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क्यों बना पूर्वी पाकिस्तान? उस दौर की फाइलें भी होंगी सार्वजनिक

Mon, 28 Sep 2015 12:34 PM IST
रीता तिवारी/ अमर उजाला, कोलकाता
रीता तिवारी/ अमर उजाला, कोलकाता Updated Mon, 28 Sep 2015 12:34 PM IST
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mamta governement will disclassified files of east pakistan

नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी 64 गोपनीय फाइलें सार्वजनिक करने के बाद अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूर्वी पाकिस्तान के निर्माताओं और आजादी से पहले के दौर की कैबिनेट बैठकों से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करेंगी।

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उनका दावा है कि इससे उस दौर के कई राजनेताओं के चेहरों से नकाब उतर जाएगा। ममता ने जिन फाइलों को सार्वजनिक करने का फैसला किया है।

उनमें वर्ष 1937 में अविभाजित बंगाल के पहले प्रधानमंत्री फजलुल हक से लेकर हुसैन शहीद सोहरावर्दी के शासनकाल तक की फाइलें शामिल हैं।

कांग्रेस का चेहरा आएगा सामने

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इन दोनों को पूर्वी पाकिस्तान का जनक कहा जाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान कृषक प्रजा पार्टी के फजलुल हक को अविभाजित बंगाल का पहला प्रधानमंत्री चुना गया था। उनकी सरकार कांग्रेस के समर्थन से बनी थी, लेकिन बाद में कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया था।

इसकी वजह से हक को मजबूरन अखिल भारतीय मुस्लिम लीग से हाथ मिलाना पड़ा था। ममता कांग्रेस के इसी चेहरे को सामने लाना चाहती हैं। ममता इन फाइलों के जरिये बताना चाहती हैं कि कैसे अपने राजनीतिक फायदे के लिए वह (कांग्रेस) आजादी के पहले से ही सरकारें बनाने व गिराने के खेल में शामिल रही है।

ममता ने कहा है कि वर्ष 1937 से 1947 तक कैबिनेट से संबधित तमाम दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया जाएगा। उनके मुताबिक, मुख्य सचिव और गृह सचिव ने गृह विभाग के अधिकारियों के साथ इन फाइलों की जांच की है।

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दिलचस्प जानकारी

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उन कागजात से तत्कालीन राजनीति की दशा-दिशा की दिलचस्प जानकारी मिलती है। सूत्रों के मुताबिक, उसी दौर की एक बैठक में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान पैदा हुए संकट पर भी विस्तार से बहस की गई थी।

उसी दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई थी कि अगर नेताजी की आजाद हिंद फौज ने जापानी फौज के साथ मिल कर बंगाल पर कब्जा कर लिया, तो आपात स्थिति से कैसे निपटा जाएगा।

इन दस्तावेजों में वर्ष 1943 में बंगाल में पड़े भयावह अकाल का भी जिक्र मिलता है। इसमें यह भी बताया गया है कि ब्रिटिश शासन ने किस तरह स्थानीय राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ मिल कर जानबूझ कर खाद्यान्नों की जमाखोरी की थी, जिसकी वजह से लाखों लोग भूखे मर गए थे। इन फाइलों से वर्ष 1946 के दौरान हुए भयावह दंगों में कांग्रेस की भूमिका का भी खुलासा होगा।

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