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सबको हंसाने वाली आज लड़ रही है मौत से जंग
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 21 Dec 2012 09:24 AM IST
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दिल्ली में गैंगरेप की शिकार हुई छात्रा अभी भी जिंदगी की जंग लड़ रही है। हालांकि उसके मां-बाप को आशा है कि हर बार की तरह उनकी बेटी यह जंग जीतने में कामयाब रहेगी।
खेत तक बेच दिया मां-बाप ने
मां-बाप ने जब अपनी होनहार बेटी को डॉक्टर बनाने के बारे में सोचा तो उनके पास कुछ नहीं थी। फिर उनकी नजर पड़ी बाप-दादा की आखिरी निशानी खेत पर। इन लोगों ने एक बार अपने दो छोटे बेटों की ओर देखा और फिर कड़ा फैसला लिया। उस निशानी यानी खेत को बेटी की पढ़ाई की खातिर बेच दिया।
मुस्कुराकर बेटी को भेजा था दिल्ली
मन में बस एक ही आशा थी कि बेटी डॉक्टर बन गई तो दिन बदल जाएंगे। पर उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि जिस खुशी के साथ वो बच्ची को दिल्ली में इंटर्नशिप के लिए भेज रहे हैं वहां से ऐसा खबर मिलेगी। कुछ दरिंदों ने उनकी बेटी के साथ चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया और फिर उसे सड़क पर फेंक दिया।
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मौत से जंग लड़ रही है पीड़िता
पीड़िता के पिता का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में मुस्कुराना अपनी बेटी से ही सीखा। वह बेहद खुशमिजाज है। निर्भीकता तो उसमें कूट-कूट कर भरी हुई है। आज वही अस्पताल के बिस्तर पर मौत से जंग लड़ रही है। एक बार फिर बेटी ने अपने जज्बे, गौरव और हिम्मत से मां-बाप का सर ऊंचा कर दिया।
लोकसभा स्पीकर भी रह गई दंग
लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार जब पीड़िता और उनके मां-बाप से मिली तो दंग रह गई। मीरा कुमार ने कहा, 'मैं लड़की के मां-बाप से मिली। उनसे मिलने के बाद मेरे दिल में उनके लिए और इज्जत बढ़ गई। ये लोग आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं पर उन्होंने एक बार फिर भी मदद की बात नहीं की। यह आत्मसम्मान और हिम्मत विरले लोग में दिखते हैं। जो बात मेरे दिल को छू गई वह मां-बाप का अपनी बेटी पर भरोसा। मैंने आमतौर पर बेटी की शादी के लिए जमीन बेचते हुए सुना पर कम ही लोग बेटी की पढ़ाई के लिए जमीन बेचते होंगे।
इलाज के लिए सरकार ने कसी कमर
इधर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा है कि पीड़िता की गंभीर हालत को देखते हुए यदि डॉक्टर सलाह देते हैं तो इलाज के लिए विदेश भेजने में भी सरकार कोताही नहीं करेगी। इसके लिए जैसी भी सहायता की जरुरत पड़ेगी सरकार करेगी।
ये सिर्फ दिल्ली सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार का भी कहना है कि एक बार लड़की की हालत स्थिर हो जाए। वह खतरे से बाहर जाए तो डॉक्टर जहां कहीं भी कहेंगे हम उसे इलाज के लिए ले जाएंगे।
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खेत तक बेच दिया मां-बाप ने
मां-बाप ने जब अपनी होनहार बेटी को डॉक्टर बनाने के बारे में सोचा तो उनके पास कुछ नहीं थी। फिर उनकी नजर पड़ी बाप-दादा की आखिरी निशानी खेत पर। इन लोगों ने एक बार अपने दो छोटे बेटों की ओर देखा और फिर कड़ा फैसला लिया। उस निशानी यानी खेत को बेटी की पढ़ाई की खातिर बेच दिया।
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मुस्कुराकर बेटी को भेजा था दिल्ली
मन में बस एक ही आशा थी कि बेटी डॉक्टर बन गई तो दिन बदल जाएंगे। पर उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि जिस खुशी के साथ वो बच्ची को दिल्ली में इंटर्नशिप के लिए भेज रहे हैं वहां से ऐसा खबर मिलेगी। कुछ दरिंदों ने उनकी बेटी के साथ चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया और फिर उसे सड़क पर फेंक दिया।
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मौत से जंग लड़ रही है पीड़िता
पीड़िता के पिता का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में मुस्कुराना अपनी बेटी से ही सीखा। वह बेहद खुशमिजाज है। निर्भीकता तो उसमें कूट-कूट कर भरी हुई है। आज वही अस्पताल के बिस्तर पर मौत से जंग लड़ रही है। एक बार फिर बेटी ने अपने जज्बे, गौरव और हिम्मत से मां-बाप का सर ऊंचा कर दिया।
लोकसभा स्पीकर भी रह गई दंग
लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार जब पीड़िता और उनके मां-बाप से मिली तो दंग रह गई। मीरा कुमार ने कहा, 'मैं लड़की के मां-बाप से मिली। उनसे मिलने के बाद मेरे दिल में उनके लिए और इज्जत बढ़ गई। ये लोग आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं पर उन्होंने एक बार फिर भी मदद की बात नहीं की। यह आत्मसम्मान और हिम्मत विरले लोग में दिखते हैं। जो बात मेरे दिल को छू गई वह मां-बाप का अपनी बेटी पर भरोसा। मैंने आमतौर पर बेटी की शादी के लिए जमीन बेचते हुए सुना पर कम ही लोग बेटी की पढ़ाई के लिए जमीन बेचते होंगे।
इलाज के लिए सरकार ने कसी कमर
इधर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा है कि पीड़िता की गंभीर हालत को देखते हुए यदि डॉक्टर सलाह देते हैं तो इलाज के लिए विदेश भेजने में भी सरकार कोताही नहीं करेगी। इसके लिए जैसी भी सहायता की जरुरत पड़ेगी सरकार करेगी।
ये सिर्फ दिल्ली सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार का भी कहना है कि एक बार लड़की की हालत स्थिर हो जाए। वह खतरे से बाहर जाए तो डॉक्टर जहां कहीं भी कहेंगे हम उसे इलाज के लिए ले जाएंगे।