई कोर्ट के जज के तौर पर काम करने पर रोक लगा दी जाएगी।
लेकिन इसके उलट उस जज को एडिशनल जज के तौर पर एक और साल की नियुक्ति मिल गई। जबकि इस जज के साथ नियुक्त किए गए छह और एडिशनल जजों को स्थाई कर दिया गया था।
कांग्रेस ने किया पलटवार
इसके अलावा शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने भी कहा कि इतने पुराने मसले पर सवाल उठाने का अब कोई मतलब नहीं है। काटजू को अपने पद पर रहते हुए यह आवाज उठानी चाहिए थी।
कांग्रेस बैकफुट पर संसद में हंगामा
काटजू के इस खुलासे पर सोमवार को संसद में खूब हंगामा हुआ। एआईएडीएमके सदस्यों ने संसद में जमकर हंगामा किया। एआईडीएमके के सदस्यों ने कहा कि कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जस्टिस मर्कंडेय काटजू के आरोपों पर अपना पक्षा रखना चाहिए।
सभापति हामिद अंसारी ने सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन एआईएडीएमके सदस्य अपनी बात पर जोर देने लगे। कुछ सदस्यों ने अखबार की प्रतियां दिखाईं।
सभापति ने उनसे ऐसा न करने के लिए कहा। कांग्रेस के राजीव शुक्ला और डीएमके की कनिमोझी कुछ कहते देखे गए लेकिन हंगामे के कारण उनकी बात सुनाई नहीं दीं।
मनमोहन सिंह से मांगा जवाब
सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई तो वही नजारा था। सभापति ने उनसे कहा कि अगर वे कोई मुद्दा उठाना चाहते हैं, तो समुचित तरीके से उठाएं, सदन की कार्यवाही बाधित न करें।
उन्होंने सदन में एआईएडीएमके के नेता डॉ वी मैत्रेयन से कहा, 'आप जो कहना चाहते थे, वह कह चुके हैं. अब आप प्रश्नकाल चलने दें।'
मैत्रेयन जानना चाहते थे कि क्या पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जानकारी थी और क्या तत्कालीन यूपीए की सहयोगी डीएमके ने जज के प्रमोशन के लिए सरकार पर दबाव डाला था। हंगामे के दौरान मनमोहन सिंह सदन में मौजूद थे।
'जो उन्होंने कहा वो सच है'
संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि सदस्य अभी प्रश्नकाल चलने दें और शून्यकाल में अपना मुद्दा उठाएं। इससे पूर्व संसदीय कार्य राज्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सभापति से कहा कि आसन सदस्यों को उनकी बात कहने के लिए थोड़ा समय दे सकता है और उसके बाद प्रश्नकाल चलने दिया जाए, लेकिन एआईएडीएमके सदस्य नहीं माने।
सीपीआई नेता डी राजा ने कहा कि कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस मामले में सफाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में कुछ कमी है। यह हर किसी को मंजूर नहीं है। वक्त आ चुका है जब न्यायिक जवाबदेही तय करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर न्यायिक आयोग बने।
बीएसपी सुप्रीमो मायवाती ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से राजनीति और न्यायपालिका को अलग-अलग रखने के पक्ष में रही है।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिकवक्ता राम जेठमलानी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश मार्कंटेय काटजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जो भी उन्होंने कहा है वह सच है, पर मुझे उम्मीद थी कि वह सहीं समय पर बोलेंगे।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस तरह के मुद्दों की चर्चा संसद में नहीं की जा सकती है।