गोडसे के अलावा क्या किसी और ने भी मारी थी गांधी को गोली?
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30 जनवरी 1948 को राष्ट्रपति महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे के अलावा और किसने मारा था। यह सवाल उनकी हत्या के कई सालों बाद उठा है। अभिनव भारत के ट्रस्टी डॉ. पंकज फडणीस ने केंद्रीय कानून मंत्री सदानंद गौड़ा से महात्मा गांधी की हत्या की फिर से जांच की मांग की है।
उन्होंने अपने तर्क में कहा कि गांधी की हत्या की जांच के लिए गठित कपूर आयोग की रिपोर्ट में कुछ बुनियादी चीजों को नजरंदाज किया गया है। डॉ. फडणीस ने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद 31 जनवरी 1948 को कराची से प्रकाशित डान अखबार ने लिखा था कि गांधी को चार गोलियां लगी थी। यही रिपोर्ट अन्य कई अखबारों में छपी थी।
द हिंदू ने तो महात्मा गांधी की हत्या की बड़ी तस्वीर छापी थी, जिसमें यह साफ दिखाई देता है कि गांधी को चार गोलियां लगी थी। लेकिन, गांधी हत्याकांड के मामले में जो केस चला उसमें तीन गोलियों का ही जिक्र किया गया।
पिस्टल से बरामद हुई थीं चार गोलियां
डॉ. फडणीस ने बताया कि महात्मा गांधी की मौत के दौरान मौके पर
उपस्थित रॉयटर्स के पत्रकार केसी राय ने अपने दफ्तर में फोन कर बताया था कि
महात्मा गांधी को चार गोलियां लगी।
पुलिस ने नाथूराम गोडसे की एम-34 बरेटा इटालियन पिस्टल से चार गोलियां भी बरामद की थी, जबकि उस पिस्टल में सात गोलियां आती हैं। महात्मा गांधी की हत्या शाम 5 बजकर 12 मिनट पर हुई थी, लेकिन कपूर आयोग ने हत्या का समय दोपहर 3 बजे बताया था।
उन्होंने सवाल किया कि जब गोडसे की पिस्टल से तीन ही गोलियां दागी गई थी तो चौथी गोली किसकी थी। कपूर कमीशन ने इन तथ्यों की जांच पड़ताल की कोशिश क्यों नहीं की। महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अखबारों की खबरों को काफी महत्व दिया गया था।
'कुछ नेताओं की मिलीभगत से हुई गांधी की हत्या'
दूसरा, एक नया तथ्य सामने आया है जिससे महात्मा गांधी की हत्या को लेकर
संशय बढ़ गया है। डॉ. फडणीस ने बताया कि गांधी की हत्या के जुर्म में
नाथूराम गोडसे के साथ प्रमुख सूत्रधार के रूप में एनडी आप्टे को भी फांसी
दी गई थी।
आप्टे को रिकॉर्ड में एयरफोर्स का अधिकारी बताया गया है, जबकि उस
समय वायुसेना अस्तित्व में नहीं थी। ऐसे में कपूर आयोग की पूरी थ्योरी पर
संदेह पैदा होता है। फडणीस ने दावा किया कि कम्युनिस्ट शासित देश के एक
नेता ने रूस के एक परिषद में कहा था कि महात्मा गांधी की हत्या ब्रिटिश व
कुछ नेताओं की मिलीभगत से हुई थी।
इससे संदेह पैदा होता है कि उनकी हत्या
के लिए बड़ा षड्यंत्र रचा गया था। इसलिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की
हत्या से जुड़े नए तथ्यों की जांच होनी चाहिए।