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इनसे सीखिए पानी की हर बूंद की कीमत
पुणे/अमित कुमार
Updated Thu, 13 Jun 2013 12:09 AM IST
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सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र से ज्यादा बेहतर पानी की कीमत कौन जान सकता है। किसानों के पास सीमित संसाधन हैं। पानी की कमी और तेज धूप के चलते यहां फसल को बनाए रखना बेहद मुश्किल काम है।
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बावजूद इसके यहां किसानों ने हार नहीं मानी है, आधुनिक तकनीक और समझबूझ के दम पर वह अपनी समस्याओं का हल ढूंढने में लगे हुए हैं।
अहमदनगर जिले के कई गांवों में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां किसान न सिर्फ सीमित पानी का उपयोग कर अपनी जरूरतें पूर कर रहे हैं बल्कि आने वाले कल के लिए पानी का संचय भी कर रहे हैं।
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राज्य के लगभग हर गांव में आधुनिक ड्रिप इरिगेशन सिस्टम का प्रयोग किया जा रहा है। ड्रिप इरिगेशन के तहत पाइपलाइन के जरिए अलग-अलग प्वाइंट के माध्यम से सिर्फ पौधे की जड़ में ही पानी दिया जाता है।
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इसके अलावा फसल की जड़ों में प्लास्टिक की थैलियों को बांध कर खेती की जा रही है, ताकि नमी जल्दी से बाहर न जा सके। भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य के किसानों ने कृत्रिम तालाबों के रूप में उपाय ढूंढ निकाला है।
पूरे महाराष्ट्र में नेशनल होर्टीकल्चर स्कीम के तहत 8000 से भी ज्यादा गांवों में प्लास्टिक शीट वाले तालाबों का निर्माण किया गया है।
राज्य के कृषि मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल भी बताते हैं कि जल संचय करने के किसानों के प्रयास काफी सराहनीय हैं। इसमें मदद के लिए सरकार ने भी कई तरह की सब्सिडी स्कीम चलाई है।
इसी तरह की कोशिशों में जुटे स्थानीय किसान देशमुख बताते हैं कि सिंचाई हमारे लिए एक बड़ी समस्या है, लेकिन इन तकनीकों के इस्तेमाल से हम सीमित संसाधनों में भी खेती करने में सफल हो रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल मंदा ताई
मंदा ताई बाबा साहिब चौहान। एक ऐसा नाम जिनके हौसला कोई मुश्किल या परेशानी भी नहीं तोड़ सकी।
अहमदनगर जिले के एक गांव में खेती बाड़ी और घोड़ों का अस्तबल चलाने वाली मंदा ताई के घर में एक भी पुरुष नहीं है। पांच बेटियों का भार भी उन्हीं पर है। फिर भी कंधे झुके नहीं। आज उनके खेत लहलहा रहे हैं।
पिछले साल मंदा ताई अपने खर्चे पर इस्राइल में आयोजित होने वाले कृषि मेले में गई और वहां की तकनीकों को अपने खेतों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल भी किया।
उनकी कुछ नया सीखने की ललक यहीं पर नहीं रुकी बल्कि इस साल वह सरकार द्बारा चलाई जा रही योजना के तहत थाइलैंड, वियतनाम और मलेशिया का भ्रमण कर के लौटी हैं।
मंदा ताई बताती हैं कि वह चाहती हैं कि महिलाएं घर से बाहर निकलें। इसी प्रयास में उन्होंने कई महिला ग्रुप बनाए हैं, जो गांव-गांव जाकर महिलाओं को जागरूक करती हैं।
अब तक वह 10 से भी ज्यादा महिला किसानों के पासपोर्ट बनवा चुकी हैं। मंदा ताई के अनुसार उनका सपना है कि हर महिला किसान अपनी ताकत को पहचाने।