ममता के एक सियासी दांव ने बढ़ाई मोदी की मुश्किल
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी 64 फाइलों को सार्वजनिक कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है।
अपने इस एक सियासी दांव से ममता ने जहां भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को अपने नाम कर लिया है, वहीं मोदी सरकार पर केंद्र के पास पड़ी नेताजी से जुड़ी 130 फाइलों को सार्वजनिक करने का सियासी दबाव बढ़ गया है।
चूंकि लोकसभा चुनाव और बाद में नेताजी के परिवार के समक्ष गोपनीय फाइलों को वादा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं, ऐसे में ममता के इस सियासी दांव से सरकार को चिंता में डाल दिया है।
भाजपा हालांकि केंद्र से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने संबंधी सवाल से बच रही है, मगर इसी पार्टी के सुब्रमण्यम स्वामी ने इसके लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी देकर सरकार की उलझन बढ़ा दी है। हालांकि इस मुद्दे पर पीएम मोदी के वादे के बाद भी सरकार का रुख स्पष्ट नहीं रहा है।
राष्ट्रहित का ध्यान रखेगी सरकार
बीते अगस्त महीने में ही प्रधानमंत्री कार्यालय ने केंद्रीय सूचना आयोग को यह कह कर नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया था कि इससे भारत के दूसरे देशों से द्विपक्षीय संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
पश्चिम बंगाल में अपना आधार बढ़ाने में के लिए हाथ पांव मार रही भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि ममता सरकार की ओर से नेताजी से संबंधित फाइलें सार्वजनिक करने के बाद उसे राज्य में भावनात्मक मुद्दा बन चुके इस मामले में केंद्र की भूमिका स्पष्ट करनी होगी।
इस मामले में सरकार की दुविधा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने फाइलें सार्वजनिक करने के सवाल का सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि इसके लिए सरकार सबसे पहले राष्ट्रहित का ध्यान रखेगी।