फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   mahesh jethmalani willing to raise difficulty for gadkari

गडकरी की राह में कांटे बिछाने को तैयार महेश जेठमलानी

Mon, 21 Jan 2013 08:36 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 21 Jan 2013 08:36 PM IST
विज्ञापन
mahesh jethmalani willing to raise difficulty for gadkari

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी की दोबारा ताजपोशी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बुधवार को भाजपा अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरे जाएंगे। इस बीच, भाजपा सांसद राम जेठमलानी के बेटे महेश जेठमलानी गडकरी के दोबारा निर्विरोध निर्वाचन की राह में कांटे बिछाने में जुट गए हैं। इस बात का संकेत महेश ने भाजपा अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की इच्छा जता कर दी है।

विज्ञापन


वैसे महेश जेठमलानी के चुनाव लड़ पाने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि नामांकन के लिए उन्हें पांच राज्यों से कुल 100 प्रस्तावक जुटाने होंगे, जो आसान नहीं है। साथ ही उनकी सक्रिय सदस्यता पर भी संशय है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि महेश अब पार्टी के सक्रिय सदस्य नहीं है, जबकि चुनाव लड़ने के लिए चार बार सक्रिय सदस्य रहना जरूरी है। पार्टी महासचिव व चुनाव अधिकारी थावर चंद गहलौत ने माना कि महेश की ओर से उनके किसी सहयोगी का फोन आया था और उन्होंने नामांकन पत्र की मांग की। फोन करने वाले को गहलौत ने कहा है कि नामांकन पत्र लेने के लिए उन्हें महेश से अधिकृत पत्र लाना होगा।
विज्ञापन


गहलौत ने चुनाव कार्यक्रम का ऐलान करते हुए कहा कि 23 जनवरी को सुबह 10.30 बजे से नामांकन पत्र भरे जाएंगे। उसी दिन 12.30 तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे। प्रस्तावक वही नेता बन सकते हैं, जिनके नाम मतदाता सूची में है। नामांकन पत्र भरने के लिए कम से कम पांच राज्यों से 20-20 यानी 100 प्रस्तावक चाहिए। यदि एक से ज्यादा नेताओं ने नामांकन पत्र भरे और वे सही पाए गए तो चुनाव तिथि तय की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


चुनाव में उन 19 राज्यों के मतदाता वोट डाल सकेंगे, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव हो चुके हैं। इन राज्यों में कुल 1949 मतदाता हैं। खास बात यह है कि खुद गडकरी का नाम मतदाता सूची में नहीं है, क्योंकि महाराष्ट्र में अभी राष्ट्रीय परिषद के चुनाव नहीं हो पाए हैं। बहरहाल, माना जा रहा है कि महेश को चुनाव मैदान में उतारने के पीछे गडकरी विरोधी खेमे का हाथ है। महेश अपने पिता राम जेठमलानी की तरह पहले भी गडकरी के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। गडकरी के विरोध में उन्होंने राष्ट्रीय परिषद से इस्तीफा दे दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed