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महाराष्ट्र: क्या पर-प्रांतीयों को रोकने की कोशिश में है राज्य सरकार?

Wed, 01 Apr 2015 10:59 PM IST
Updated Wed, 01 Apr 2015 10:59 PM IST
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Maharashtra govt. special plan for other state people.

रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों से मुंबई आने वाले लोग शिवेसना और मनसे जैसी प्रखर मराठीवादी पार्टियों के निशाने पर रहे हैं लेकिन अब राज्य सरकार भी उन्हें खदेड़ने पर उतारू हो गई है।

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महाराष्ट्र की भाजपा-शिवसेना सरकार ने वित्तीय वर्ष 2015-2016 के आम बजट में मुंबई आने वाली पर-प्रांतीयों की भीड़ को रोकने के लिए बाकायदा निधि का प्रस्ताव किया गया है। इसे लेकर हंगामा मचा तो वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार बचाव में आ गए। उन्होंने सफाई दी कि पर-प्रांतीयों को रोकने की ऐसी कोई योजना नहीं है।
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विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री ने पर-प्रांतीयों को मुंबई आने से रोकने की योजना का कोई जिक्र नहीं किया था। लेकिन, सामान्य प्रशासन विभाग के विषय क्रमांक 29 (अ) की कार्य निधि वितरण पत्रिका में ‘मुंबई आने वाले पर-प्रांतीयों की भीड़ को रोकने की उपाय योजना’ शीर्षक के तहत निधि प्रस्तावित की गई है।
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हंगामा बढ़ने पर बचाव में आए वित्तमंत्री

Maharashtra govt. special plan for other state people.

इस बजट प्रस्ताव पर हंगामा शुरू हो गया। कई समर्थन में आए तो कई लोगों ने यह दलील देनी शुरू की कि बजट प्रस्ताव नहीं बल्कि कानून बनाने की जरूरत है। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। आश्चर्य यह है कि जिस पर-प्रांतीय वोट बैंक के बलबूते भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मात दी, अब सरकार बनने पर उन्हीं को भगाना चाहती है।

हंगामा मचने के बाद वित्तमंत्री मुनगंटीवार ने बुधवार को सफाई दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विशाल हृदय वाला प्रदेश है इसलिए किसी को मुंबई से बाहर निकालने का सवाल ही नहीं उठता।

मुनगंटीवार ने विधानसभा में विनियोजन विधेयक पेश करते हुए यह स्वीकार किया कि सामान्य प्रशासन विभाग की कार्य पुस्तिका में जो 25 कार्य गिनाए गए हैं, उसमें मुंबई आने वाले पर-प्रांतीयों को रोकने की उपाय योजना का जिक्र है लेकिन पुस्तिका में यह लाइन कैसे छपी, इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी।

वित्तमंत्री ने कहा कि सन् 2008-2009 के बजट में भी पुस्तिका में इसका उल्लेख था लेकिन बजट प्रावधान नहीं था। परंतु, उस समय इस पर कोई विवाद नहीं हुआ।

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