राजठाकरे की तरह जहरीली भाषा में बोले महाराष्ट्र के मंत्री
महाराष्ट्र की भाजपा सरकार भी अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे की भाषा बोलने लगी है। महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री ने खुले तौर पर गैर-मराठियों को चेतावनी दी है कि यदि मुंबई में व्यवसाय करना है तो मराठी बोलनी पडे़गी।
मंत्री के इस बयान के बाद मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीय ही नहीं, भाजपा के सबसे बड़े वोट बैंक माने जाने वाले गुजरातियों में भी नाराजगी फैल गई है। महाराष्ट्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता व शिक्षामंत्री विनोद तावड़े ने मराठी मुद्दे को हवा दी है।
उन्होंने कहा है कि मुंबई में व्यवसाय करने वाले दुकानदारों को मराठी बोलनी पड़ेगी। दुकानों में सिर्फ मराठी में बोर्ड लगाने से काम नहीं चलेगा, यदि महाराष्ट्र में रहना है तो मराठी आनी ही चाहिए।
तावड़े ने यह भी कहा है कि यदि किसी कॉल सेंटर से कोई फोन हिंदी और अंग्रेजी में आता है तो उससे कहिए कि मराठी में ही बात करेंगे। इससे कॉल सेंटर वालों को मराठीभाषी लोगों को अपने यहां नियुक्त करना पड़ेगा।
मराठी मानसिकता को लेकर भाजपा का एक गुट नाराज
उन्होंने मराठी विश्वकोष के विमोचन के मौके पर यह मराठी राग छेड़ा है जो मनसे की शैली से खासा मेल खाता है। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी उपस्थित थीं, पर उन्होंने इस पर कोई टीका टिप्पणी नहीं की।
मजे की बात यह है कि तावड़े गुजराती और हिंदीभाषी मतदाताओं की बदौलत विधानसभा पहुंचे है क्योंकि, वह जिस विधानसभा बोरिवली से चुनकर आए हैं वह गुजराती और उत्तर भारतीय बाहुल्य सीट है।
गुजरातीभाषी विपुलेश वैद्य ने कहा कि मराठी में बोलने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन कॉल सेंटर से आने वाले फोन पर हिंदी या अंग्रेजी में बात नहीं करने की सलाह और चेतावनी भरा लहजा आपत्तिजनक है।
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री चंद्रकांत त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा-शिवसेना में कोई ज्यादा फर्क नहीं है। यह एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। मुंबई के उत्तर भारतीयों को इसका ध्यान रखना चाहिए। महाराष्ट्र के परप्रांतीय मतदाताओं ने नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर चुनाव में भाजपा को एकमुश्त समर्थन दिया था। पर, इस तरह के बोल से उनका मोहभंग हुआ है। तावड़े की मराठी मानसिकता को लेकर भाजपा का भी एक गुट नाराज है।