फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   markandey Katjus comment on gandhi condemned in parliament

गांधी पर काटजू के बयान की संसद में निंदा

Wed, 11 Mar 2015 02:02 PM IST
Updated Wed, 11 Mar 2015 02:02 PM IST
विज्ञापन
markandey Katjus comment on gandhi condemned in parliament

जस्टिस मारकंडेय काटजू के खिलाफ राज्यसभा में निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्होंने मंगलवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद बोस को विदेशी एजेंट कहा था।

विज्ञापन


काटजू के बयानों की निंदा के लिए राज्यसभा में लाए प्रस्ताव को सभापति हामिद अंसारी ने पढ़ा। सभी दलों ने ध्वनिमत से प्रस्ताव को परित किया। कई सदस्यों ने काटजू के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की।
विज्ञापन


उल्लेखनीय है कि मंगलवार को लिखे ब्लॉग में जस्टिस काटजू ने महात्मा गांधी को ब्रिटिश एजेंट कहा था। उन्होंने मंगलवार को ही लिखे एक अन्य ब्लॉग में नेताजी सुभाष चंद बोस को जापान का एजेंट कहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


काटजू इससे पहले भी कई ऐसे बयान दे चुके हैं, जिससे उन्हें विवादों का सामना करना पड़ा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने कहा था कि भाजपा को किरण बेदी के बजाय शाजिया इल्मी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वह किरण से अधिक खूबसूरत है। काटजू के उस बयान को 'सेक्सिस्ट' माना गया और उन्हें कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा।

पढ़िए, क्या लिखा था काटजू ने

markandey Katjus comment on gandhi condemned in parliament

मंगलवार को ‘गांधी- ए ब्रिटिश एजेंट’ शीर्षक से लिखे ब्लॉग में काटजू ने लिखा कि गांधी अंग्रेजों की नीति पर काम करते थे, जिसके चलते भारत को काफी नुकसान पहुंचा। काटजू ने अपने ब्लॉग में इसकी कई वजह भी गिनाई हैं।

उन्होंने लिखा है कि गांधी अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर काम करते थे। अगर हम गांधी के भाषणों और लेखों को पढ़े (यंग इंडिया और हरिजन में) तो हम पाते हैं कि 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत आने के बाद और 1948 में निधन तक उनके हर भाषण और लेखों में उनका जोर हिंदू धार्मिक विचारों की ओर था। वह रामराज्य, गोरक्षा, ब्रह्मचर्य, वर्णाश्रम धर्म आदि का जिक्र करते थे। गांधी ने 10 जून 1921 को यंग इंडिया में लिखा कि ‘मैं सनातनी हिंदू हूं। मैं वर्णाश्रम धर्म में विश्वास करता हूं। मैं गोरक्षा का भी समर्थक हूं।’  

काटजू के अनुसार, उनकी जनसभाओं में ‘रघुपति राघव राजा राम’ जैसे हिंदू भजन जोर से गाए जाते थे। आज भारतीय धार्मिक हैं लेकिन 20वीं शताब्दी के पहले पांच दशकों में लोग इससे कही ज्यादा धार्मिक थे। साधु या स्वामीजी अपने आश्रम में अनुयायियों को इस तरह का प्रवचन दे सकते हैं लेकिन जब लोगों को दिन-रात एक राजनेता इस तरह का प्रवचन दे तो ऐसे भाषणों और लेखों का रूढ़िवादी मुस्लिमों के मस्तिष्क पर कैसा असर होगा? इसी वजह से मुसलमान मुस्लिम लीग या इस जैसे संगठनों की ओर चले गए। क्या यह ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति नहीं थी? क्या कई दशकों तक राजनीति में निरंतर धर्म का जिक्र कर गांधी ब्रिटिश एजेंट की तरह काम नहीं कर रहे थे?

काटजू ने अपने ब्लॉग में कई और मुद्दों को लेकर गांधीजी पर सवाल उठाए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed