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एनकाउंटर या हत्या, पढ़िए प्रियंका का सनसनीखेज खुलासा

Thu, 21 May 2015 01:00 PM IST
Updated Thu, 21 May 2015 01:00 PM IST
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manoj vashisth wife raise question at encounter

मनोज वशिष्ठ एनकाउंटर के मामले में दिल्ली पुलिस पर एक और सवाल खड़ा हो गया है। परिजनों की याचिका पर दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में जवाब दिया कि मनोज के खिलाफ क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल में कोई मुकदमा ही दर्ज नहीं है। तो फिर पुलिस ने रेस्टोरेंट में क्यों और किसके कहने के दबिश दी।

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मनोज वशिष्ठ की पत्नी और जिला पंचायत सदस्य प्रियंका वशिष्ठ ने बताया 29 अप्रैल को एयरपोर्ट से लौटते समय उनके पति मनोज का दो बाइक और एक जीप ने दिल्ली के धौला कुआं चौक से पीछा किया गया था। नोएडा की परी चौक पर बाइक सवार दो लोगों ने उन पर पिस्टल तान दी थी। पूछने पर उन्होंने खुद को स्पेशल सैल से बताते हुए कहा था। उनके खिलाफ सैल में कई मुकदमे दर्ज हैं। इसकी उनके एक अधिकारी को जानकारी है। इसके लिए दो-तीन लाख रुपये का इंतजाम कर लेना। मामला निपट जाएगा।
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रुपये मांगने पर मनोज ने उन्हें उस समय 60 हजार रुपये दे दिए थे। इसके बाद भी वे लगातार दबाव बना रहे थे। उन्होंने मुकदमों का पता लगाने के लिए दिल्ली की पटियाला हाउस की सेशन कोर्ट में प्रार्थना पत्र डाला था। छह मई को स्पेशल सेल ने कोर्ट में जवाब दिया था कि मनोज के खिलाफ न कोई मुकदमा दर्ज है और न ही कोई शिकायती पत्र। इसी तरह उन्होंने कोर्ट के माध्यम से क्राइम ब्रांच से मुकदमों के बारे में पूछा। बुधवार को उन्होंने कोर्ट में जवाब दिया। वहां भी उनके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं मिला।
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प्रियंका वशिष्ठ ने कहा जब उनके पति के खिलाफ दिल्ली में कोई मुकदमा दर्ज ही नहीं है तो दिल्ली पुलिस की स्पेशल सैल ने रेस्टोरेंट में दबिश क्यों और किसने कहने पर दी। क्या उनके पास मनोज के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट था। किसने आदेश पर मनोज का एनकाउंटर किया। प्रियंका वशिष्ठ का कहना है दिल्ली पुलिस वाले उनके पति से अवैध वसूली करते थे। विरोध करने पर उन्होंने उनके पति को एनकाउंटर करने की धमकी दी थी। पुलिस ने कई लोगों पर उनके पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का भी दबाव बनाया था।

'जब परिजन पहुंचे तो जिंदा था मनोज'

manoj vashisth wife raise question at encounter

दिल्ली में मनोज वशिष्ठ का एनकाउंटर का दावा करने वाली पुलिस ने बाद में भी बेरहमी दिखाई। मनोज वशिष्ठ की पत्नी प्रियंका वशिष्ठ का कहना है कि उन्हें पुलिस वालों ने घटनास्थल पर जाने से रोक दिया था। विरोध करने पर उनके साथ अभद्रता की। इंसाफ मांगने वे जहां पर भी जाते थे, पुलिस वाले वहां पर ही उन्हें रोक देते थे। यहां तक की पुलिस वालों ने उन्हें कैंडल मार्च तक निकालने से मना कर दिया था।

प्रियंका वशिष्ठ ने कहा, उनके पति का एनकाउंटर नहीं, हत्या की गई है। दिल्ली पुलिस ने अपनी गर्दन फंसती देखकर संबंधित रेस्टोरेट में लगे सीसीटीवी की फुटेज में भी छेड़छाड़ कर दी है। वे इंसाफ की लड़ाई लड़ेंगी। यदि एसआईटी ने केस की निष्पक्ष जांच नहीं की तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।

इंसाफ मांग रहे मनोज वशिष्ठ के परिजनों पर पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। इसका खुलासा मनोज के भाई अनिल वशिष्ठ ने किया। उन्होंने कहा दिल्ली पुलिस ने पहले उनके भाई की हत्या तो की ही, इंसाफ मांगने पर पुलिस वालों ने उन पर लाठियां भी बरसाईं।

उनका कहना है घटना की जानकारी मिलने पर करीब साढ़े नौ बजे दिल्ली के लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल पहुंचे तो पुलिस वालों ने मनोज को देखने तक नहीं दिया। उस समय तक भी मनोज में जान थी, लेकिन पुलिस ने उनका उपचार तब तक नहीं करने दिया, जब तक कि उनकी मृत्यु नहीं हो गई। रात में ही पुलिस वालों ने उनका पोस्टमार्टम कराने की तैयारी कर ली थी।

एसीपी के नाम से मनोज को किया जा रहा था टार्चर

manoj vashisth wife raise question at encounter

सपा नेता और देशभक्त सेना ट्रस्ट के चेयरमैन मनोज वशिष्ठ को एसीपी के नाम से टॉर्चर किया जा रहा था। पंजाब और चंडीगढ़ के दो व्यापारी दिल्ली के एक एसीपी (आईपीएस) के नाम से मनोज को पिछले काफी समय से टार्चर कर रहे थे। उन्हें कई बार एनकाउंटर कराने तक की धमकी दी गई।  मनोज ने धमकी के संबंध में कई बार शिकायत की, लेकिन दिल्ली पुलिस के अफसरों ने कोई बात नहीं सुनी।

मनोज वशिष्ठ के एनकाउंटर के मामले में बुधवार को उनके परिजनों ने यह सनसनीखेज खुलासा किया है। मनोज वशिष्ठ के भाई अनिल वशिष्ठ के अनुसार दिल्ली के राजनगर में स्थित एक प्लाट को लेकर मनोज का चंडीगढ़ के एक व्यापारी से रुपये के लेनदेन का विवाद चल रहा था। व्यापारी खुद को कर्नल बताता है।

दिल्ली के एक एएसपी को अपना रिश्तेदार बताकर मनोज को टार्चर करता था। उनके साथ गाली-गलौच भी करता था। उसने पंजाब में मनोज के खिलाफ धोखाधड़ी संबंधित मुकदमे दर्ज करा रखे हैं। उसने दिल्ली में भी मुकदमे दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन इसमें वह सफल नहीं हो पा रहा था। वह एनकाउंटर कराने की भी कई बार धमकी दे चुका था। उसका पंजाब का एक साथी भी उन्हें परेशान करता था। मनोज ने कई बार दिल्ली पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी किसी ने बात नहीं सुनी। उनका आरोप है आरोपी अधिकारी ने ही उनकी हत्या कराई है। इस सारी घटना की उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त को जानकारी दे दी है।

मनोज की गाड़ी के ड्राइवर अन्नु यादव का कहना है जब वह गाड़ी चलाता था तो मनोज के पास कई बार एएसपी के नाम से धमकी आई थी। धमकी चंडीगढ़ का एक व्यापारी देता था। मनोज ने कई बार उस अधिकारी का उनके सामने नाम भी लिया था। मनोज की मौत के बाद दिल्ली में हुए हंगामे के दौरान आरोपी अधिकारी वहां पहुंचा, तो उसने उनकी नेम प्लेट पढ़ने के बाद उनसे धमकी की बात कहीं, एक बार तो उन्होंने इस तरह की जानकारी होने से मना कर दिया, लेकिन दोबारा कहने पर वह कुछ याद कर बोला  अच्छा तो यही था वो मनोज वशिष्ठ। इसके बाद वह वहां से खिसक गया था।

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