मांझी की 'हरकत' ने बिहार की राजनीति में मचाया हड़कंप
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पार्टी के शीर्ष नेताओं ने जहां उनके इस कदम की आलोचना करते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है। जेडीयू प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता नीरज कुमार ने मांझी के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के नाम से भी प्रदेश की की जनता सिहर जाती है उसके घर जाकर क्या सिद्ध करना चाहते हैं मांझी।
दूसरी ओर कैबिनेट के तीन मंत्रियों ने खुले तौर पर मांझी का समर्थन किया है। कैबिनेट मंत्री नरेन्द्र सिंह, नीतिश मिश्रा और वृषण पटेल ने मांझी का पक्ष लेते हुए कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया और वो अच्छा काम कर रहे हैं।
इसलिए उन्हें आगामी चुनावों में भी मुख्यमंत्री के पद का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए। मंत्रियों के इस कदम पर वरिष्ठ नेताओं का गुस्सा और भड़क गया है, जिसके बाद से मांझी के साथ साथ उन्हें हटाने की भी मांग शुरू हो गई है।
वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात का समय मांगने के मांझी के कदम से पहले ही नाराज चल रही पार्टी उनके इस कदम से और नाराज हो गई है।
ऐसे में जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व के सामने उलझन खड़ी हो गई है कि मांझी के खिलाफ कार्रवाई की जाए या नहीं। दिक्कत ये है कि अगर मांझी के खिलाफ कार्रवाई की गई तो वह बगावत भी कर सकते हैं, ऐसे में पार्टी के कुछ विधायक उनके साथ जा सकते हैं। इससे आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी को बड़ा नुकसान भी हो सकता है।
साधु यादव के घर दावत पर पहुंचे मांझी
बिहार की राजनीति में उथल पुथल का दौर जारी है। अगले विधानसभा चुनावों में अपना किला बचाने की जद्दोजहद में जुटे जेडीयू नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनों की मार से ही हलकान हैं। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के नए नए पैतरें उनके लिए रोज नई मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
एक बार फिर मुख्यमंत्री मांझी ने कुछ ऐसा कर दिया जिसने नीतीश कुमार सहित कई जेडीयू नेताओं की त्यौरियां चढ़ा दी हैं, हालांकि उनके पक्ष में भी लामबंदी शुरू हो गई हैं।
कुछ पुराने नेता जहां उन्हें हटाने की मांग कर रहे हैं वहीं उनके मंत्रीमंडल के कुछ सदस्यों ने उनका समर्थन करते हुए उन्हें आगामी चुनावों के लिए भी मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने की मांग कर दी है। ऐसे में अभी तक अंदरूनी तौर पर चल रही जेडीयू की खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है।
साधु यादव से मुलाकात पर बिफरे जेडीयू नेता
शनिवार को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के साले साधु यादव के घर दही चूडा की दावत खाने पहुंचे तो बिहार की राजनीति में हड़कंप मच गया। उनकी पार्टी जेडीयू ने तो उनके इस कदम पर जबरदस्त विरोध जताया ही राष्ट्रीय जनता दल ने भी उनकी आलोचना शुरू कर दी।
कभी लालू यादव का दाहिना हाथ रहे साधु यादव को अब उनका विरोधी माना जाता है। पूर्व में वो कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनावों में किस्मत भी आजमा चुके हैं। दोनों में अब छत्तीस का आंकड़ा माना जाता है।
वहीं लालू यादव की गलबहियां नीतीश कुमार और के साथ बढ़ती जा रही हैं ऐसे में मांझी के इस कदम पर प्रतिक्रिया होनी ही थी। इससे दोनों दलों में खलबली मची है। वहीं, उनके इस कदम को लेकर उनकी पार्टी में ही पाले खींचते नजर आ रहे हैं।