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अधर में लटकी मनमोहन-नवाज की मुलाकात

Thu, 15 Aug 2013 12:02 AM IST
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र Updated Thu, 15 Aug 2013 12:02 AM IST
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manmohan singh nawaz sharif meeting in doubt

भारत-पाकिस्तान के बीच सचिव स्तर की वार्ता टलने के बाद अब अगले महीने न्यूयार्क में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात का मामला भी अधर में लटक गया है।

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नई परिस्थितियों में अब विदेश मंत्रालय भी मानता है कि पाकिस्तानी नेशनल एसेंबली के भारत विरोधी प्रस्ताव ने सभी प्रयासों पर लगभग पानी फेर दिया है।

दरअसल पुंछ हमले के बाद भी भारत सरकार सचिव स्तर की वार्ता और मनमोहन सिंह-नवाज शरीफ की मुलाकात की गुंजाइश बनाए रखना चाहती थी।

इसके लिए विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद पाकिस्तान को हमले की जिम्मेदारी लेने की नसीहत देने के बाद सकारात्मक पहल का इंतजार कर रहे थे।

मगर पाकिस्तान के भारत विरोधी प्रस्ताव के बाद सरकार के पास द्विपक्षीय वार्ता या दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के समर्थन में तर्क नहीं बचे हैं।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सचिव स्तर की वार्ता को टाल भारत ने पुंछ मामले में कड़ा रुख अपना कर पाकिस्तान को संदेश देने की कोशिश की थी।

तब भी सरकार को उम्मीद थी कि चुनाव से पहले और चुनाव जीतने के बाद दोनों देशों के संबंधों में मजबूती लाने का प्रयास करने की लगातार घोषणा करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की ओर से कुछ सकारात्मक पहल होगी।
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मगर इस उम्मीद के विपरीत पाकिस्तानी नेशनल एसेंबली ने भारत विरोधी प्रस्ताव पारित कर न केवल सचिव स्तर की वार्ता बल्कि मनमोहन-नवाज मुलाकात को भी अधर में लटका दिया है।
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मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि फिलहाल इस प्रस्ताव ने द्विपक्षीय वार्ता शुरू करने और दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के समर्थन में सरकार के तरकश के तीर खत्म हो चुके हैं। अब कोई चमत्कार ही इसके लिए रास्ता बना सकता है और चमत्कार की सारी गुंजाइश अब पाकिस्तान के पाले में है।


उल्लेखनीय है कि पुंछ में भारतीय चौकी पर बीते छह अगस्त को हमले के बाद रक्षा मंत्री की पाकिस्तान को दी गई क्लीन चिट दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू करने की गुंजाइश बचाने के लिए थी।

हालांकि इस क्लीन चिट पर मचे बवंडर के बाद भी सरकार ने हमले की सारी जिम्मेदारी पाकिस्तानी सेना पर डाल कर वहां की सरकार को बचाने का प्रयास किया था।

सरकार को लगता था कि नवाज भी अपनी ओर से कुछ ऐसा बयान देंगे, जिससे वार्ता शुरू करने का बहाना मिलेगा। मगर नवाज ने घटना पर सिर्फ अफसोस जताया।

भारत ने जब जिम्मेदारी लेने की बात कही तो पाकिस्तानी नेशनल एसेंबली ने भारत विरोधी प्रस्ताव पारित कर सारी उम्मीदें धो डाली।

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