महाराष्ट्र सरकार का फरमान, खतरे में 'आजादी'
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महाराष्ट्र सरकार ने एक तुगलकी फरमान जारी करते हुए राज्य की जनता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगा दिया है। सरकार ने एक आदेश जारी करते हुए यह साफ कर दिया है कि अगर किसी ने सोशल मीडिया पर या किसी अन्य तरीके से किसी भी जनप्रतिनिधि के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की तो उस व्यक्ति पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार के इस नए आदेश के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सरकार के किसी भी प्रतिनिधि के खिलाफ लिखकर, बोलकर, चित्र बनाकर या किसी अन्य माध्यम से आपत्तिजनक टिप्पणी करता है तो उस देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाएगा। ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 124ए के तहत कार्रवाई की जाएगी।
IPC की धारा 124ए के तहत कार्रवाई
महाराष्ट्र सरकार ने जनप्रतिनिधियों की श्रेणी में सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, जिला परिषद अध्यक्ष और पार्षदों को शामिल किया गया है। महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले की चारों तरफ आलोचना हो रही है।
ऐसा माना जा रहा है कि सरकार अपने इस फैसले से लोगों को संविधान से मिले अभिव्यक्ति की स्वंत्रता के अधिकार को छिनने की कोशिश कर रही है। अब सरकार का यह फैसला कितने दिनों तक प्रभावी रहता है इसका जवाब तो आगे आने वाले समय में ही चल पाएगा।
क्या IPC की धारा 124ए
भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 124 (ए) के मुताबिक अगर कोई भी व्यक्ति अपने शब्दों, इशारों, चित्रों या किसी अन्य तरीके से सरकार के खिलाफ नफरत या अवमानना फैलाएगा या कोशिश करेगा उसे उसे देशद्रोह का गुनहगार माना जाएगा।
इस धारा का उल्लंघन करने वाले पर देशद्रोह का मुकदमा चलाते हुए उम्रकैद तक की सजा सुनाई जा सकती है। इस कानून को अंग्रेजों ने 1857 में स्वतंत्रता की पहली लड़ाई के तीन साल बाद 1860 में बनाया गया था। सरकार ने ऐसा इसलिए किया था कि आगे आने वाले समय में फिर को मंगल पांडे सरकार के खिलाफ अपनी आवाज न उठा सके।
आईपीसी की धारा 124ए न सिर्फ पुलिस को अनावश्यक और असीमित अधिकार देती है बल्कि इसके जरिये व्यवस्था से असहमति जताने वालों को परेशान करने के कई उदाहरण भी रहे हैं।