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कांग्रेस में चल रही मनमोहन एंड कंपनी को 'गुनहगार' बताने की तैयारी!

Mon, 12 May 2014 08:38 AM IST
Updated Mon, 12 May 2014 08:38 AM IST
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manmohan singh will be scapegoat in congress

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हालत पतली होने की आशंका के बीच कांग्रेस के अंदरखाने पार्टी की असफलता का ठीकरा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी टीम के सिर पर फोड़ने की भूमिका बनाई जा रही है।

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पार्टी के अंदर शीर्ष स्तर पर ये चर्चा जोरों पर है कि  अगर चुनाव में कांग्रेस अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन की ओर बढ़ती है तो इसकी सीधी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और उनके करीबी मंत्रियों पर डाली जा सकती है।
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संभावना है कि खराब प्रदर्शन की सूरत में सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों और कामकाज को लेकर पार्टी के ही कुछ बड़े नेता सवाल उठाते हुए आवाज बुलंद सकते हैं। महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पार्टी के अंदर से ही कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है।

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आलोचनाओं का सामना करेंगे मनमोहन

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भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर कांग्रेस 100 सीटों का आंकड़ा नहीं छू पाती तो पार्टी के अंदर गांधी परिवार का वर्चस्व खत्म हो जाएगा। मोदी की इस बात को लेकर पार्टी के तमाम नेता सिरे से खारिज करते हैं।

पार्टी के कुछ नेता मानते है कि चुनाव में अगर कांग्रेस अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन करती है तो संगठन पर सवाल उठाने के बजाय यूपीए सरकार की नीतियां और कामकाज निशाने पर होगा।

पार्टी के अंदर माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति में मनमोहन सिंह को अपनी विदाई के समय शुभकामनाएं नहीं बल्कि आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है। यूपीए दो सरकार का कार्यकाल देखे तो कई मौकों पर मनमोहन सिंह पर सीधे सवाल उठाए गए।

घोटालों में निशाने पर मनमोहन

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2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के समय भी विपक्ष की ओर से सवाल उठाया गया कि आखिर प्रधानमंत्री की नाक के नीचे पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा स्पेक्ट्रम के आवंटन में गड़बड़ी कर सके। कोयला घोटाले में भी प्रधानमंत्री ही निशाने रहे। क्योंकि जिस समय कोयला ब्लॉक आवंटन में गड़बड़ी सामने आई।

उस समय कोयला मंत्रालय का प्रभार उनके पास ही था। फिर रेल मंत्रालय में भर्ती घोटाले को लेकर तत्कालीन रेल मंत्री पवन बंसल के भांजे का नाम सामने आया। बंसल को इस्तीफा देना पड़ा। इसके ठीक बाद सीबीआई से कोयला घोटाले से संबंधित फाइले तलब कर देखने के मामले में तब के कानून मंत्री अश्विनी कुमार फंसे। उनको भी इस्तीफा देना पड़ा। ये दोनों मंत्री प्रधानमंत्री के करीबी थे और उनकी सिफारिश पर ही उन्हें मंत्रिमंडल में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

दूसरी तरफ मनमोहन सिंह के चहेते योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया पर भी निशाना साधा जा सकता है। गरीबी रेखा को लेकर योजना आयोग की ओर से दी गई परिभाषा को लेकर यूपीए सरकार की जमकर फजीहत हो चुकी है। ऐसे कई मामलों में प्रधानमंत्री अपने लोगों के निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी प्रधानमंत्री के समर्थन में खड़े होंगे। मगर पार्टी के दूसरे नेता शायद ही ऐसा कर सके। इसकी संभावना पार्टी का एक धड़ा कम ही मान रहा है।

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