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महासंकल्प रैली आज, खुद के बूते पर ताकत दिखाएगी बसपा
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Tue, 09 Oct 2012 01:16 AM IST
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विधानसभा चुनाव में करारी हार के सात माह बाद बहुजन समाज पार्टी अब समाजवादी पार्टी को अपनी ताकत दिखा कर उसे जवाब देने की तैयारी में हैं। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने मार्गदर्शक व पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्य तिथि पर जो रैली बुलाई उसमें केंद्र की यूपीए सरकार कम अखिलेश सरकार ज्यादा निशाने पर होगी।
खास बात यह है कि सपा सरकार ने रैली के तीन रोज पहले कांशीराम की पुण्यतिथि पर होने वाले सार्वजनिक अवकाश का रद कर अनायास ही बसपा को आक्रामक होने का मुद्दा थमा दिया है। बसपा अब इसे दलित स्वाभिमान पर हमला बता कर अपने आधार वोट को एकजुट करने की तैयारी में हैं।
आज की रैली में मायावती जहां सपा सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाएंगी, वहीं रीटेल में एफडीए लाए जाने व रसोई गैस सिलेंडर की राशनिंग किए जाने के सवाल पर केंद्र से समर्थन वापसी पर भी अपना रणनीति का खुलासा करेगी।
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असल में बसपा अखिलेश सरकार के कामकाज को जीरो से भी बदतर बता कर अपने इरादे साफ कर चुकी है। बसपा दलित अस्मिता से जुड़े कई सवालों पर सपा सरकार को घेरने की तैयारी में है। इसका संकेत रैली में भी मिलेगा।
पिछले छह माह में सपा सरकार ने मायाराज के कई फैसलों को पलटा है। दलित व पिछड़े वर्ग के महापुरुषों के नाम पर चल रही कई योजनाओं को खत्म करने, जिलों के नाम बदलने जैसे कामों दलित महापुरुषों के नाम पर बने स्मारकों व पार्कों की उपेक्षा करने जैसे कई काम मौजूदा सरकार कर रही है।
बसपा को नाराज करने के लिए यह काफी है। बीच में कुछ शरारती तत्वों ने लखनऊ में मायावती की मूर्ति तोड़ दी। इस पर बसपा आक्रामक होती, इससे पहले सरकार ने समझदारी दिखाते हुए आनन-फानन में नई मूर्ति लगवा दी। बसपा को यह मुद्दा गर्माने का बड़ा मौका नहीं मिला। लेकिन कांशीराम की पुण्यतिथि पर सरकारी छुट्टी रद किए जाने के सवाल को बसपा अब जोर शोर से उछालेगी।
मायावती ने इसी सवाल पर कांग्रेस को घेर कर उसे दलित विरोधी बताती रहीं हैं। जब कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2006 में कांशीराम की मृत्यु होने पर सार्वजनिक अवकाश घोषित नहीं किया था तब मायावती ने कांग्रेस को दलित विरोधी मानसिकता से काम करने का आरोप लगाया था।
अगले साल विधानसभा चुनाव जीत कर मायावती ने सत्ता में आते ही नौ अक्टूबर 2007 को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया और अगले साल कांशीराम की जयंती 15 मार्च को भी छुट्टी घोषित कर दी।
बसपा को यह अंदेशा है कि उसकी रैली में सपा बाधा खड़ी कर सकती है। इस बार बसपा अपने काडर के जरिए ही भीड़ जुटाने में लगी है। बसपा यह भी चाहती है कि रैली में केवल दलित समाज की भागीदारी न हो बल्कि अपर कास्ट व मुस्लिम वर्ग के लोग भी रैली में आएं।
पिछले साल मायावती ने मुख्यमंत्री रहते हुए ब्राह्मण, वैश्य, पिछड़ा, दलित व मुस्लिम समाज की अलग अलग रैलियां लखनऊ के रमाबाई मैदान में की थी। विधानसभा चुनाव में हार से निराश कार्यकर्ताओं में मायावती इस रैली के जरिए जोश भरने की तैयारी में है।
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खास बात यह है कि सपा सरकार ने रैली के तीन रोज पहले कांशीराम की पुण्यतिथि पर होने वाले सार्वजनिक अवकाश का रद कर अनायास ही बसपा को आक्रामक होने का मुद्दा थमा दिया है। बसपा अब इसे दलित स्वाभिमान पर हमला बता कर अपने आधार वोट को एकजुट करने की तैयारी में हैं।
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आज की रैली में मायावती जहां सपा सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाएंगी, वहीं रीटेल में एफडीए लाए जाने व रसोई गैस सिलेंडर की राशनिंग किए जाने के सवाल पर केंद्र से समर्थन वापसी पर भी अपना रणनीति का खुलासा करेगी।
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असल में बसपा अखिलेश सरकार के कामकाज को जीरो से भी बदतर बता कर अपने इरादे साफ कर चुकी है। बसपा दलित अस्मिता से जुड़े कई सवालों पर सपा सरकार को घेरने की तैयारी में है। इसका संकेत रैली में भी मिलेगा।
पिछले छह माह में सपा सरकार ने मायाराज के कई फैसलों को पलटा है। दलित व पिछड़े वर्ग के महापुरुषों के नाम पर चल रही कई योजनाओं को खत्म करने, जिलों के नाम बदलने जैसे कामों दलित महापुरुषों के नाम पर बने स्मारकों व पार्कों की उपेक्षा करने जैसे कई काम मौजूदा सरकार कर रही है।
बसपा को नाराज करने के लिए यह काफी है। बीच में कुछ शरारती तत्वों ने लखनऊ में मायावती की मूर्ति तोड़ दी। इस पर बसपा आक्रामक होती, इससे पहले सरकार ने समझदारी दिखाते हुए आनन-फानन में नई मूर्ति लगवा दी। बसपा को यह मुद्दा गर्माने का बड़ा मौका नहीं मिला। लेकिन कांशीराम की पुण्यतिथि पर सरकारी छुट्टी रद किए जाने के सवाल को बसपा अब जोर शोर से उछालेगी।
मायावती ने इसी सवाल पर कांग्रेस को घेर कर उसे दलित विरोधी बताती रहीं हैं। जब कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2006 में कांशीराम की मृत्यु होने पर सार्वजनिक अवकाश घोषित नहीं किया था तब मायावती ने कांग्रेस को दलित विरोधी मानसिकता से काम करने का आरोप लगाया था।
अगले साल विधानसभा चुनाव जीत कर मायावती ने सत्ता में आते ही नौ अक्टूबर 2007 को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया और अगले साल कांशीराम की जयंती 15 मार्च को भी छुट्टी घोषित कर दी।
बसपा को यह अंदेशा है कि उसकी रैली में सपा बाधा खड़ी कर सकती है। इस बार बसपा अपने काडर के जरिए ही भीड़ जुटाने में लगी है। बसपा यह भी चाहती है कि रैली में केवल दलित समाज की भागीदारी न हो बल्कि अपर कास्ट व मुस्लिम वर्ग के लोग भी रैली में आएं।
पिछले साल मायावती ने मुख्यमंत्री रहते हुए ब्राह्मण, वैश्य, पिछड़ा, दलित व मुस्लिम समाज की अलग अलग रैलियां लखनऊ के रमाबाई मैदान में की थी। विधानसभा चुनाव में हार से निराश कार्यकर्ताओं में मायावती इस रैली के जरिए जोश भरने की तैयारी में है।