मोदी-शाह करेंगे मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला
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महाराष्ट्र और हरियाणा में मुख्यमंत्री की कुर्सी का ताज किसे हासिल होगा, इस पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह करेंगे। रविवार को चुनाव नतीजे आने के बाद हुई पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में न तो महाराष्ट्र में गठबंधन पर कोई फैसला हुआ और न ही मुख्यमंत्री के नाम पर कोई विचार विमर्श हुआ।
हालांकि विधायकों की राय जानने के लिए आलाकमान ने दोनों ही राज्यों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। हरियाणा में जहां केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू और पार्टी उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा को पर्यवेक्षक बनाया गया है।
वहीं महाराष्ट्र की जिम्मेदारी गृह मंत्री राजनाथ सिंह और महासचिव जेपी नड्डा को दी गई है। जिस प्रकार राजनाथ को पर्यवेक्षक बनाया गया है, उससे दोनों दलों के करीब आने की संभावना बढ़ी है क्योंकि उनके उद्धव ठाकरे से मधुर रिश्ते रहे हैं।
बोर्ड की बैठक के बाद मोदी और शाह की अलग से 15 मिनट बैठक हुई। बैठक में हालांकि तय किया गया है कि शिवसेना से पार्टी सशर्त समर्थन नहीं लेगी।
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र फडनवीस अब भी सबसे आगे हैं। वहीं हरियाणा में मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस कायम है। दरअसल हरियाणा में सबसे पहले नेतृत्व को यह तय करना है कि वह किसी गैर जाट को मुख्यमंत्री बनाएगी या जाट बिरादरी के किसी नेता को।
जाट बिरादरी में जहां कैप्टन अभिमन्यु और ओमप्रकाश धनखड़ को इस पद का दावेदार माना जा रहा है, वहीं गैर जाट में दावेदारों की सूची बहुत लंबी है। गैर जाट बिरादरी से इस पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार मनोहर लाल खट्टर को माना जा रहा है। खट्टर के अतिरिक्त इस पद के दावेदारों में प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा और अनिल विज शामिल हैं।
संकेत है कि युवा, क्षमतावान और नया चेहरा सरकार की बागडोर संभाल सकता है। पार्टी में एक धड़ा खासतौर पर संघ किसी गैर जाट नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी दिए जाने के हक में है, जबकि दूसरा धड़ा पार्टी हित में जाट नेतृत्व खड़ा करने के लिए इसी बिरादरी के किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में है।
रिश्ता कायम रखना चाहता हूं: उद्धव
महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों के बाद अब सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। जहां एनसीपी की ओर से बीजेपी को बाहर से समर्थन का ऐलान किया तो वहीं शिवसेना भी अब बीजेपी से एक बार फिर हाथ मिलाने को तैयार नजर आ रही है।
इससे पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने में समर्थन देने को तैयार है। लेकिन इसको लेकर उनके पास अब तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है। अगर प्रस्ताव आएगा तो उस पर विचार किया जाएगा। हालांकि उन्होंने ये भी जोडा़ कि वह खुद प्रस्ताव लेकर बीजेपी के पास नहीं जाएंगे।
एनसीपी के बीजेपी को समर्थन देने के मुद्दे पर जब उद्धव से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी को एनसीपी पसंद है तो उनके साथ जाए। हालांकि उद्धव ने बीजेपी को याद दिलाया कि चुनाव प्रचार के दौरान एनसीपी की उन्होंने बहुत आलोचना की थी।
एनसीपी भाजपा को बाहर से समर्थन देने को तैयार
महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, भाजपा को बाहर से समर्थन देने को तैयार हो गई है। एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि नतीजों को देखते हुए ये तय है कि अगली सरकार भाजपा ही बनाएगी। महाराष्ट्र में स्थिर सरकार उसी हालत में दी भी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि पार्टी के सामने अब कोई विकल्प नहीं बचा है। जो सबसे बेहतर दिख रहा है, वही किया जाना ठीक है।
वहीं, महाराष्ट्र भाजपा इकाई के अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने कहा है कि एनसीपी के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनसीपी के प्रस्ताव पर संसदीय बोर्ड की बैठक में चर्चा की जाएगी।
महाराष्ट्र की सभी 288 सीटों के नतीजे आ गए हैं। भाजपा गठबंधन को 123 सीटें जीतीं हैं। शिवसेना 63, एनसीपी 41 और कांग्रेस 42 सीटें जीत चुकी है।
फड़नवीस का दावा, महाराष्ट्र में अगला सीएम बीजेपी का
महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने भाजपा राज्य में सरकार बनाएगी और अगला मुख्यमंत्री भाजपा का ही होगा। राष्ट्रवादी पार्टी के नेता डीपी त्रिपाठी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र की हार से सबक ले या ना ले, लेकिन एनसीपी हार के कारणों का विश्लेषण करेगी और सबक लेगी।
महाराष्ट्र में नए मुख्यमंत्री के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री और पूर्व भाजपा अध्यक्ष नीतिन गडकरी ने कहा है कि मैं पहले ही कह चुका हूं कि मैं महाराष्ट्र नहीं जा रहा हूं। मैं दिल्ली में खुश हूं और मैं जो काम यहां कर हूं, उसे आगे भी करते रहना चाहता हूं।
वहीं, आरएसएस नेता एमजी वैद्य ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा की जीत में आरएसएस की कोई भूमिका नहीं है। यह मोदीजी की लोकप्रियता और भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है।