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भारत-अमेरिका: कुछ सवाल जिनके नहीं मिलते जवाब

Wed, 01 Oct 2014 09:16 AM IST
अमर उजाला नेटवर्क/नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क/नई दिल्ली Updated Wed, 01 Oct 2014 09:16 AM IST
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major questions in indo us relation.

रक्षा सौदों से जुडे़ पेंच - भारत-अमेरिका में एटमी करार से जुड़े कई पेंच उलझे हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि भारत में कोई हादसा होने पर अमेरिकी कंपनियों को जिम्मेदारी से मुक्त रखा जाए। ऐसे में भारत की सुरक्षा प्रभावित होगी, और यदि ऐसा नहीं किया जाता तो अमेरिका भारत में परमाणु रिएक्टर लगाने का इच्छुक नहीं है। ऐसे में बीच का रास्ता क्या होगा?

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रेड कारपेट या रेड टेप - अमेरिकी कंपनियां भारत में अपने लिए रेड कारपेट बिछा हुआ नहीं मानतीं। वे मानती हैं कि भारत में रेड टेप (लालफीताशाही) है। रेड कारपेट बिछाने में कई कानूनी व तकनीकी पहलू मोदी के लिए कठिनाई पैदा करेंगे। क्या पीएमओ ने इन कानूनी पचड़ों से निबटने की योजना बनाई है?
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एफडीआई नीति को लेकर उत्साह नहीं - मोदी द्वारा रक्षा, बीमा और रेल के बुनियादी ढांचे में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाने के बावजूद अमेरिका में उत्साह नहीं है, क्योंकि वे प्रबंधन पर कोई नियंत्रण नहीं होने और 49 फीसदी की हिस्सेदारी से संतुष्ट नहीं हैं। क्या मोदी इन कारोबारियों को सिर्फ आश्वासन देकर लुभा पाएंगे?
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निवेश लायक माहौल का अभाव - देश को बड़ा निर्माण केंद्र बनाने के लिए विदेशियों से निवेश करने के निवेदन करने की नहीं, बल्कि देश के भीतर गंभीर परिवर्तन करने की जरूरत है। जब भारतीय ही देश में निवेश करने के लिए उत्साहित नहीं हैं, तो भला अमेरिकी भारत आकर निवेश में रुचि क्यों लेंगे?

भारत को उम्मीदें

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विदेशी संस्थागत निवेश की संभावना - मोदी की विदेशी संस्थागत निवेशकों के साथ मुलाकात इस बात का संकेत है कि निवेशकों के लिए भारतीय बाजार बहुत उत्साहजनक है। 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश पहले ही भारतीय बाजारों में आ चुका है, आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा।

भारतीय असेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री को लाभ - यह इंडस्ट्री फिलहाल 10 लाख करोड़ की है, जिसके अगले कुछ सालों में दोगुने होने का अनुमान है। ये कंपनियां अब अपना कारोबार यूरोप के साथ-साथ नार्थ अमेरिका में आसानी से बढ़ा सकेंगी।

वैश्विक फंड मैनेजरों को अच्छे दिन की आस - भारत का शेयर बाजार मोदी के सत्ता में आने के बाद से ही अच्छे रिटर्न दे रहा है। इस यात्रा के दौरान दुनिया भर के फंड मैनेजरों का उत्साह उन्हें भारतीय शेयर बाजार मे पूंजी झोंकने को प्रेरित करेगा, जिससे छोटे-बड़े निवेशकों को लाभ होगा।

आईटी और बैंकिंग सेक्टर में रोजगार का मौका - मोदी की 17 कॉरपोरेट प्रमुखों से मुलाकात के खास मायने हैं, वे गूगल, आईबीएम, जीई, गोल्डमैन सैक्स और बोइंग जैसी कंपनियों के शख्सीयतों से मिले। यदि मोदी 20 प्रतिशत निवेश भी बढ़ा सके तो भारत की बैंकिंग व आईटी सेक्टर में रोजगार की बेहतर संभावनाएं जगेंगी।

40 अमेरिकी सांसदों की लॉबिंग बनाएगी माहौल - यूएस के 40 सांसदों ने मोदी के शब्दों को प्रेरणादायी और विहंगम दृष्टिकोण से परिपूर्ण, और एक ने उन्हें करिश्माई व्यक्ति भी कहा। ऐसी प्रतिक्रियाएं अमेरिकी कंपनियों को भविष्य में भारत के भीतर निवेश के पक्ष में माहौल बनाएंगी।

इन मुद्दों पर हैं मतभेद

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- अमेरिकी हितों को चोट पहुंचाने वाली भारतीय पेटेंट व्यवस्था
- बढ़ता संरक्षणवाद
- इन्फ्रास्ट्रक्चर की बर्बादी
- नए कर नियमन को पहले के व्यापार पर लागू करना (जैसा वोडाफोन मामले में हुआ)
- अंतरण मूल्यों पर अनगिनत कर विवाद
- गैस खोजों पर मुक्त मूल्य निर्धारण पर भारत का पीछे हटना
- दवा क्षेत्र में मूल्य नियंत्रण पर तेज दबाव
- विश्व व्यापार संगठन समझौते में रोड़ा डालना
- नई परियोजनाओं की मंजूरी में लकवाग्रस्त देरी

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