फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Mahatma Gandhi says hanging of Bhagat Singh

क्या कहा था महात्मा गांधी ने भगत सिंह की फांसी पर?

Sat, 23 Mar 2013 10:41 AM IST
अलीगढ़/ब्यूरो
अलीगढ़/ब्यूरो Updated Sat, 23 Mar 2013 10:41 AM IST
विज्ञापन
Mahatma Gandhi says hanging of Bhagat Singh
आइए 8 दशक पीछे लौटते हैं। 23 मार्च 1931 को आज ही के दिन भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दे दी गई। उनकी फांसी पर महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘भगत सिंह और उनके साथियों के शहीद होने से लाखों व्यक्ति दुखी हैं। मैं उनकी लगन की भूरि-भूरी प्रशंसा करता हूं।
विज्ञापन


मैं देश के नवयुवकों को इस बात की चेतावनी देता हूं कि वे उनके पथ का अवलंबन न करें। हमें भरसक उनके अभूतपूर्व त्याग, अदम्य उत्साह और विकट साहस का अनुकरण करना चाहिए, परंतु उन गुणों का उपयोग उनकी तरह न करना चाहिए। देश की स्वतंत्रता हिंसा और हत्या से प्राप्त न होगी’
विज्ञापन


महात्मा गांधी के ये बयान छपे 1931 में इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाले अखबार ‘भविष्य’ में। अंग्रेज सरकार फांसी की खबरों वाले अखबारों के प्रसार को रोकना चाहती थी। कई अखबारों की हजारों प्रतियां अभियान चला कर जब्त कर ली गईं, लेकिन अलीगढ़ के श्याम बिहारी लाल ने ‘भविष्य’ अखबार की उस समय की प्रतियां अपने पास रख लीं जो भविष्य में राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास को बयां करने का दस्तावेज बनीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


श्याम बिहारी लाल गुप्तचर स्वतंत्रता सेनानी थे। 2005 में श्याम बिहारी लाल की मौत के बाद आईटीआई रोड स्थित इंडस्ट्रियल एस्टेट में रहने वाले इनके बेटे निरंजन लाल ने इन्हें बहुत ही हिफाजत से सहेजा। सन 1931 के इन अखबारों की सुर्खियों से पता चलता है कि जमाने ने भगत सिंह की फांसी की खबर को किस अंदाज में जाना होगा। उस समय की खबरों से पता चलता है कि अंग्रेजी हुकूमत भगत सिंह की फांसी की खबर को दबाना चाहती थी।

भगत सिंह के आखिरी उद्गार (पंजाब के गवर्नर को लिखा पत्र)

‘अंत में हम केवल यह कहना चाहते हैं कि आपकी अदालत के फैसले के अनुसार हम पर सम्राट के विरुद्ध युद्ध करने का अभियोग लगाया गया है। और इस प्रकार हम युद्ध के शाही कैदी हैं। अतएव हमें फांसी पर न लटका कर गोली से उड़ाया जाना चाहिए।


इसका निर्णय अब आपके ही ऊपर है कि जो कुछ अदालत ने निर्णय किया है उसके अनुसार आप कार्य करेंगे या नहीं। हमारी आपसे विनम्र प्रार्थना है और हमें पूर्ण आशा है कि आप कृपा कर फौजी महकमे को आज्ञा देकर हमारे प्राण दंड के लिए एक फौज या पल्टन के कुछ जवान बुलवा लेंगे’
- सरदार भगत सिंह, मार्च 1931, लाहौर सेंट्रल जेल
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed