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यौन उत्पीड़न मामले में FIR दर्ज करना होगा अनिवार्य

Sun, 03 Mar 2013 08:50 PM IST
नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय
नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय Updated Sun, 03 Mar 2013 08:50 PM IST
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mandatory sexual harassment case fir must enter

यौन उत्पीड़न के मामलों में एफआईआर दर्ज करने में पुलिस की ना-नुकर अब नहीं चलेगी। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोक, बचाव और सुधार) संबंधी संसद से पारित विधेयक के मुताबिक स्थानीय शिकायत समिति की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। अब इस विधेयक को राष्ट्रपति से हरी झंडी मिलने का इंतजार है।

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कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाव संबंधी प्रस्तावित कानून में संगठित क्षेत्र के साथ ही घरेलू कामकाजी और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत हर जिले में स्थानीय शिकायत समिति का गठन किया जाएगा।
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यह समिति पीड़िता को एफआईआर दर्ज कराने में मदद करेगी। पीड़िता 90 दिनों के अंदर समिति के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकती है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव प्रेम नारायण ने बताया कि पांच सदस्यों वाली समिति की अध्यक्षता कोई महिला सामाजिक कार्यकर्ता करेगी।
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इसके अलावा दो एनजीओ कार्यकर्ता जो महिलाओं के मुद्दे पर काम करे हों, एक सामाजिक कल्याण अधिकारी और इसी तरह किसी एक अन्य व्यक्ति को समिति का सदस्य बनाया जाएगा। समिति में पांच में से तीन सदस्यों का महिला होना जरूरी बनाया गया है।

पीड़िता की शिकायत के आधार पर समिति के जरिए तैयार की गई रिपोर्ट को पुलिस के समक्ष पेश किया जाएगा। महत्वपूर्ण यह है कि पुलिस किसी भी हालत में एफआईआर दर्ज करने से मना नहीं कर सकती है।

इसी तरह संगठित क्षेत्र में (जहां 10 व्यक्ति से ज्यादा काम कर रहे हों) चार सदस्यों वाली आंतरिक समिति बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस समिति की अध्यक्षता संगठन में कार्यरत कोई वरिष्ठ महिला कर्मी करेगी।

कंपनी की सेवा नियमों के आधार पर नियोक्ता के लिए दंड का प्रावधान भी किया गया है, लेकिन जिन संगठनों में सेवा नियम नहीं बनाए गए हैं, वहां सरकार की ओर से बनाए गए दंड कानून को मानना पड़ेगा।


सरकारी नियम के मुताबिक पहली दफा मामला उजागर होने पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना नियोक्ता पर हो सकता है। दूसरी दफा शिकायत होने पर एक लाख जुर्माना समेत पंजीकरण रद्द करने तक का प्रावधान है।

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