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‘भूत बंगले’ के बगल में मनमोहन-शिंजे की बैठक

Wed, 29 May 2013 12:05 AM IST
टोक्यो से उदय कुमार
टोक्यो से उदय कुमार Updated Wed, 29 May 2013 12:05 AM IST
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manmohan singh shinzo abe meeting in japan

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बुधवार को जापान के पीएम शिंजो अबे के साथ जिस ‘कैन्तेइ’ में शिखर बैठक होने जा रही है, उसी परिसर में एक ‘भूत बंगला’ भी है।

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यह बंगला दरअसल प्रधानमंत्री का राजकीय आवास है जो आजकल काफी चर्चा में है। वर्ष 1929 में बना यह बंगला बनते ही दो बार विद्रोह का गवाह बना, जिसमें काफी लोग मारे गए थे।
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कहा जाता है कि कुछ प्रधानमंत्रियों ने यहां कुछ अदृश्य गतिविधियां भी महसूस कीं। एक ने तो बताया था कि उन्हें यहां बूटों की आवाज आती है। शिंजो पिछले साल दिसंबर में प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक वहां रहने नहीं गए।
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2014 को लेकर आश्वस्त दिखे मनमोहन

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में अपनी सफलता और तब तक कुर्सी की सलामती के प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कितने आश्वस्त हैं, इसकी झलक मंगलवार को टोक्यो में देखने को मिली।

पहले जापान बिजनेस फेडरेशन (निप्पॉन कीडानरेन) को संबोधित करते हुए और फिर जापान-इंडिया एसोसिएशन की बैठक में उन्होंने जो वादे किए, उन्हें 2014 तक पूरा करने का विश्वास भी दिला दिया।

जापान के एक उद्योगपति के सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री यहां तक कह गए कि आर्थिक मोर्चे पर वह कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेंगे और चुनाव के बाद भी सरकार पूरे देश में गुड्स एंड सेल्स टैक्स (जीएसटी) लागू करने को वचनबद्ध है।

दरअसल मनमोहन सिंह ने जापान के उद्योगपतियों के बहाने यह संदेश दूर तक देने की कोशिश की है कांग्रेस अगला चुनाव उन्हीं के नेतृत्व की उपलब्धियों के सहारे लड़ने वाली है।

मंगलवार को प्रधानमंत्री जापान के औद्योगिक घरानों के प्रमुखों के साथ लंच पर बैठे तो भारत में निवेश की संभावनाएं गिनाना नहीं भूले। उन्होंने दिल्ली-मुंबई के बीच डेडिकेटेड रेल फ्रेट कॉरिडोर और दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे को लेकर हुई प्रगति का ब्योरा दिया।

साथ ही कहा कि अब मुंबई-अहमदाबाद के बीच हाईस्पीड रेलवे रूट और चेन्नई-बंगलूरू इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए जापानी उद्योग जगत मदद के लिए हाथ बढ़ाए तो उसे भी फायदा होगा। सौर ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में जापानी उद्योगपति निवेश करें जिसकी भारत को बहुत जरूरत है।


मनमोहन सिंह ने अपनी बात खत्म की तो जापान के एक प्रमुख उद्योगपति ने सीधा सवाल कर दिया कि भारत में निवेश करने में सबसे बड़ी दिक्कत हर राज्य में अलग करों का बोझ होना है। इस पर प्रधानमंत्री ने बताया कि संघीय ढांचे के चलते कुछ समस्याएं जरूर हैं, लेकिन अब ज्यादातर राज्यों को राजी कर लिया गया है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि 2014 के चुनाव के बाद भी देश में किसी न किसी रूप में जीएसटी लागू होगा। प्रधानमंत्री ने बैठकों में अपने नौ साल के शासनकाल की उपलब्धियां भी गिनाईं और बात-बात में ‘मैं आश्वस्त हूं’ कहकर अपनी मजबूती भी दिखाई।

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