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जिसे दो बार मिली मौत की सजा, हाईकोर्ट ने किया रिहा

Sat, 16 Jan 2016 03:28 PM IST
Updated Sat, 16 Jan 2016 03:28 PM IST
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Man gets death sentence twice, then walks free.

शारीरिक रुप से विकलांग एक शख्स, जिसे निचली अदालत ने दो बार मौत की सजा सुनाई हो, अब उसे हाईकोर्ट ने बरी करने का आदेश दिया है।

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मामला कोलकाता का है जहां रहने वाले बाबू मोला साल 2009 से जेल में बंद हैं। उन पर पांच साल के एक बच्चे की हत्या का आरोप लगा था।

पुलिस की ओर से बताया गया कि बाबू मोला की आंखें नहीं थी ऐसे में आंखें बदलवाने के लिए उसने पांच साल के बच्चे को अपने घर पर बुलाया और हत्या करके उसकी आंखें निकाल ली।

इस मामले में पुलिस की ओर से हत्या में इस्तेमाल चाकू को आधार बनाया गया। जिसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने उसे सजा सुनाई।

हालांकि 7 दिसंबर को कोलकाता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस अशिम कुमार रॉय और मुमताज खान ने जांच पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच अधिकारियों की ओर से दिए गए सबूत सीधे तौर पर मोला को दोषी नहीं ठहराते हैं।
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ट्रायल कोर्ट ने दो बार सुनाई फांसी की सजा

Man gets death sentence twice, then walks free.

इसके बाद हाईकोर्ट ने वरिष्ठ वकील शेखर बसु को इस मामले में न्यायमित्र बनाया। बसु ने ट्रायल कोर्ट के फैसले कई समस्याएं होने की बात कही।

बताया जा रहा कि मोला की समस्याएं उस समय बढ़नी शुरू हुई जब उनके गांव का एक बच्चा गायब हो गया। इस मामले में पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई गई, गुमशुदगी की सूचना भी दी गई लेकिन सोहेल का कुछ पता नहीं चला।

इस घटना के दो दिन बाद सिफॉन नाम के बच्चे ने खुलासा किया कि जिस समय सोहेल हमारे साथ खेल रहा था मोला ने उसे अपने घर बुलाया था। जिसके बाद सोहेल और सिफॉन मोला के घर गए। जहां मोला ने सिफॉन को वापस भेज दिया और सोहेल को रोक लिया।

इस खुलासे के बाद ग्रामीणों ने पुलिस के सामने अंदेशा जताया कि मोला के परिवार ने आंखें ट्रांसप्लांट के इरादे से सोहेल की हत्या कर दी। इसके बाद मोला के घर की जांच हुई लेकिन उन्हें वहां कुछ भी नहीं मिला।

हाईकोर्ट ने फैसले पर उठाए सवाल

Man gets death sentence twice, then walks free.

इस घटना के तीन दिन बाद गांव की हसीना बीवी ने दावा किया कि मोली की मां मंजुमा ने गांव के तालाब में कोई बड़ी बोरी फेंकते हुए देखा था। उसने बोरी में सोहेल का शव होने की आशंका जताई। इस खुलासे के बाद बाद तालाब की जांच हुई जिसमें तालाब से सोहेल का शव बरामद कर लिया।

शव को देखकर लगा कि उसकी हत्या 48 से 72 घंटे पहले हुई थी। साथ ही सोहेल की आंखें भी गायब थी। सोहेल के गले पर धारदार हथियार से कटे का निशान था।

इन खुलासों के बाद पुलिस ने मोला, उसकी मां और उसके तीन रिश्तेदारों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने मोला के घर की फिर से जांच की जिसमें उन्हें दीवार से खून के धब्बे, सिरिंज और एक बॉटल बरामद की।

इसके बाद पुलिस द्वारा की गई एक और जांच में पुलिस ने मोला के घर से चाकू बरामद किया। पुलिस ने अनुमान लगाया कि इसी से हत्या की गई होगी।

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हाईकोर्ट ने मोला को किया रिहा

Man gets death sentence twice, then walks free.

पुलिस की जांच में निकले तथ्यों के बाद ट्रायल कोर्ट ने मोला और उसकी मां को दोषी ठहराया जबकि बाकी पकड़े गए आरोपियों को रिहा कर दिया। फरवरी 2015 में हाईकोर्ट ने इस केस की जांच में खामियों के मद्देनजर रिट्रायल के लिए भेजा।

एक बार फिर से ट्रायल कोर्ट ने मोला और उसकी मां को दोषी ठहराया। फैसले में मोला को कोर्ट ने फांसी और मंजुमा को उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।

दूसरी बार ट्रायल कोर्ट से फैसले के बाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए। इसकी सुनवाई के दौरान जो बातें उभरी उसके मुताबिक मामले में जांच अधिकारी ने मनगढ़ंत तथ्य पेश किए।

ट्रायल कोर्ट ने जिस आधार पर फैसला सुनाया उसमें काफी खामियां थी। कई तथ्य एक दूसरे से उलझे हुए थे। इसके बाद हाईकोर्ट ने मोला को रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि मोला की मां पर ट्रायल चलता रहेगा।

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