फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   manjhi's chair now depend on governor's will

बिहारः 20 मंत्रियों का इस्तीफा, राज्यपाल पर निगाहें

Sat, 07 Feb 2015 11:50 PM IST
Updated Sat, 07 Feb 2015 11:50 PM IST
विज्ञापन
manjhi's chair now depend on governor's will

नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी के बीच सीधी तकरार के बाद वहां की राजनीति किस करवट बैठेगी, यह पूरी तरह से राज्यपाल पर निर्भर है। संविधान विशेषज्ञों के मुताबिक मुख्यमंत्री की कुर्सी राज्यपाल के फैसले पर ही टिकी है।

विज्ञापन


संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि मुख्यमंत्री को सिर्फ राज्यपाल ही पद से हटा सकते हैं। दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि मांझी खुद ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें। भले ही बिहार केमुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को जनता दल (यूनाइटेड) ने बर्खास्त कर दिया है।
विज्ञापन


लेकिन पार्टी मांझी को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटा सकती। मांझी को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए विरोधी गुटों को सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ेगा। दूसरा, मांझी खुद विश्वास प्रस्ताव सदन में लेकर आएं।
विज्ञापन
विज्ञापन

अविश्वास प्रस्ताव लाकर ही हटाया जा सकता है मांझी को

manjhi's chair now depend on governor's will

सुभाष कश्यप का कहना है कि जब तक मांझी सदन में बहुमत नहीं खो देते वह मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। बहुमत साबित न कर पाने की स्थिति में मांझी को मुख्यमंत्री पद से हटना होगा।

वरिष्ठ अनिल बी. दीवान का भी यह मानना है कि यह पूरी तरह राज्यपाल पर निर्भर है। वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी का भी मानना है कि अब तक की खबरों से इसमें संवैधानिक संकट नहीं नजर आ रहा है।

उनका कहना है कि यह मामला फिलहाल राजनीतिक लग रहा है और इसका समाधान भी राजनीतिक तरीके से ही निकल सकता है।
वहीं इसी उठापटक के बीच मांझी नीति आयोग की बैठक में भाग लेने के लिए दिल्‍ली पहुंच गए हैं। जहां उनके समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

ऐसे में जेडीयू नेताओं की निगाहें उनके दिल्‍ली दौरे पर ही टिक गई हैं। क्योंकि प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेता भी दिल्‍ली में ही डटे हुए हैं। वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने तो अमित शाह से मुलाकात भी की।

बिहार में सरकार को लेकर असमंजस की ‌स्थिति

manjhi's chair now depend on governor's will

बिहार में मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बगावती तेवरों के बीच शनिवार को नीतीश कुमार को एक बार फिर जदयू विधायक दल का नेता चुना गया। जदयू के इस कदम से साफ हो गया है कि मांझी अब मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे और नीतीश जल्द ही राज्यपाल के सामने नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

इस बीच पार्टी में दरकिनार किए जा चुके मांझी ने हार नहीं मानी है। मुख्यमंत्री अपने समर्थक विधायकों के साथ नई रणनीति तय करने को नई दिल्ली रवाना हो गए है। मांझी समर्थक मंत्री नरेंद्र सिंह का कहना है कि वह भाजपा का समर्थन ले सकते हैं।

इस बीच देर रात मांझी कैबिनेट में शामिल नीतीश समर्थक 20 मंत्रियों ने सामूहिक रूप से राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इससे पहले मांझी ने 15 और मंत्रियों को बर्खास्त करने की राज्यपाल से सिफारिश की थी।

राज्यपाल ने मुख्यमंत्री की शुक्रवार को मिली सिफारिश को स्वीकार करते हुए ललन सिंह और पीके शाही को बर्खास्त कर दिया था। 29 में से 28 मंत्रियों की मौजूदगी में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री को विधानसभा भंग करने की अनुशंसा करने का अधिकार दिया गया लेकिन 21 मंत्रियों ने इसका विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार किया।

बाद में 19 मंत्रियों ने राज्यपाल और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री की अनुशंसा नहीं मानने की अपील की है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए गेंद पूरी तरह से राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी के पाले में हैं और सबकी नजर राज्यपाल के अगले कदम पर लगी हुई है।

सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़ा 117

manjhi's chair now depend on governor's will

दिन में इस्तीफा देने के लिए मांझी को मनाने के लिए शरद यादव और नीतीश कुमार ने उनसे मुलाकात भी की लेकिन वह इस्तीफा न देने पर अड़े रहे। इसके बाद शाम को जदयू की विधायक दल की बैठक में नीतीश को नया नेता चुना गया।

नेता चुने जाने के बाद नीतीश ने कहा कि भाजपा के कारण उन्हें फिर से कमान संभालने को बाध्य होना पड़ा। उन्होंने कहा कि पार्टी में तेजी से समस्याएं बढ़ रही थी। इस कारण पार्टी को यह निर्णय लेना पड़ा।

उन्होंने कहा कि सरकार बहुमत से चलती है और बहुमत उनके पास है। जरूरत पड़ने पर विधायकों की परेड भी करा देंगे। जदयू विधानमंडल की बैठक में 111 विधायकों में से 97 और 41 विधान पार्षदों में से 37 शामिल हुए।

243 सदस्यीय विधानसभा में सरकार गठन के लिए 117 का आंकड़ा चाहिए। सूत्रों के अनुसार नीतीश को 127 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।  इसमें जदयू के 97, राजद के 24, कांग्रेस के पांच और भाकपा का एक विधायक शामिल है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed