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राहुल ने दी शुभकामना, मिले कैसे-कैसे जवाब

Thu, 01 Jan 2015 04:26 PM IST
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, दिल्ली
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 01 Jan 2015 04:26 PM IST
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Many challenges for Congress In the new year.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शायद पहली बार सोशल मीडिया पर बाकायदा अपना वीडियो अपलोड कर देशवासियों को नए साल की शुभकामना दी। मगर सोशल मीडिया पर तुरंत यह कहते हुए उन्हें शुभकामना दी जाने लगी कि अभी इसकी सबसे ज्यादा जरूरत उन्हें और उनकी पार्टी को है।

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नए साल 2015 में कांग्रेस को दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव की चुनौती का सामना करना है। दोनों ही राज्यों में पार्टी का अस्तित्व संकट में है। साथ ही पार्टी संगठन में भी फेरबदल करना एक बड़ी चुनौती है।
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हालिया चुनावों में लगातार हार के बाद कांग्रेस हाईकमान दबाव में है। उस पर फैसले नहीं लेने के आरोप लग रहे हैं। मौजूदा लोकसभा में पार्टी के केवल 44 सांसद हैं।
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नए साल में राज्यसभा में भी पार्टी का बहुमत खतरे में पड़ सकता है। भाजपा लगातार राज्यों में चुनाव जीत रही है। इसे देखते हुए सदन में भाजपा की संख्या बढ़ना तय है।

राहुल गांधी को बनानी होगी नई टीम

Many challenges for Congress In the new year.

कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी का कहना है कि अच्छा बुरा वक्त सबके साथ आता है। हमने पिछले दस साल देश में राज किया। अब पार्टी को संघर्ष करने की जरूरत है और वह करेगी। पार्टी एक बार फिर मजबूत होकर उभरेगी।

हाल में संसद के शीत सत्र में कांग्रेस ने राज्यसभा में हंगामा कर मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों के एजेंडे को रोक दिया। मगर केंद्र सरकार ने अध्यादेशों का दांव खेलकर पार्टी को असहज कर दिया।

फरवरी में दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने है। पिछले साल तक यहां सत्ता में रहने वाली कांग्रेस मुकाबले से बाहर है। असल मुकाबला भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच है। कांग्रेस को चंद सीटें जीतने का अनुमान राजनीतिक पंडित लगा रहे हैं।

2015 में दिल्ली, बिहार विधानसभा के चुनाव

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बिहार में भी 2015 में चुनाव होने हैं। बिहार में कांग्रेस लालू यादव और नीतिश कुमार की पार्टियों के पीछे खड़ी होकर भाजपा का सामना करने की स्थिति में है। वहां भी पार्टी कहीं मुकाबले में नहीं है।

साथ ही नए साल में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के सामने पार्टी संगठन में फेरबदल करने का दबाव है। पार्टी की नई टीम बनाने में पार्टी हाईकमान को मुश्किल हो रही है।

चुनावी हार के लिए जिम्मेदार कई बड़े नेता संगठन में बड़े पदों पर काबिज हैं। मगर कमजोर पड़ा हाईकमान उनको हटाने की स्थिति में नहीं है। लगातार चुनावी हार के चलते खुद कांग्रेस हाईकमान कठघरे में है। ऐसे में राहुल के लिए कुछ बुजुर्ग नेताओं को हटाना इतना आसान नहीं होगा।

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