मन की बात: मोदी-ओबामा ने खोले दिल के राज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने देश को एक साथ मन की बात कार्यक्रम में संबोधित किया तो दोनों नेताओं ने दिल के राज खोलकर रख दिए। कार्यक्रम की शुरूआत प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन से की।
जिसमें उन्होंने बराक शब्द का महत्व समझाया। जिसके अनुसार स्वाइल भाषा में बराक का मतलब है आशीर्वाद पाना। मैं समझता हूं कि बराक के नाम के साथ एक बहुत बड़ा तोहफा भी है, जो उनके परिवार ने दिया है।
इसके बाद मोदी ने बराक ओबामा को अपने संबोधन के लिए आमंत्रित किया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी ने बार बार अमेरिकी राष्ट्रपति को बराक कहकर ही संबोधित किया।
बराक ओबामा ने अपने संबोधन की शुरूआत नमस्ते से की। इसके बाद उन्होंने भारत की संस्कृति से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तक का जिक्र अपने संबोधन में किया।
ओबामा ने नमस्ते कहकर शुरू किया अपना संबोधन
ओबामा ने कहा कि देश में आप कहीं भी मुझे सुन पा रहे हैं मेरे लिए ये बड़ी गर्व की बात है। हम दोनों दुनिया की एक महान संस्कृति वाले देश हैं। दो नयी सोच वाली अर्थव्यवस्था हैं। जो किसी न किसी रूप में एक दूसरे को जोड़ते हैं। ओबामा ने कहा कि अमेरिकी भारतवंशी दोनों देशों के बीच एक सेतु की तरह हैं।
उन्होंने मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंधों को मजबूती देने में मोदी जी के प्रयासों से मैं काफी प्रभावित हूं। उनके द्वारा महिला शक्तिकरण, बिजली और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास काफी सराहनीय हैं।
अमेरिका भी इन क्षेत्रों में भारत की मदद करना चाहता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और न्याय व्यवस्था के लिए मैंने भी कदम उठाए हैं। कई सारे मुद्दे ऐसे हैं जो दोनों देशों में एक समान हैं।
उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा से बड़ा कुछ नहीं है। इन मूल्यों के एक साथ जुड़े रहने से ही पूरे विश्व में शांति सुरक्षा और खुशहाली आ सकती है। ओबामा के इस संबोधन के बाद शुरू हुआ सवाल जवाबों का सिलसिला।
पेश हैं कुछ चुनिंदा सवाल और उनसे जुड़े हुबहू जवाब
पहला सवालः अपनी बेटियों को वहां जाकर भारत के अनुभव कैसे बताएंगे। क्या आपने उनके लिए यहां से कुछ खरीदा है।
उत्तरः पहली चीज तो यह बता दूं कि वो भारत आने को बहुत उत्साहित थी। लेकिन स्कूल के कार्यक्रम के चलते वह यहां न आ सकीं। बड़ी बेटी की परीक्षाएं चल रही हैं। इसलिए वो नहीं आ पाई। वे दोनों भारत की संस्कृति से बहुत प्रभावित हैं।
भारत की आजादी की लड़ाई के बारे में मैंने उन्हें जैसा बताया है उसे सुनकर वह यहां आने के लिए काफी उतावलीं थीं। मैं उन्हें वापस जाकर बताऊंगा कि भारत वैसा ही है जैसा में उन्हें बताया करता था। अगली बार मैं जरूर उन्हें यहां लाऊंगा। मेरी टीम ने उनके लिए कुछ सामान खरीदा है।
सवालः (मोदी के लिए) आपने जो बेटी बचाओ योजना शुरू की है क्या उसमें भी ओबामा की मदद मांगी है।
उत्तरः भारत में बेटियों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। यहां कन्या भू्रण हत्या की दर काफी ज्यादा है। इसलिए इस दिशा में हम मिलकर प्रयास कर रहे हैं। मैं इस संबंध में ओबामा से मदद मांगू या न मांगू लेकिन उनका जीवन खुद इसके लिए एक प्रेरणा है। उनकी दो बेटियां हैं जिनकी वह बहुत अच्छी तरह परवरिश करते हैं। उनका जीवन ही हमारे लिए प्रेरणा की तरह है।
क्या आप दोनों ने जो आज हैं वो बनने के बारे में सोचा था
सवालः (ओबामा से) आपकी पत्नी मिशेल ओबामा मोटापे और डायबिटीज जैसी बीमारियों से निपटने के संबंध में काफी कार्य कर रही हैं भारत में भी यह समस्या बहुत बड़ी है। क्या अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद आप भी भारत में आकर इस दिशा में कुछ ऐसा ही करेंगे।
उत्तरः मिशेल के प्रयासों पर मुझे गर्व है। मोटापे की समस्या से सारी दुनिया त्रस्त है। कई जगह बहुत छोटी उम्र में बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं। इसका कारण फास्ट फूड और व्यायाम की कमी है। इस दिशा में भारत सहित अन्य देशों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। पहले भी मैने और मोदी जी ने इबोला और पोलियो से लड़ने के कारगर उपायों पर चर्चा की है। मोदी जी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सराहनीय प्रयास किए हैं। और ये दूसरों के लिए उदाहरण हैं।
प्रश्नः क्या आपने कभी सोचा था कि आप दोनों जो आज हैं कभी वो बन सकते हैं।
उत्तरः हम दोनों ही साधारण परिवार में जन्में हैं। हमारी शिक्षा भी लगभग एक जैसी है। हमने अपने देशों में मौजूद असाधारण संभावनाओं का लाभ उठाया। यही बात हमें प्रेरित करती है कि कोई भी यहां कभी भी कुछ बन सकता है।
उत्तरः (मोदी) मैंने भी कभी यह कल्पना नहीं की थी। लेकिन एक बात कहूंगा कि कुछ भी बनने के सपने कभी भी मत देखो। अगर सपने देखो तो कुछ करने के। सिर्फ बनने के सपने देखते हैं और कुछ नहीं कर पाते हैं तो निराशा ही मिलती है। लेकिन अगर कुछ करने के सपने देखोगे तो संतुष्टि जरूर मिलेगी।
किस अमेरिकन नेता से प्रभावित हैं मोदी
सवालः (मोदी से) आप किसी अमेरिकन नेता से प्रेरित हैं।
उत्तरः छोटे थे तो कैनेडी की फोटो देखा करते थे। मुझे बचपन में काफी शौक था पढ़ने का। इस दौरान बेंजामिन फ्रेंकलिन का जीवन चरित्र पढ़ने का मौका मिला। वह राष्ट्रपति तो नहीं बने लेकिन उनका जीवन बहुत प्रेरणादायक है। वह बताते थे कि नींद ज्यादा आती है तो कम करने के तरीके क्या हो सकते हैँ।
काम करते-करते साथी नाराज होते हैं तो उन्हें मनाने का तरीका उन्होंने अपनी बायोग्राफी में लिखा है। वह बहुत सामान्य परिवार से आए थे उनकी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई थी। आज भी उनके विचारों की छवि अमेरिका पर है।
इसके अलावा मोदी ने हाल ही की अपनी अमेरिकी यात्रा का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि व्हाइट हाउस में जब मैं गया तो ओबामा मेरे लिए काफी ढूंढकर एक किताब लेकर आए। वह किताब थी जिसमें शिकागो धर्म संसद के दौरान स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए भाषण के अंश थे। मोदी ने बताया कि ओबामा गर्व से यह बता रहे थे कि वह भी उसी शिकागो से हैं जहां एक महान धर्म शास्त्री स्वामी विवेकानंद ने अपने विचार प्रकट किए।