मैगी न होती तो टीवी पर न दिखते ये हिट टीवी सीरियल
आप मैगी को भले ही कितना भी धिक्कार लें लेकिन मैगी न होती तो आप टीवी पर रोज नए नए सीरियल शायद नहीं देख पाते। जी हां, मैगी ने ही 1982 में भारतीय टीवी जगत के पहले डेली सोप' हम लोग' को स्पॉन्सर किया था। यानी टीवी के इतिहास में स्पांसरशिप की शुरूआत मैगी ने ही की।
1982 एशियाई खेलों के तुंरत बाद सूचना प्रसारण मंत्री वसंत साठे ने देखा कि मेक्सिको में जनता के हित और विकास संबंधी धारणा बनाने के लिए किस तरह टीवी पर डेली सोप का इस्तेमाल किया जाता है। वसंत साठे ने प्रयास किया कि भारत में भी इसी तरह टीवी पर डेली सोप दिखाए जाएं और उनके माध्यम से जनता के बीच विकास के संदेश पहुंचाए जाएं।
साठे ने डेली सोप का सक्सेस का ये मंत्र जानने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम मेक्सिको भेजी जिसके लौटने के बाद फैमिली प्लानिंग का संदेश देने के लिए एक डेली सोप बनाने की बात कही गई। इसके तुरंत बाद मनोहर श्याम जोशी से संपर्क किया गया जिन्होंने इसकी पटकथा लिखी।
इस तरह तय हुआ ब्रेक में विज्ञापन का सिलसिला
उसी समय नेस्ले के नूडल ब्रांड मैगी ने भारत में अपना काम शुरू किया। वसंत साठे की पहल पर मैगी ने हम लोग के निर्माण और प्रसारण के लिए राशि दी और इसकी एवज में प्रसारण समय में पांच मिनट मिनिट लिए। सीरियल में ब्रेक के दौरान सिर्फ मैगी के विज्ञापन दिखाए जाने लगे।
नतीजा शानदार था, एक तरफ मैगी टू मिनिट की सेल अप्रत्याशित रूप से बढ़ी और दूसरी तरफ हम लोग जनता के बीच लोकप्रिय हुआ।
हम लोग की सफलता से उत्साहित दूरदर्शन ने कई और सीरियल जैसे बुनियाद, कथा सागर, खानदान और नुक्कड़ जैसे सीरियल बनाकर प्रसारित किए।
दूसरी तरफ मेगी की सेल में इजाफा देखकर दूसरी व्यवसायिक कंपनियां भी टीवी सीरियलों को स्पॉन्सर करने लगी और डेली सोप का चलन चल निकला।