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खुद को ब्रिटेन से ऑस्ट्रेलिया पार्सल कराया...

Wed, 11 Mar 2015 08:23 AM IST
Updated Wed, 11 Mar 2015 08:23 AM IST
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man posted himself from britain to australia

साठ के दशक के पूर्वार्ध में ऑस्ट्रेलियाई एथलीट रेग स्पीयर्स ने ख़ुद को लंदन में फँसा पाया। उनके पास जहाज़ का टिकट ख़रीदकर घर पहुंचने लायक पैसे नहीं थे। अपनी बेटी के जन्मदिन से पहले किसी तरह घर पहुंचने को बेताब रेग ने तय किया कि वह ख़ुद को एक लकड़ी के बक्से में डाक से भेज देंगे। वो कहते हैं, "मैं तो बस उस बक्से में बैठ गया और चल दिया। इसमें डरने की क्या बात थी? मुझे अँधेरे से डर नहीं लगता इसलिए मैं बस वहां बैठा रहा।"

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रेग बताते हैं, "यह वैसा ही था जैसे अब मैं विदेश जाता हूं। वहां एक सीट है। उसमें बैठिए और चल दीजिए।" रेग स्पीयर्स इसे सीधे सादे ढंग से बताते हैं लेकिन 50 साल पहले इससे मीडिया में तूफ़ान खड़ा हो गया था।
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ओलंपिक नहीं कार्गो

स्पीयर्स ब्रिटेन में अपनी चोट से छुटकारा पाने के लिए आए थे जिसकी वजह से उनके एथलेटिक करियर पर ग्रहण लग गया था। वह भाला फेंक के प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे और टोक्यो ओलंपिक्स 1964 में शरीक होने वाले थे।
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लेकिन जब यह साफ़ हो गया कि वह इन खेलों में शामिल नहीं हो पाएंगे तो उन्होंने वापस ऑस्ट्रेलिया जाने लायक पैसा जुटाना शुरू कर दिया और एयरपोर्ट में एक नौकरी कर ली। लेकिन जब उनका बटुआ, जिसमें उनका सारा पैसा था, चोरी हो गया, तो उनकी योजनाएं बदल गईं। वह एडिलेड में अपने घर वापस लौटना चाहते थे जहां उनकी बीवी और बेटी थे लेकिन ऐसा संभव नहीं था। वह कहते हैं, "इसमें एक दिक़्क़त थी, मेरे पास पैसे नहीं थे।"

उनकी बेटी का जन्मदिन आने वाला था इसलिए वह जल्दी ही यह काम करना चाहते थे। "मैंने एक्सपोर्ट कार्गो विभाग में काम किया ताकि मैं सामान के साथ कैश-ऑन-डिलीवरी सिस्टम को समझ सकूं। मैंने तब जानवरों को उससे आते-जाते देखा था। और मैंने सोचा कि अगर वह यात्रा कर सकते हैं, तो मैं भी कर सकता हूं।"

कितना बड़ा बक्सा भेजा जा सकता?

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स्पीयर्स यह भी जानते थे कि हवाई जहाज़ से कितना बड़ा बक्सा भेजा जा सकता है। तब वह लंदन में अपने एक दोस्त मैकसोर्ले के साथ रहते थे। उन्होंने उस पर दबाव डाला कि वह एक ऐसा बक्सा तैयार करें जिसमें वह ख़ुद को घर भेज सकें।

मैकसोर्ले कहते हैं, "उसने मुझे कहा कि यह 5फुट X 3फुट X 2।5फुट का होना चाहिए। मैं रेग को जानता था और मुझे पता था कि चाहे जो हो, वह यह करके मानेगा। इसलिए बेहतर यह होगा कि मैं उसके लिए यह बक्सा बना दूं ताकि वह घर पहुंच सके।"

स्पीयर्स की ज़रूरत के मुताबिक बने इस बक्से में वह सीधे पैर करके बैठ सकते थे या अपने घुटने मोड़कर लेट सकते थे। इस बक्से के दोनों ओर के दरवाज़े लकड़ी की डाट से बंद किए गए थे जिन्हें अंदर से खोला और बंद किया जा सकता था। इसलिए स्पीयर्स किसी भी तरफ़ से निकल सकते थे।

बक्से में पट्टे लगे हुए थे ताकि जब उसे चढ़ाया या उतारा जाए तो वह अपनी जगह पर बने रहें।

मज़ाक से बचे

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किसी तरह के संदेह से बचने के लिए कि इस बक्से के अंदर कोई आदमी है, बक्से पर एक पेंट का लेबल लगाया गया था और इसे ऑस्ट्रेलिया की एक काल्पनिक जूता कंपनी के पते पर भेजा जाना था। हालांकि इतने बड़े और भारी सामान को भेजे जाने की क़ीमत एक यात्री टिकट से ज़्यादा आनी थी लेकिन स्पीयर्स जानते थे कि वह उसे कैश-ऑन-डिलीवरी योजना के तहत भेज सकते हैं। इसका शुल्क अदा करने की ज़रूरत इसके ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद ही करनी थी।

इस बक्से में टीन में बंद कुछ सामान, एक टॉर्च, एक कंबल और एक तकिया था और दो प्लास्टिक की बोतलें थीं- एक पानी के लिए और एक पेशाब करने के लिए। स्पीयर्स को एयर इंडिया के एक विमान पर चढ़ा दिया गया जिसे पर्थ, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया जाना था। हालांकि स्पीयर्स एडिलेड जाना चाहते थे लेकिन पर्थ को इसलिए चुना गया क्योंकि यह तुलनात्मक रूप से एक छोटा एयरपोर्ट था।

उन्हें लंदन एयरपोर्ट पर धुंध के चलते 24 घंटे तक रुकना पड़ा। एक बार जहाज़ हवा में पहुंच गया तो वह उससे बाहर निकल गए।

थोड़ा घबराकर मैं बक्से में घुस गया

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वह कहते हैं, "लंदन और पेरिस के बीच मैं बक्से से बाहर निकला क्योंकि मुझे बहुत ज़ोर से पेशाब लगा हुआ था। मैंने एक कैन में पेशाब किया और उसे बक्से के ऊपर रख दिया। मैं हाथ-पैर सीधे कर ही रहा था कि अचानक जहाज़ नीचे उतरने लगा, क्योंकि यह दूरी कम थी। थोड़ा घबराकर मैं बक्से में घुस गया और पेशाब से भरी कैन अब भी इसके ऊपर ही थी।"

फ्रांस के सामान निकालने वालों ने सोचा कि वह भरा हुआ कैन लंदन वालों ने उनके लिए मज़ाक के तौर पर छोड़ा है। वो बताते हैं, "उन्होंने अंग्रेज़ों के बारे में कुछ बहुत ख़राब बातें कहीं। लेकिन उन्होंने बक्से के बारे में सोचा तक नहीं। इसलिए मेरी यात्रा जारी रही।"

तीन दिन बक्से में

ऑस्ट्रेलिया की लंबी यात्रा में दूसरा स्टॉप था मुंबई, जहां बक्से उतारने वालों ने स्पीयर्स को धूप में चार घंटे तक उल्टा करके उतार दिया। वो बताते हैं, "मुंबई में जहन्नुम जैसी गर्मी थी इसलिए मैंने अपने कपड़े उतार दिए। जब वह मुझे एक जहाज़ से दूसरे में ले जा रहे थे तब मैं कोलतार की सड़क पर था। मैं बँधा हुआ था लेकिन मेरे पैर ऊपर हवा में थे। मैं पसीना-पसीना हो रहा था लेकिन हार नहीं मानी और इंतज़ार किया, धैर्य रखा। अंततः वह आए और मुझे उठाकर एक दूसरे जहाज़ पर रखा।"

आखिरकार जब जहाज़ पर्थ में उतरा तो स्पीयर्स ने सुना कि ऑस्ट्रेलियाई सामान उतारने वाले उस बक्से के आकार के बारे में कसमें खाकर बातें कर रहे थे जिसमें वह थे। वह तुरंत समझ गए कि वह घर पहुंच गए हैं।

स्पीयर्स कहते हैं, "वह लहज़ा, आप उसे कैसे नज़रअंदाज़ कर सकते हैं? मैं अपनी धरती पर पहुंच गया था। कमाल है, आश्चर्यजनक, मैंने यह कर दिखाया था।"

स्पीयर्स तीन दिन तक एक लकड़ी के बक्से में कैद रहकर बचे रहे थे। लेकिन उनके सामने अब भी एयरपोर्ट से बाहर निकलने की चुनौती थी। सौभाग्य से उनकी क़िस्मत अब भी साथ दे रही थी। "वहां कुछ औज़ार पड़े थे। मैंने उनसे दीवार में एक छेद किया और बाहर निकल गया। वहां कोई सुरक्षा नहीं थी। मैंने अपने बैग से एक सूट निकाला ताकि मैं ठीक-ठाक लगूं, खिड़की से बाहर निकला और सड़क पर आ गया। क़स्बे में एक कार को अंगूठा दिखाकर रोका। बस इतनी ही आसानी से।"

मीडिया का जमावड़ा

लेकिन इंग्लैंड में जॉन मैकसोर्ले जिन्होंने बक्सा बनाया था और स्पीयर्स को एयरपोर्ट तक लेकर गए थे, अपने दोस्त के लिए बेहद चिंतित थे। स्पीयर्स लिफ़्ट मांगते हुए एडिलेड में अपने परिवार के पास पहुंच गए लेकिन मैकसोर्ले को बताना भूल गए कि वह ठीक-ठाक घर पहुंच गए थे। यह जानने की कोशिश में कि क्या हुआ, मैकसोर्ले ने मीडिया को यह सब बता दिया और स्पीयर्स तुरंत ही अपने देश में एक सनसनी बन गए।

वह बताते हैं, "मुझे एक प्रतिष्ठित ऑस्ट्रेलियाई नेता का तार आया जिसमें लिखा था- एक असली ऑस्ट्रेलियाई का किया गया साहसिक प्रयास। और बड़ी बात यह कि मैं भारी मतों से जीत रहा हूं। यह बहुत बढ़िया है।"

और अंततः एयरलाइन कंपनी ने उनसे भाड़ा नहीं लिया। लेकिन स्पीयर्स मानते हैं कि वह उनके साहसिक कारनामे की मीडिया कवरेज से सदमे में आ गए थे। स्पीयर्स अपनी बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए समय पर वापस आ गए थे लेकिन उन्हें अपनी पत्नी को यह मनाने में अब भी मशक्कत करनी पड़ी कि वह कहानी सच्ची थी।

इसके बाद क्या हुआ

-रेग स्पीयर्स 1981 में एडिलेड से गायब हो गए, जब उन पर कोकीन के आयात का षड्यंत्र करने का आरोप लगा।
-उन्हें 1984 में श्रीलंका में गिरफ़्तार किया गया और मादक द्रव्य के मामलों में मौत की सज़ा मिली।
-लेकिन इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ उनकी अपील सफल रही और फिर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की जेल में पांच साल बिताए।

हवाई जहाज़ उद्योग से जुड़े लोग कहते हैं कि अब ऐसा नहीं हो सकता। सामान रखने की जगह को सामान्यतः दाबानुकूलित किया जाता है और वहां तापमान जमा देने वाला होता है।

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