वो शख्स जिसने मोदी पर जूता फेंका!
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साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी और सामाजिक कार्यकर्ता रविवार को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के खिलाफ सड़कों पर उतरे।
संत कबीर की कर्मभूमि कबीरचौरा मूलगादी मठ में व्याख्यानों, नाटक, जनगीतों, कविताओं, पोस्टरों और दास्तानगोई के जरिए सांप्रदायिक फासीवाद के खतरों को रेखांकित किया गया। शाम को कबीर से प्रेमचंद तक की सांस्कृतिक यात्रा की गई। यात्रा को पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो कहासुनी भी हुई।
जैसे ही मंच पर चढ़े मोदी, जूता उछला
भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की सभा में एक व्यक्ति ने जूता उछालकर हंगामा खड़ा करने की कोशिश की। मोदी जैसे ही मंच पर चढ़े, सुरक्षा घेरे के पास खड़े एक युवक ने जूता हवा में उछाल दिया।
उसका हाथ पास खड़े एक व्यक्ति से टकरा गया इसलिए जूता थोड़ी दूर सामने ही गिर गया। किसी को कुछ पता चलता, इससे पहले आसपास के लोगों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी।
बाकी लोगों का ध्यान नरेंद्र मोदी की तरफ मंच पर था इसलिए किसी को इसका पता भी न चला। पास ही खड़े आईबी के अफसर तत्काल युवक को पकड़ बाहर खींच ले गए और पुलिस को सौंप दिया।
हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करता है युवक
युवक तेज प्रताप सिंह ने पूछताछ में बताया कि वह चित्रकूट का रहने वाला है और हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करता है। बाद में पुलिस ने उसे सभा स्थल पर ही छोड़ दिया।
पुलिस का कहना है कि वह कई तरह के बयान दे रहा था, कुछ मानसिक तौर पर परेशान लग रहा था। युवक जूता उछालने का कोई कारण कोई नहीं बता सका।
क्या बोल रहे बुद्धिजीवी
'मोदी के चुनावी प्रोपगेंडा पर विचार करने की जरूरत है। गुजरात मॉडल स्पष्ट नहीं है।'
- जान ब्रेज, ख्यात अर्थशास्त्री
'नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में गुजरात में घृणा और हिंसा का दौर सबने देखा है। ऐसे व्यक्ति को मसीहा बताकर उसके लिए समर्थन जुटाया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति माडल की तरह यहां प्रधानमंत्री चुनने की जो प्रक्रिया चल रही है, वह तानाशाही की ओर ले जाएगा।'
- विष्णु खरे, कवि
'नरेंद्र मोदी को हराना बनारस की जनता का काम है। हम तो हकीकत बताने आए हैं। मोदी के जीतने पर सबसे बड़ा खतरा तो लोकशाही को होगा, व्यवस्था तानाशाह होती जाएगी। नफरत भरी राजनीति की शुरुआत अभी से हो गई है। तीसरा विकल्प खोजना होगा।'
- तीस्ता सीतलवाड़, सामाजिक कार्यकर्ता