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जर्मनी में भी गैंगरेप पर घिरे प्रधानमंत्री
जर्मनी से आशुतोष चतुर्वेदी
Updated Fri, 12 Apr 2013 12:31 AM IST
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दिल्ली में चलती बस में हुई गैंगरेप की घटना से जुड़े सवालों ने जर्मनी में भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पीछा नहीं छोड़ा।
हालांकि ऐसे सवालों पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस घटना के चलते देश में भारी गुस्सा था और सरकार ने भी तत्परता से कदम उठाए।
संसद को नया सख्त कानून बनाने के लिए राजी किया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए।
गैंगरेप की इस घटना को आधार बनाकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की ओर से प्रधानमंत्री से भारत में मानवाधिकारों के उल्लंघन का सवाल किया गया था।
जवाब में मनमोहन ने कहा कि भारत एक खुली किताब और खुले समाज की तरह है। भारतीय लोकतंत्र में मानवाधिकारों और लोगों की आजादी के प्रति पूरा सम्मान है।
जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे यहां नीतियां बनाते वक्त जनता की राय को महत्व दिया जाता है।
लोग सरकार की नीतियों का विरोध कर सकते हैं। अपनी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।
मर्केल ने भी कहा कि प्रधानमंत्री अपने यहां चुनौतियों से बखूबी वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि जर्मनी भारत को विकास के पथ पर आगे बढ़ने में सहयोग करता रहेगा।
इस बीच, अंतर-सरकारी वार्ता में दोनों देशों ने आपसी संबंधों को मजबूती देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शिक्षा, कृषि और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में छह समझौते किए हैं।
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इसमें भारत के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के लिए जर्मनी से सात हजार करोड़ रुपये का ऋण मिलने का करार भी शामिल है।
हालांकि यूरोपीय यूनियन के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते की मंजिल अभी दूर दिख रही है।
मनमोहन सिंह से बातचीत के बाद मर्केल ने कहा कि भारत और ईयू अभी मुक्त व्यापार समझौते के लिए सभी बाधाओं को पार नहीं कर पाए हैं।
पीएम के डिनर से पहले चांसलरी में घुसी लोमड़ी
जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की ओर से प्रधानमंत्री के लिए आयोजित निजी भोज से कुछ घंटों पहले एक बिन बुलाया मेहमान भी चांसलरी (मर्केल का दफ्तर) में आ पहुंचा। यह एक लोमड़ी थी।
लोमड़ी की घुसपैठ से सुरक्षा अधिकारी भी हैरान थे। हालांकि कुछ मिनट वहां रुकने के बाद लोमड़ी खुद ही चली गई, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने राहत की सांस ली।
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हालांकि ऐसे सवालों पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस घटना के चलते देश में भारी गुस्सा था और सरकार ने भी तत्परता से कदम उठाए।
संसद को नया सख्त कानून बनाने के लिए राजी किया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए।
गैंगरेप की इस घटना को आधार बनाकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की ओर से प्रधानमंत्री से भारत में मानवाधिकारों के उल्लंघन का सवाल किया गया था।
जवाब में मनमोहन ने कहा कि भारत एक खुली किताब और खुले समाज की तरह है। भारतीय लोकतंत्र में मानवाधिकारों और लोगों की आजादी के प्रति पूरा सम्मान है।
जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे यहां नीतियां बनाते वक्त जनता की राय को महत्व दिया जाता है।
लोग सरकार की नीतियों का विरोध कर सकते हैं। अपनी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।
मर्केल ने भी कहा कि प्रधानमंत्री अपने यहां चुनौतियों से बखूबी वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि जर्मनी भारत को विकास के पथ पर आगे बढ़ने में सहयोग करता रहेगा।
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इस बीच, अंतर-सरकारी वार्ता में दोनों देशों ने आपसी संबंधों को मजबूती देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शिक्षा, कृषि और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में छह समझौते किए हैं।
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इसमें भारत के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के लिए जर्मनी से सात हजार करोड़ रुपये का ऋण मिलने का करार भी शामिल है।
हालांकि यूरोपीय यूनियन के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते की मंजिल अभी दूर दिख रही है।
मनमोहन सिंह से बातचीत के बाद मर्केल ने कहा कि भारत और ईयू अभी मुक्त व्यापार समझौते के लिए सभी बाधाओं को पार नहीं कर पाए हैं।
पीएम के डिनर से पहले चांसलरी में घुसी लोमड़ी
जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की ओर से प्रधानमंत्री के लिए आयोजित निजी भोज से कुछ घंटों पहले एक बिन बुलाया मेहमान भी चांसलरी (मर्केल का दफ्तर) में आ पहुंचा। यह एक लोमड़ी थी।
लोमड़ी की घुसपैठ से सुरक्षा अधिकारी भी हैरान थे। हालांकि कुछ मिनट वहां रुकने के बाद लोमड़ी खुद ही चली गई, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने राहत की सांस ली।