छठे चरण में दांव पर इन दिग्गजों की प्रतिष्ठा
लोकसभा चुनावों के छठें चरण में 12 राज्यों की 117 सीटों पर मतदान हो रहा है।
इनमें बिहार की 7, झारखंड की 4, मध्य प्रदेश की 10, छत्तीसगढ़ की 7, राजस्थान की 5, तमिलनाडु की सभी 39 सीटें, उत्तर प्रदेश की 12, महाराष्ट्र की 19 पं. बंगाल और असम की 6-6 सीटें शामिल हैं। छठें चरण में भी कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है।
पढ़िए, दिग्गजों का ब्योरा, जिनके भाग्य आज ईवीएम में बंद हो जाएंगे।
महाराष्ट्र की 19 सीटों के लिए मतदान आज
महाराष्ट्र में तीसरे और अंतिम चरण के लिए 19 सीटों पर आज मतदान होगा। पिछली बार इनमें से कांग्रेस-एनसीपी ने 12 और बीजेपी-शिवसेना ने 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इस बार कांग्रेस-एनसीपी को जहां अपनी पोजीशन बचाए रखने की चिंता है वहीं भाजपा-शिवसेना को बेहतर प्रदर्शन कर सीट बढ़ाने की चिंता है। महाराष्ट्र में पहले चरण में विदर्भ की 10 और दूसरे चरण में 19 सीटों पर मतदान प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।
बृहस्पतिवार को मुंबई-ठाणे की नौ सीटों सहित उत्तर महाराष्ट्र की आठ और मराठवाड़ा की औरंगाबाद एवं जालना सीट पर मतदान होगा। राज्य में कुल 3,17,39,442 मतदाता और 338 उम्मीदवार हैं।
कहीं विरासत तो कहीं प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती
इस चरण में राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ खड़से की बहु रक्षा खड़से, एनसीपी नेता छगन भुजबल और मंत्री सुनील तटकरे सहित कई कद्दावर नेताओं की किस्मत दांव पर है।
कई राजपुत्रों और राजपुत्रियों के लिए राजनीतिक विरासत बचाए रखने की भी भारी चुनौती है।
आदिवासी बहुल जिला नंदूरबार में जहां केंद्रीय मंत्री माणिकराव गावित 10वीं बार जीत के लिए दम भर रहे हैं, वहीं एनसीपी नेता व चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहे डॉ. विजय कुमार गावित का राजनीतिक करियर दांव पर है।
महाराष्ट्र में इन सीटों पर हो रहा मतदान
गावित ऐन चुनाव के वक्त अपनी बेटी डॉ. हिना गावित के लिए एनसीपी छोड़ दी। इससे उनकी लाल बत्ती भले चली गई, लेकिन कमल के निशान पर कांग्रेस के इस अभेद्य गढ़ को भेदने का खतरनाक किंतु साहसी कदम उठाया है।
स्पष्ट है कि बेटी डॉ. हिना गावित की सफलता ही डॉ. विजय कुमार गावित का भविष्य तय करेगी।
इन सीटों पर होगा मतदान: बृहस्पतिवार को अंतिम दौर में दक्षिण मुंबई, दक्षिण मध्य मुंबई, उत्तर मुंबई, उत्तर-पश्चिम मुंबई, उत्तर-मध्य मुंबई, उत्तर-पूर्व मुंबई, ठाणे, कल्याण, भिवंडी, पालघर, रायगढ़, नासिक, रावेर, नंदूरबार, जलगांव, रावेर, दिंडोरी, धुले, औरंगाबाद और जालना लोकसभा सीट पर मतदान होगा।
मुंबई में कठिन है कांग्रेस की राह
2009 के लोकसभा चुनाव में मुंबई की सभी छह सीटों पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस-एनसीपी के लिए इस बार इतिहास दोहरा पाना मुश्किल है।
मोदी लहर पर सवार बीजेपी-शिवेसना गठबंधन सभी छह सीटों पर भगवा फहराने की फिराक में है। कांग्रेस-एनसीपी के लिए अपनी सीट बचाना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
पिछली बार मनसे के मैदान में होने से कांग्रेस ने पांच तो एनसीपी ने एक सीट जीतकर भगवा खेमे की हवा निकाल दी थी। पर, इस बार पाशा उल्टा पड़ सकता है।
भाजपा-शिवसेना के लिए जीत लग रही आसान
मुंबई में मुस्लिम और उत्तर भारतीय और अन्य मतदाता कांग्रेस का वोट बैंक है। अधिकांश उत्तर भारतीय मतदाता मोदी के मुरीद हो चुके हैं, तो मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी (आप) के खेमे में बंट गए हैं।
ऐसे में भाजपा शिवसेना गठबंधन के लिए जीत आसान लग रही है। दक्षिण मुंबई में पिछली बार कांग्रेस के मिलिंद देवड़ा ने शिवसेना के पांच बार सांसद रहे मोहन रावले को 1 लाख 46 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था।
इस बार देवड़ा को शिवसेना के मजदूर नेता अरविंद सावंत से कड़ा मुकाबला है। दक्षिण-मध्य मुंबई में एकन्नाथ गायकवाड़ का शिवसेना का राहुल शेवाले टक्कर दे रहे हैं। लेकिन मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के खास सिपहसालार आदित्य शिरोडकर के मैदान में होने से गणित उलझ गया है।
यहां विरासत को लेकर जंग छिड़ी है
कांग्रेस की सबसे सुरक्षित सीट मानी जा रही उत्तर-मध्य मुंबई में मुस्लिम और उत्तर भारतीय मतों के बिखराव से कांग्रेस की प्रिया दत्त का चुनावी समीकरण गड़बड़ा गया है। यहां विरासत को लेकर जंग छिड़ी है।
प्रिया अपने स्वर्गीय पिता सुनील दत्त की, भाजपा की पूनम महाजन अपने पिता स्वर्गीय प्रमोद महाजन की और सपा उम्मीदवार अपने पिता व सपा के प्रदेश अध्यक्ष अबु आसिम आजमी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में हैं।
कामत के लिए सीट बरकरार रख पाना टेढ़ी खीर
उत्तर-पश्चिम मुंबई में कांग्रेस के कद्दावर नेता गुरुदास कामत को भी इस बार कड़ी चुनौती से जूझना पड़ा है।
हालांकि यहां मनसे के फिल्म निर्माता उमीदवार महेश मांजरेकर और आईटम गर्ल राखी सावंत के मैदान में आने से चुनावी ग्लैमर का तड़का लगा है, लेकिन कामत के लिए सीट बरकरार रख पाना टेढ़ी खीर है।
उत्तर मुंबई में कांग्रेस के संजय निरूपम के लिए यह चुनाव वाटरलू का मैदान साबित हो रहा है। भाजपा ने गोपाल शेट्टी को मैदान में उतार कर निरूपम का समीकरण उलट दिया है। इसलिए उनके लिए दिल्ली बहुत दूर नजर आ रही है।
मेधा पाटकर के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय
मनसे कंडीडेट नहीं है। इसलिए पाटिल का पूरा दारोमदार मराठी वोटरों पर है, लेकिन आप की सशक्त उम्मीदवार मेधा पाटकर के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
ऐसे में भाजपा के किरीट सोमैया इस बार हार का बदला लेने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।
पश्चिम बंगाल में दांव पर है कांग्रेस की साख
पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनावों के दूसरे दौर में कांग्रेस की साख दांव पर है। इस दौर में मुकाबला कांग्रेस के गढ़ समझे जाने वाले इलाकों में हैं।
बृहस्पतिवार को जिन छह सीटों पर मतदान होना है उनमें से पांच सीटें पिछले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के कब्जे में रही थीं। यानी राज्य की 42 में से जो पांच सीटें कांग्रेस को मिली थी वे इन इलाकों में ही हैं। फिलहाल कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन सीटों को बचाए रखने की है।
इसलिए उसके लिए यह मतदान का सबसे अहम दौर है। इस दौर में मैदान में उतरे 78 उम्मीदवारों में कांग्रेस की दीपा दासमुंशी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पुत्र अभिजीत मुखर्जी भी शामिल हैं।
सबकी निगाहें रायगंज और जंगीपुर सीटों पर
इस दौर में बालूरघाट, रायगंज, मालदा उत्तर और मालदा दक्षिण और मुर्शिदाबाद के अलावा जंगीपुर सीट पर वोट पड़ेंगे। इनमें से बालूरघाट के अलावा बाकी तमाम सीटों पर कांग्रेस ही काबिज है।
बालूरघाट सीट वाममोर्चा की घटक आरएसपी ने जीती थी। अपने गढ़ को सुरक्षित रखने के लिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत पार्टी के तमाम आला नेता इलाके में चुनाव प्रचार कर चुके हैं।
इस दौर में सबकी निगाहें रायगंज और जंगीपुर सीटों पर लगी हैं। रायगंज में कांग्रेस की दीपा दासमुंशी सीट पर कब्जा बनाए रखने के लिए जूझ रही हैं।
जंगीपुर सीट पर राष्ट्रपति के बेटे अभिजीत मुखर्जी
उनके मुकाबले तृणमूल कांग्रेस ने यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रियरंजन दासमुंशी के भाई सत्यरंजन दासमुंशी को मैदान में उतार कर दीपा की राह में मुश्किलें पैदा कर दी हैं।
यहां लड़ाई देवर-भाभी के बीच है। इसका फायदा उठाते हुए सीपीएम ने यहां पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य मोहम्मद सलीम को मैदान में उतार दिया है।
जंगीपुर सीट पर राष्ट्रपति के पुत्र अभिजीत मुखर्जी वर्ष 2012 के उपचुनाव में महज ढाई हजार वोटों के अंतर से जीते थे। तब तृणमूल ने उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था।
छह सीटों के लिए 83 लाख उम्मीदवार
अबकी ममता ने इलाके के लोगों से अपने उम्मीदवार शेख नुल इस्लाम को जिताने की अपील की है। मालदा उत्तर सीट पर कांग्रेस की निवर्तमान सांसद मौसम नूर का मुकाबला तृणमूल उम्मीदवार और लोकप्रिय गायक सौमित्र राय से है।
मालदा दक्षिण सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एबीए गनी खान चौधरी के भाई अबू हाशेम खामन चौधरी इस सीट पर कब्जा बनाए रखने की कड़ी लड़ाई में फंसे हैं। बालूरघाट सीट पर तृणमूल और रंगमंच कलाकार अर्पिता घोष आरएसपी को कड़ी टक्कर दे रही हैं।
छह में से पांच सीटों पर कब्जा रखने वाली कांग्रेस को जाहिर है सबके आरोपों के तीर झेलने पड़ रहे हैं। इन छह सीटों के लिए लगभग 83 लाख उम्मीदवार आज वोट डालेंगे।