मनमोहन ने की थी अहमद बुखारी की बड़ी मदद, हुआ खुलासा
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अहमद बुखारी को आश्वासन दिया था कि जामा मस्जिद को संरक्षित इमारत घोषित नहीं किया जाएगा। ये खुलासा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के दिल्ली हाईकोर्ट में जमा किए गए हलफनामे से हुआ है।
उल्लेखनीय है कि मुगल काल की अधिकांश इमारतें एएसआई के संरक्षण में हैं। वही इन इमारतों के रखरखाव भी करती है। हालांकि जामा मस्जिद एएसआई के संरक्षण में नहीं है।
300 साल पुरानी इमारत का मालिकाना शाही इमाम अहमद बुखारी के पास है। सालों से बुखारी का ही परिवार मस्जिद का रखरखाव करता रहा है और उससे होने वाली आमदनी का उपयोग भी वही करता है। एएसआई जामा मस्जिद का मालिकाना न हासिल कर पाए और ये बुखारी परिवार के पास ही बनी रही, इस मकसद में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी अहमद बुखारी की मदद की थी।
मनमोहन ने बुखारी को लिखी थी चिट्ठी
दिल्ली हाईकोर्ट में जमा हलफनामे में एएसआई ने कहा है कि 2004 में यूपीए सरकार बनने के तुरंत बाद ही मनमोहन सिंह ने पत्र लिखकर सैय्यद अहमद बुखारी को आश्वासन दिया था कि वे जामा मस्जिद को संरक्षित इमारत घोषित नहीं होने देंगे।
दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट यूपीए सरकार द्वारा जामा मस्जिद को संरक्षित इमारत घोषित नहीं किए जाने के मामले की सुनवाई कर रहा है।
हाईकोर्ट में 10 सालों से ये मामला चल रहा है। यूपीए सरकार यदि जामा मस्जिद को संरक्षित इमारत घोषित कर देती तो उसका मालिकाना शाही इमाम के बजाय केंद्र सरकार के पास चला जाता।
20 अक्टूबर, 2004 को लिखे पत्र में मनमोहन सिंह ने लिखा था, 'जनाब सैय्यद अहमद बुखारी साहब, मैंने संस्कृति मंत्रालय और एएसआई को कहा है कि वे जामा मास्जिद में मरम्मत का काम कर दें, जो कि आपने 10 अक्टूबर को लिखे पत्र में कहा है।' मनमोहन ने पत्र में ये भी कहा है कि उन्होंने मंत्रालय को ये भी बता दिया है कि जामा मस्जिद को संरक्षित इमारत घोषित नहीं किया जाएगा।