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क्या ये मनमोहन की आखिरी जनसभा थी?

Sun, 13 Apr 2014 08:38 AM IST
Updated Sun, 13 Apr 2014 08:38 AM IST
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manmohan singh rally in pilibhit

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जनसभा कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लोकसभा चुनाव 2014 में जिले के तहसील मुख्यालय पूरनपुर में उनकी पहली और प्रधानमंत्री के रूप में अंतिम जनसभा हुई है। कांग्रेस की सरकार बने अथवा नहीं, किसी भी हालत में उनका प्रधानमंत्री न बनना तय हो चुका है।

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खास बात यह भी है कि प्रधानमंत्री पद से रिटायर होने से पहले ही उन्होंने खुद को मानसिक रूप से सत्ता और सियासत से रिटायर कर लिया है। उनकी इस घोषणा का असर जनसभा में साफ देखने को मिला, जो गूंज छह साल पहले पीएम की यहां हुई सभा में गूंजी थी वह काफूर रही। इस तरह उनकी यह सभा एक नजीर मानी जा रही है।
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प्रधानमंत्री का सभास्थल पर 12.19 बजे आगमन हुआ। ठीक 12.44 बजे उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में ही कभी बिना नाम लिए तो कभी नाम लेकर भाजपा को घेरते हुए वोटरों से सवाल किए।
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पीएम ने बयां की अपनी लाचारी

manmohan singh rally in pilibhit

उन्होंने अपनी 10 साल की सरकार की उपलब्धियों से लेकर विपक्षी दल पर हमले करने तथा चुनाव में कांग्रेस को जिताने का अपील का लिखा हुआ दो पेज का पत्र पढ़ा। वह धीमी आवाज में बिना वोटरों की ओर देखे अपने भाषण की स्क्रिप्ट पढ़ते रहे। खास बात यह रही कि उन्होंने न तो भाजपा पर हमला किया और न ही भीड़ के मिजाज को परखा।

उन्होंने गिनती के सवालों को और उपलब्धियां पढ़कर वोटरों पर उम्मीद जताई तो भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए नए कानून बनाने की इच्छा जताकर इसे भाजपा के असहयोग के कारण पूरा न कर पाने की लाचारी बयां की।

वह यहीं नहीं रुके बढ़ती कीमतों को न रोक पाने के कारण महंगाई पर भी अपनी हताशा बयां कर दी तो प्रदेश में गैर कांग्रेसी सरकारों के असहयोग के कारण विकास न होने, सभी बेरोजगारों को रोजगार न दिला पाने तथा केंद्र सरकार द्वारा विशेष पैकेज देने के बाद भी किसानों को गन्ने का मूल्य न मिलने की लाचारी भी बयां कर दी। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री के भाषण पढ़ते समय सामने बैठे वोटर भी शांत दिखे।

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