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प्रधानमंत्री के सिपहसालार एक-एक कर हो रहे धराशायी
संजय मिश्र
Updated Sun, 05 May 2013 12:19 AM IST
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सत्ता की सियासत में तीसरी पारी का विकल्प खुला रखने का प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का ऐलान राजनीति रुप से उनके लिए फिलहाल सुखद साबित नहीं हो रहा।
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इसे संयोग कहें या घनघोर सियासत मगर हकीकत यही है कि कोलगेट में सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट में हेर-फेर से लेकर रेलवे प्रमोशन घूसकांड के नए राजनीतिक उफानों में प्रधानमंत्री के खास सिपहसालर ही धराशायी हो रहे हैं।
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कोलगेट में कानून मंत्री अश्विनी कुमार की कुर्सी का खतरा अभी टला भी नहीं है कि रेलवे प्रमोशन घूसकांड के तूफान में रेलमंत्री पवन बसंल की कुर्सी भी भंवर में फंस गई है।
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प्रधानमंत्री के चहेते योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया लगातार कई बड़े विवादों को लेकर निशाने पर हैं तो पूर्व खेल मंत्री एम एस गिल का पहले ही पत्ता साफ हो गया है।
रिश्वत लेते रंगे हाथ सीबीआई के शिकंजे में आए अपने भांजे की वजह से अपनी कुर्सी गंवाने के खतरे तक पहुंचे पवन कुमार बंसल दरअसल कैबिनेट में प्रधानमंत्री के पसंदीदा चेहरों में शामिल हैं।
कांग्रेस के उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि यह बंसल को लेकर प्रधानमंत्री की राय ही थी कि उनकी लो प्रोफाइल राजनीति के बावजूद उन्हें कांग्रेस के खाते में 17 साल बाद आए हाई प्रोफाइल रेल मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया।
जबकि माना जाता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सड़क परिवहन मंत्री सीपी जोशी को तृणमूल कांग्रेस के यूपीए छोड़ने के बाद रेलमंत्री बनाने के पक्ष में थीं।
इसीलिए जोशी को मुकुल राय के इस्तीफे के बाद रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार कुछ दिनों के लिए दिया भी गया था। लेकिन प्रधानमंत्री की पंसद को देखते हुए आखिरकार बंसल ही रेलमंत्री बने।
मगर प्रमोशन के लिए करोड़ रुपए की रिश्वत डील में रंगे हाथ गिरफ्तार अपने भांजे की वजह से न केवल बंसल मुसीबत में हैं बल्कि प्रधानमंत्री के लिए इस घूसकांड के तूफान को थामना बड़ी चुनौती बन गई है। क्योंकि इसकी वजह से सरकार के साथ-साथ प्रधानमंत्री की साख पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
बंसल ही अकेले मुसीबत नहीं हैं बल्कि कैबिनेट में प्रधानमंत्री पहले से ही सीबीआई स्टेटस रिपोर्ट में बदलाव को लेकर अपने कानून मंत्री अश्विनी कुमार को बचाने की जद्दोजहद से जूझ रहे हैं। क्योंकि कानून मंत्री की कुर्सी इस मामले में गई तो फिर इस तूफान के भंवर में खुद पीएम भी घिर जाएंगे।
बंसल की प्रधानमंत्री से निकटता जहां राजनीतिक है वहीं अश्विनी कुमार से तो उनके पुराने निकट संबंध रहे हैं। इसीलिए राज्यसभा की राजनीति करने वाले कुमार को कांग्रेस के कई दिग्गजों की अनदेखी कर कानून मंत्रालय का हाई प्रोफाइल महकमा दिया गया।
कांग्रेस के सियासी गलियारे में अभी तक इसको लेकर चर्चाओं का बाजार थमा नहीं है। अपनी कैबिनेट के इन दोनों मंत्रियों को लेकर से न केवल सरकार और प्रधानमंत्री की साख पर सवाल पैदा हो गया है।
साथ ही खुद के दुर्घटना वश खुद राजनीति में आने की बात कहने वाले प्रधानमंत्री अब लगातार राजनीतिक दुघर्टनाओं का पर्याय बन रहे हैं।