आम भी न ला पाया रिश्तों में रस, कब दूर होगी कड़वाहट?
ईद के मौके पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 10 किलो आम भेजे थे। इस पर एक अखबार का शीर्षक था, "सीमापार से गोलीबारी के बीच 'आम कूटनीति' के भरोसे शरीफ"।
यह साफ है कि 'आम कूटनीति' काम नहीं कर रही है। इससे सीमा पर होने गोलीबारी कम नहीं हुई क्योंकि इसके एक हफ्ते बाद ही भारत ने पाकिस्तान पर पंजाब के गुरदासपुर में चरमपंथी हमला करने का आरोप लगाया।
भारत क्यों नहीं भेजता आम
शरीफ़ ने भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को 15 किलो और पूर्व भारतीय प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह को भी 10-10 किलो आम भेजे थे। उसी समय 'युद्धविराम उल्लंघन' का अर्थ यह निकला कि पाकिस्तानी रेंजर्स ने ईद के मौके पर भारत के सीमा सुरक्षा बल की ओर से भेजी गई मिठाई लेने से इनकार कर दिया।
दोनों देशों की ओर से त्यौहारों पर मिठाइयों का आदान-प्रदान आम-कूटनीति की तरह ही एक परंपरा है- लेकिन थोड़ी अलग सी। चाहे दोनों देशों के संबंधों में कितना ही तनाव हो, पाकिस्तान हर साल भारत को आम भेजता है लेकिन भारत आम से जवाब नहीं देता। क्या भारत की पाकिस्तानी आमों का भारतीय आमों से जवाब देने में हिचक ही वो वजह है जिसके चलते दोनों परमाणु-संपन्न देश युद्ध के कगार पर हैं?
भारत में ज्यादा किस्में
भारतीय विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने यह समझाने से इनकार कर दिया कि क्यों भारत पाकिस्तान की आम कूटनीति का जवाब नहीं देता और न ही इस पर कोई जानकारी दी कि भारतीय नेताओं को कितने आम मिले हैं। विश्व के पांचवें सबसे बड़े आम उत्पादक पाकिस्तान के सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान में यह सालाना रस्म है कि सिर्फ़ भारत ही नहीं कई देशों के प्रमुखों को आमों के बक्से भेजे जाते हैं।
दक्षिण एशिया में आम उत्पादक अक्सर अपनी फ़सल के बक्से इलाक़े के महत्वपूर्ण लोगों को भेजते हैं, न सिर्फ़ खिलाने बल्कि दिखाने के लिए भी। पाकिस्तान में मौजूद सूत्र बताते है कि यह कई किस्म के आमों को मिलाकर भेजा जाता है। जैसे कि सिंधरी, लंगड़ा और चौसा- ये किस्में भारत में भी पाई जाती हैं। इन बक्सों में एक मशहूर किस्म अनवार रतौल भी शामिल होती है।
कम ही लोग जानते हैं कि अनवार रतौल भी भारत से ही आई है। इसका नाम रतौल गांव पर पड़ा है जो दिल्ली से दो घंटे की दूरी पर है। हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार ने नाम न बताने की शर्त पर एक भारतीय अधिकारी का हवाला दिया, "मोदी को आम एक आधिकारिक माध्यम से पहुंचाए गए थे, हालांकि पाकिस्तान हमारे ऊपर उसकी वायु सीमा में ड्रोन उड़ाने का आरोप लगा रहा था।"
'स्वाद में मुकाबला मुश्किल'
फलों का राजा कहा जाने वाले आम का जन्म भारतीय उपमहाद्वीप में ही हुआ था जैसा कि इसके वैज्ञानिक नाम, मैग्निफ़ेरा इंडिका, से पता चलता है। आम भारत और पाकिस्तान दोनों का राष्ट्रीय फल है। भारत में आम की 1,200 से ज़्यादा क़िस्में उगाई जाती हैं जबकि पाकिस्तान में इसकी एक तिहाई ही। भारत आम का सबसे बड़ा आम उत्पादक है जो पाकिस्तान के मुकाबले 8 गुना ज़्यादा आम उत्पादन करता है। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच तीखे विवाद की वजह इसकी गुणवत्ता है।
पूर्व राजनयिक और नेता मणि शंकर अय्यर कहते हैं, "भारत भी पाकिस्तान के नेताओं को आम भेजे तो अच्छा रहेगा"। लेकिन तुरंत ही वह इसे काटते हुए बोलते हैं, "कराची के भारतीय दूतावास (अब निष्क्रिय है) में काम करने के नाते मैं आपको कह सकता हूं कि भारतीय आमों को उनसे मुकाबला करने में बहुत मुश्किल होगी, जब तक कि हम शुरुआत में ही अल्फ़ांसो के साथ बढ़त न ले लें।"
अपने आमों पर गर्व करने वाले कई भारतीय अय्यर से असहमत हो सकते हैं, जो कहते हैं कि ऐसे कदम सिर्फ़ प्रतीक भर और निरर्थक हैं क्योंकि ऐसे कदमों के साथ-साथ कोई ठोस वार्ता या आदान-प्रदान नहीं होता। पाकिस्तानी राजनीतिक टिप्पणीकार आएशा सिद्दिक़ उनसे सहमत हैं, "आम और क्रिकेट भारत-पाक वार्ता शुरू करने के पुराने तरीके हैं। ऐसा लगता है कि भारत और पाकिस्तान के पास एक-दूसरे से कहने को कुछ नया नहीं है"।