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मायावती के भाई की कंपनियों में करोड़ों का हेरफेर?

Thu, 31 Jan 2013 12:20 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 31 Jan 2013 12:20 PM IST
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manipulation of crores rs in mayawati brother companies

बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई की कंपनियों में करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। एक अंग्रेजी अखबार ने खुलासा किया है कि मायावती के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके छोटे भाई आनंद कुमार की कंपनियों में करोड़ों का लेन-देन हुआ, जिसका कंपनी के पास कोई हिसाब नहीं है।

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अखबार का दावा है कि आनंद कुमार के नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई बड़ी रियल इस्टेट कंपनियों जेपी, यूनिटेक, डीएलएफ और एसडीएस से कारोबारी रिश्ते हैं। मायावती के तीसरी बार यूपी की मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके भाई आनंद कुमार ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रियल इस्टेट कंपनियों की एक बड़ी सीरीज खड़ी की। इन कंपनियों को यूपी में बड़े स्तर पर रियल इस्टेट के प्रोजेक्ट दिए गए।
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1987 में बनी आनंद कुमार की सबसे पुरानी कंपनी होटल लाइब्रेरी क्लब प्राइवेट लिमिटेड में 2012 में 341 करोड़ रुपए का निवेश किया गया, लेकिन कंपनी के रिकॉर्ड में इस बात की कोई जिक्र नहीं है कि यह रकम किस मद में निवेश की गई। कंपनी के पास इस बात का भी कोई रिकॉर्ड नहीं है कि वह निवेश कहां किया गया।
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इस मामले में रियल इस्टेट की अन्य बड़ी कंपनियों जेपी, यूनिटेक और डीएलएफ का नाम भी सामने आ रहा है। वहीं, एक कंपनी बसपा के राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्र के बेटे से जुड़ी हुई बताई जा रही है। हालांकि डीएलएफ ने इसे सामान्य बिजनेस करार दिया है। डीएलएफ ने कहा है यह बिजनेस पूरी तरह से पारदर्शी है और इसके लिए कोई राजनीतिक फायदा नहीं लिया गया।


रिपोर्ट के मुताबिक आनंद कुमार की कंपनियों में करीब 760 करोड़ रुपए का नगद लेन-देन किया गया। इस रकम को कोई हिसाब कंपनी के पास नहीं है। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को दिए गए दस्तावेजों के मुताबिक आनंद की सात में से एक कंपनी को छोड़कर बाकी सभी कंपनियां 2007 में मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद बनाई गई थीं। आनंद पर आरोप है कि उन्होंने मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद रसूख का इस्तेमाल किया।

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