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महविश बोलीं, पति के हत्यारों को नहीं बख्शूंगी

Tue, 27 Nov 2012 08:31 AM IST
बुलंदशहर/ब्यूरो
बुलंदशहर/ब्यूरो Updated Tue, 27 Nov 2012 08:31 AM IST
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mahvish want justice in her husband murder case

जिसके लिए घर, परिवार, मां-बाप सब कुछ छोड़ दिया, दरिंदों ने उसे ही मुझसे छीन लिया। मैंने अपने खानदान और बिरादरी का क्या बिगाड़ा था, जिन्होंने मुझे प्यार करने की इतनी बड़ी सजा दी है। मैं अपने पति के हत्यारों को सजा दिलाए बिना चैन से नहीं बैठूंगी। यह कहना है भांटगढ़ी निवासी महिला महविश का, जिसको प्यार की कीमत अपने पति को खोकर चुकानी पड़ी है। गौर हो कि ये वही महविश हैं, जिसकी हकीम के साथ मोहब्बत को टीवी पर दिखाए गए रियलिटी शो सत्यमेव जयते में खुद आमिर खान ने सलाम किया था।

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पति की हत्या के बाद महविश की आंखों में डर भी है और गुस्सा भी। महविश का कहना है कि उसकी जिंदगी का मकसद पति के हत्यारों को सख्त सजा दिलाना है। उसने बताया कि परिजनों ने हकीम से प्रेम प्रसंग की जानकारी होने पर उसका रिश्ता अन्यत्र तय कर दिया तो हकीम और मैं सब कुछ छोड़कर प्यार के दुश्मनों की दुनिया से दूर चले गए थे। दूसरे बच्चे के जन्म के लिए कुछ दिन के लिए मैं पड़ोसी गांव में आई तो प्यार के दुश्मनों ने हकीम की हत्या कर दो वर्ष पहले सुनाए गए फरमान को पूरा कर लिया। मुझे कानून पर पूरा विश्वास है, आरोपियों को सख्त सजा मिलने के बाद ही चैन मिलेगा।
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क्रूरता की गवाही दे रहा सूखा खड़ा पेड़
हकीम के परिजनों का कहना है कि महविश के फरार होने और पंचायत के फरमान के बाद वह पैतृक गांव ढकौली नहीं पहुंचे। आरोपियों ने बदला लेने के लिए हकीम के बीमार पिता अब्दुल लतीफ को घर के बाहर खड़े पेड़ पर उलटा लटका दिया और उन्होंने बचाने पहुंची मां शकूरन बेगम की पिटाई की। इससे अब्दुल लतीफ की मौत हो गई। घर के बाहर आज भी वह सूखा पेड़ खड़ा है।
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मोहब्बत का सफर
29 अक्टूबर 2010 - हकीम-महविश घर छोड़कर फरार।
01 नवंबर  2010 - महविश के अपहरण की रिपोर्ट।
05 नवंबर 2010 - पुलिस ने हकीम के परिजन पकड़े।
11 नवंबर 2010 - मेरठ में प्रेमी युगल ने निकाह किया।
12 नवंबर 2010 - महिला-मानवाधिकार आयोग से शिकायत।
23 दिसंबर 2010 - जनपद से लेकर लखनऊ तक भेजे पत्र।
29 मार्च 2011 - हकीम की गिरफ्तारी पर कोर्ट से स्टे।
7 अप्रैल 2011 - हकीम की मां ने राज्यपाल को पत्र भेजा।
30 जून 2011 - प्रेमी युगल ने लव कमांडो से लगाई गुहार।
6 जुलाई 2011 - बीमार बाबा को देखने आए भतीजे को पीटा।
14 अगस्त 2012 - छह माह की गर्भवती महविश पड़ोसी गांव आई।
20 नवंबर 2012 - हकीम महविश को देखने गांव आया।
22 नवंबर 2012 - दवा लेकर लौटने के दौरान हकीम की हत्या।

ऑनर किलिंग से पुलिस का इंकार
पुलिस इस हत्याकांड को ऑनर किलिंग नहीं मान रही है। पुलिस हत्याकांड को 6 जुलाई 2011 को हकीम के भतीजे द्वारा दर्ज कराई गई एनसीआर से जोड़कर देख रही है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। उक्त मुकदमा अंतिम दौर में चल रहा है और तीन दिसंबर को मुकदमे की तारीख है। पुलिस यह भी तर्क दे रही है कि हकीम के परिजनों ने महविश के माता-पिता या परिवार के किसी भी शख्स को नामजद नहीं कराया है, लेकिन उसके खानदान के दो लोग नामजद हैं।


एसएसपी गुलाब सिंह ने बताया कि हकीम की हत्या से एक दिन पहले उसका नामजद आरोपी सलमान की मां से विवाद हुआ था। हकीम ने उसकी मां से अभद्रता की थी। अगले दिन सुबह सलमान ने मारपीट की। सूचना मिलने पर पुलिस गांव पहुंची, लेकिन सलमान फरार हो गया, दो अन्य को पकड़ा गया था। शाम के समय सलमान ने हकीम की हत्या कर दी। हकीम की हत्या ऑनर किलिंग नहीं है।

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