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‘राजाओं की कहानियां नहीं संतों की वाणी पढ़ाएं’

Sat, 05 Jan 2013 07:32 PM IST
तिरुवनंतपुरम/एजेंसी
तिरुवनंतपुरम/एजेंसी Updated Sat, 05 Jan 2013 07:32 PM IST
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make teachings of sages part of school syllabus says advani

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले इतिहास में केवल राजाओं, राजवंशों और उनके बीच युद्धों की कहानियों की बजाय साधुओं और संतों और उनकी शिक्षाओं एवं आदर्शों के बारे भी बताया जाना चाहिए।

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आडवाणी के अनुसार पाठ्यक्रमों में उस समय के साधु संतों का कोई उल्लेख नहीं है, जिन्होंने समाज को किसी न किसी रूप में अत्यधिक प्रभावित किया है।

अपने ब्लॉग में उन्होंने लिखा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे साधुओं-संतों के असाधारण योगदान को बच्चों से आमतौर पर दूर रखा गया है, और अक्सर यह दुहाई दी जाती है कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म से जुड़ा कोई भी पहलू वर्जित है। यह एक बेतुका दृष्टिकोण है।
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उन्होंने कहा कि अगर स्वामी दयानंद सरस्वती, श्री रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद जैसे संतों की शिक्षाओं और आदर्शों को सामान्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाता है तो इससे हमारे स्कूली अध्ययन का स्तर बढ़ेगा।
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उन्होंने गुरुओं की शिक्षाओं को स्कूल के सिलेबस में शामिल करने का आश्वासन देने के लिए केरल के मुख्यमंत्री ओम्मान चांडी की पीठ थपथपाई। साथ ही कहा कि अन्य राज्यों को भी इस तरह की पहल करनी चाहिए।

भाजपा नेता ने सुझाव दिया कि जिस तरह आई क्यू (बौद्धिक योग्यता) के बाद अब एम क्यू (भावनात्मक योग्यता) पर जोर दिया जाने लगा है उसी तरह हमें एस क्यू यानी आध्यात्मिक योग्यता पर भी ध्यान देना चाहिए।


भाजपा नेता ने कहा कि एस क्यू की बात करते हुए उनके मन में कोई भी धर्म या पंथ नहीं है, बल्कि उनके मन में केवल यह है कि एक छात्र अपने शिक्षण संस्थान से क्या नैतिक मूल्य ग्रहण करता है।

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